बुंदेलखंड की पहचान लंबे समय तक डकैतों और सख़्त सामाजिक सोच से जुड़ी रही है। यहां आज भी यह माना जाता है कि कौन-सा काम किसे करना चाहिए यह समाज तय करेगा। ऐसे माहौल में जब कोई महिला तय सीमाओं को तोड़कर आगे बढ़ती है तो उसे सिर्फ़ संघर्ष ही नहीं, सवालों और विरोध का भी सामना करना पड़ता है।
झांसी की अनिता चौधरी ऐसी ही महिला थीं जिन्होंने इन धारणाओं को चुनौती दी।
अनीता चौधरी उत्तर प्रदेश के झांसी की पहली महिला ऑटो-रिक्शा चालक थीं। उन्होंने न सिर्फ़ अपने लिए रोज़गार चुना बल्कि आत्मसम्मान के साथ जीने का रास्ता भी बनाया। उनकी कहानी हिम्मत और आत्मनिर्भरता की मिसाल थी। लेकिन 5 जनवरी 2026 को यह साहसिक सफ़र बेहद दर्दनाक मोड़ पर खत्म हो गया। झांसी में 45 वर्षीय अनीता की बेरहमी से हत्या कर दी गई। वह जिले की पहली महिला ऑटो चालक थीं। मौत को शुरुआत में सड़क हादसा माना गया था। लेकिन जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि यह कोई एक्सीडेंट नहीं बल्कि गोली मारकर की गई हत्या थी। झांसी की पहली महिला ऑटो ड्राइवर को जानबूझकर निशाना बनाया गया था।
आरोपी के ऊपर 25 हज़ार का इनाम
मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज़ करते हुए अब तक दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं फरार मुख्य आरोपी की तलाश जारी है और उस पर 25 हज़ार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच लगातार आगे बढ़ रही है और जल्द ही पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जाएगी।
पोस्टमार्टम से खुला हत्या का राज
नवाबाद थाना क्षेत्र के तालपुरा इलाके की रहने वाली 40 वर्षीय ऑटो चालक अनीता चौधरी का शव देर रात स्टेशन रोड पर मिला था। घटनास्थल पर उनका ऑटो भी पास में पलटा हुआ पड़ा था जिससे शुरुआती तौर पर पुलिस ने इसे सड़क हादसा मान लिया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
लेकिन शाम को आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरे मामले की दिशा बदल दी। रिपोर्ट में साफ हुआ कि अनीता की मौत गोली लगने से हुई थी। इसके बाद पुलिस तुरंत सक्रिय हुई। मृतका के पति की शिकायत पर पुलिस ने अनीता के पुराने परिचित मुकेश झा उसके बेटे शिवम और रिश्तेदार मनोज झा के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया। कार्रवाई करते हुए शिवम और मनोज को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं मुख्य आरोपी मुकेश झा फरार है। एसएसपी ने उसकी गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर दी हैं और उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपी को पकड़ लिया जाएगा।
गहने गायब, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका
अनीता के शव की जांच में यह सामने आया कि उनके शरीर पर चोटें सिर्फ़ सिर और गर्दन के हिस्से में थीं। बाकी शरीर पर किसी तरह की गंभीर चोट के निशान नहीं मिले। वहीं घटनास्थल से उनका मंगलसूत्र, झुमके, पायल और मोबाइल फोन भी नहीं मिले। इन बातों को देखते हुए परिजनों ने इसे लूट के बाद की गई हत्या बताया है।
अनीता के पति द्वारिका चौधरी जो बस स्टैंड के पास ठेला लगाकर परिवार चलाते हैं ने कहा है कि अगर यह सड़क हादसा होता तो शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी चोटें होतीं। उनके मुताबिक सिर्फ़ सिर पर चोट होना और गहनों का गायब होना इस बात की ओर इशारा करता है कि यह एक सोची-समझी हत्या है न कि दुर्घटना।
रात में भी चलाती थी ऑटो
अनीता चौधरी, नवाबाद थाना क्षेत्र के तालपुरा स्थित अंबेडकर नगर में रहती थी। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार उनकी बहन विनीता चौधरी ने बताया है कि “मेरी बड़ी बहन अनीता झांसी की पहली ऑटो ड्राइवर थी। वे सुबह और रात को ऑटो चलाती थी। दिन में घर के कामकाज निपटाती थी। रविवार रात 9:30 बजे वह घर से ऑटो चलाने निकली थी।”
अनिता को मेहनत से मिली पहचान और हिम्मत
आर्थिक तंगी के बीच अनीता चौधरी ने समाज और परिवार की आपत्तियों के बावजूद ऑटो खरीदने का फैसला लिया। बैंकों ने लोन देने से मना कर दिया और रिश्तेदारों ने एक महिला के ऑटो चलाने पर सवाल उठाए लेकिन अनिता डटी रहीं। उन्होंने खुद अपने दस्तावेज़ तैयार किए और 18 फरवरी 2021 को फाइनेंस पर ऑटो खरीदा, एक पड़ोसी से ड्राइविंग सीखी और झांसी की सड़कों पर निकल पड़ीं। जिन इलाकों में महिला ड्राइवर की कल्पना भी नहीं की जाती थी वहां वह रोज़ सवारियां ढोने लगीं। उनकी मेहनत और हिम्मत ने उन्हें झांसी की पहली महिला ऑटो चालक की पहचान दिलाई और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने उन्हें सम्मानित भी किया। इसके बावजूद अनीता बेहद सादगी से जीती रहीं। उनकी बहन विनीता चौधरी के मुताबिक वह कभी शिकायत नहीं करती थीं बस यही चाहती थीं कि उनके बच्चे पढ़-लिखकर बेहतर ज़िंदगी जिएं। दिन में घर संभालना और सुबह शाम ऑटो चलाना ही उनकी ज़िंदगी थी और वही ऑटो उनकी पहचान भी बन गया।
परिजनों की माँग
इस घटना के बाद परिवार के साथ-साथ इलाके के लोगों में भी गहरा गुस्सा है। परिजन चाहते हैं कि मामले की ईमानदार और पूरी जांच की जाए और जो भी दोषी हों उन्हें कड़ी से कड़ी सज़ा मिले। अनीता की बहन विनीता का कहना है कि आसपास लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जानी चाहिए ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके और किसी भी साजिश को छुपने का मौका न मिले।
यह घटना सिर्फ़ एक हत्या नहीं बल्कि उस सोच पर भी सवाल है जो आज भी किसी महिला को आगे बढ़ते देख असहज हो जाती है। जब महिलाएं परंपरागत दायरों से बाहर निकलती हैं तो समाज का एक हिस्सा इसे सहज रूप से स्वीकार नहीं कर पाता और यही असहजता कई बार हिंसा का रूप ले लेती है। अनीता चौधरी की कहानी इसी सच्चाई को उजागर करती है।
यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’
