वीडियो में विद्यालय की प्रधानाध्यापक छात्राओं से अपने हाथ-पैर दबवाती नजर आई जबकि वह खुद मोबाइल फोन चलाती दिखाई देती हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रधानाध्यापक मधु राय को निलंबित कर दिया है और पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है।
रिपोर्टिंग – नाज़नी रिज़वी, लेखन – रचना
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय से सामने आए वायरल वीडियो ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में विद्यालय की प्रधानाध्यापक छात्राओं से अपने हाथ-पैर दबवाती नजर आई जबकि वह खुद मोबाइल फोन चलाती दिखाई देती हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रधानाध्यापक मधु राय को निलंबित कर दिया है और पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है। वहीं स्कूल के कुछ बच्चों ने भी आरोप लगाया है कि उनसे लंबे समय से इस तरह के निजी काम कराए जाते रहे हैं हालांकि प्रधानाध्यापक ने इन आरोपों को गलत बताते हुए कहा है कि उस दिन उनकी तबीयत खराब थी और छात्राओं ने खुद ही उनके पैर दबाए थे।
प्रधानाध्यापक ने अपनी सफाई में क्या कहा
बीते दिनों वायरल वीडियो को लेकर जब प्रधानाध्यापक मधु राय से फोन पर बात की गई तो उन्होंने कहा कि उस दिन उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई थी। उन्होंने स्कूल में खाना बनाने वाली रसोइया से रिक्शा बुलाने को कहा। रसोइया ने कहा कि जब तक रिक्शा आए तब तक वह लेट जाएं और चटाई बिछाकर उन्हें लिटा दिया।
मधु राय का कहना है कि छात्राएं खुद आगे आकर उनका शरीर दबाने लगी थीं और इस घटना को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यालय में कार्यरत शिक्षामित्र कल्पना ने ही यह वीडियो बनाकर किसी पत्रकार को भेज दिया जिसके बाद यह सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
प्रधानाध्यापक ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने शिक्षामित्र को पहले स्कूल का सामान चोरी करते हुए पकड़ा था। हाल ही में उन्होंने विद्यालय की चाबी भी उसे नहीं दी थी जिससे नाराज होकर उसने यह वीडियो वायरल कराया। मधु राय का यह भी कहना है कि वायरल वीडियो अभी का नहीं बल्कि पिछले साल का है और फिलहाल वह इलाज के लिए अवकाश पर हैं।
उन्होंने शिक्षामित्र कल्पना के ऊपर आरोप लगाते हुए कहा कि “एक साल से यह वीडियो छिपाकर क्यों रखा गया? अभी तक क्यों नहीं दिया? क्योंकि मैं चाबी देकर नहीं आई हूं इसलिए ऐसा किया गया। पहले वह मेरी गैरमौजूदगी में पानी की मोटर ले गई थी जो करीब छह महीने बाद वापस मिली। फिर स्कूल के ड्रम और बर्तन भी ले गई थी। मैंने कभी शिकायत नहीं की क्योंकि वह शिक्षामित्र है और उसे सिर्फ दस हजार रुपये मिलते हैं। यह सोचकर मैं उसकी मदद करती थी।कपड़े, जूते तक दिलाती थी लेकिन उसने मेरी शराफत का फायदा उठाया।”
बच्चों ने भी दिया अपना बयान
स्कूल के कुछ बच्चों से बातचीत में अलग तस्वीर सामने आई। कक्षा 4 में पढ़ने वाली सृष्टि और दुर्गेश्वरी ने बताया कि मधु राय टीचर द्वारा लड़कों से बाहर से सामान मंगवाया जाता था जबकि लड़कियों से हाथ-पैर दबवाए जाते थे। उनका कहना है कि यह कोई एक दिन की बात नहीं है बल्कि लंबे समय से ऐसा होता आ रहा है।
छात्राओं के अनुसार वे अपने घर पर भी इसकी शिकायत करती थीं लेकिन कई बार घर वाले डांट देते थे। उनका कहना है कि जब वे मना करती थीं तो टीचर चिल्लाती थीं और जबरदस्ती हाथ-पैर दबवाती थीं।
कक्षा चार की छात्रा नीता ने बताया“मैं दो साल से यहां पढ़ रही हूं। जब से क्लास दो में एडमिशन हुआ है तब से मैडम हमसे हाथ-पैर दबवाती हैं। कभी-कभी लड़कियों को अपने घर भी ले जाती हैं और वहां भी उनसे काम करवाया जाता है।” नीता ने आगे कहा “मेरी मम्मी भी इसी स्कूल में पढ़ चुकी हैं। जब मैंने उनसे शिकायत की तो उन्होंने कहा कि मैडम पहले से ही ऐसा करती हैं।” अनुष्का ने बताया कि कई बार टॉयलेट में भी बच्चों से पानी डलवाया जाता था। उसके मुताबिक मैडम बाथरूम जाने के बाद बच्चों से पानी डलवाती थीं और हाथ-पैर दबवाना भी अक्सर होता था।
शिक्षामित्र कल्पना ने आरोपों से किया इनकार
शिक्षामित्र कल्पना ने वीडियो बनाने के आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि वह खुद वायरल वीडियो में बैठी दिखाई दे रही हैं इसलिए यह कहना सही नहीं है कि वीडियो उन्होंने बनाया है।
कल्पना के अनुसार जिस समय की घटना बताई जा रही है उस समय स्कूल में एसआईआर का काम चल रहा था और वहां कई अधिकारी तथा लोग आते-जाते रहते थे। ऐसे में वीडियो किसी ने भी बनाया हो सकता है किसी अभिभावक ने या किसी अन्य व्यक्ति ने। उन्होंने चोरी के आरोपों को भी निराधार बताया और कहा कि अगर ऐसा था तो प्रधानाध्यापक को इसकी लिखित शिकायत करनी चाहिए थी।
प्रभारी प्रधानाध्यापक ने क्या कहा
फिलहाल स्कूल का कार्य संभाल रहे प्रभारी प्रधानाध्यापक भारत कुमार पांडेय का कहना है कि उन्हें इस मामले की ज्यादा जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि वह करीब चार महीने पहले ही इस स्कूल में आए हैं और अभी हाल ही में जॉइन किया है। एसआईआर के काम में ड्यूटी होने के कारण वे कक्षाओं में अधिक समय नहीं दे पाए।
उन्होंने बताया कि वायरल वीडियो उनके आने से पहले का बताया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद से स्कूल में लगातार अधिकारी और पत्रकार आ रहे हैं और बच्चों से पूछताछ कर रहे हैं।
वीडियो वायरल होते ही हुई कार्रवाई
वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रधानाध्यापक को निलंबित कर दिया है। हालांकि निलंबन पर प्रतिक्रिया देते हुए मधु राय ने कहा कि उन्हें इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता। उनका कहना है कि उनकी सेवा का सिर्फ एक साल ही बाकी है और वह स्वास्थ्य कारणों से पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन दे चुकी हैं लेकिन स्टाफ की कमी के कारण उन्हें अभी तक सेवानिवृत्ति नहीं दी गई।
उन्होंने यह भी कहा कि उनका परिवार आर्थिक रूप से मजबूत है और निलंबन से उन्हें कोई खास चिंता नहीं है।
पूर्व छात्रों का दावा तीस साल से ऐसा ही चल रहा है
वायरल वीडियो के बाद एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। करीब बीस से पच्चीस साल पहले इस स्कूल में पढ़ चुके कुछ पूर्व छात्रों ने नाम न बताने की शर्त पर दावा किया कि उस समय भी बच्चों से इसी तरह के काम कराए जाते थे। एक पूर्व छात्रा ने बताया कि कई बार छात्राओं को स्कूल के बाद प्रधानाध्यापक के घर भी ले जाया जाता था और उनसे घरेलू काम कराए जाते थे।
उनका कहना है कि यह कोई नई बात नहीं है बल्कि करीब तीन दशक से चला आ रहा सिलसिला है। बड़ा सवाल यह है कि अगर यह सब कुछ 30 साल से हो रहा था तो आवाज क्यों नहीं उठी? अगर पूर्व छात्रों के दावों पर भरोसा किया जाए तो यह सवाल भी उठता है कि अगर यह सिलसिला इतने लंबे समय से चल रहा था तो आज तक किसी बच्चे अभिभावक या स्कूल स्टाफ ने इसकी शिकायत क्यों नहीं की?
लोगों का मानना है कि ग्रामीण इलाकों में शिक्षक के खिलाफ बोलने में लोग हिचकिचाते हैं। कई बार बच्चों को भी यह समझ नहीं होता कि उनसे कराया जा रहा काम गलत है या नहीं। बीएसए वीरेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि उन्हें इस तरह की कोई शिकायत नहीं मिली थी और न ही उन्हें इसकी जानकारी थी। जैसे ही वायरल वीडियो सामने आया उसकी जांच की गई और तत्काल मधु राय को निलंबित कर दिया गया। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
क्या कहता है कानून
बच्चों से निजी काम करवाना न सिर्फ नैतिक रूप से गलत है इसे कई नियमों का उल्लंघन भी माना जाता है। शिक्षा का अधिकार कानून (RTE Act 2009) के अनुसार स्कूल में बच्चों को सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण देना अनिवार्य है। शिक्षकों के सेवा नियमों के तहत भी छात्रों से किसी प्रकार का निजी या घरेलू काम करवाना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। बाल अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों से इस तरह का काम करवाना उनकी गरिमा और अधिकारों का उल्लंघन है।
फिलहाल शिक्षा विभाग ने प्रधानाध्यापक को निलंबित कर जांच शुरू कर दी है। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।
