खबर लहरिया Blog UP,Chitrakoot: राष्ट्रीय राजमार्ग यात्री प्रतीक्षालय टूटी हुई, “प्रतीक्षालय में बैठने पर लगता है डर” यात्री 

UP,Chitrakoot: राष्ट्रीय राजमार्ग यात्री प्रतीक्षालय टूटी हुई, “प्रतीक्षालय में बैठने पर लगता है डर” यात्री 

पांच साल पहले जब इस राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण हुआ था तब गांवों और कस्बों के पास यात्रियों की सुविधा के लिए प्रतीक्षालय बनाए गए थे।  जिन प्रतीक्षालयों को यात्रियों की सुविधा के लिए बनाया गया था वही आज उनकी जान के लिए खतरा क्यों बनते जा रहे हैं। 

रिपोर्ट – सुनीता देवी, लेखन – रचना   

गिरा हुआ शेड (फोटो साभार: सुनीता देवी)                                

सरकार द्वारा लोगों के विश्राम के लिए यात्री प्रतीक्षालय बनाए गए हैं। NH-35 पर बने यात्री प्रतीक्षालय अब सुविधा से ज्यादा खतरे की वजह बनते जा रहे हैं।

चित्रकूट जिला के अहरी गांव के निवासियों से मिली जानकारी के अनुसार पांच साल पहले जब इस राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण हुआ था तब गांवों और कस्बों के पास यात्रियों की सुविधा के लिए प्रतीक्षालय बनाए गए थे। शुरुआत में ये ठीक हालत में थे लोग यहां बैठकर बस का इंतजार करते थे और धूप-बारिश से बचाव भी हो जाता था लेकिन समय के साथ इनकी हालत पूरी तरह बिगड़ चुकी है।

आज इन प्रतीक्षालयों की स्थिति बेहद जर्जर हो गई है। टीन की छतों में बड़े-बड़े छेद हो चुके हैं लोहे में जंग लग गई है और पूरी संरचना कमजोर हो चुकी है। 

चित्रकूट जिला के अहरी गांव के निवासी शारदा प्रसाद बताते हैं कि करीब पांच साल पहले अहरी और रामनगर में ये प्रतीक्षालय लगाए गए थे लेकिन तब से आज तक इनकी कोई मरम्मत नहीं हुई। पिछले दो सालों से ये पूरी तरह टूटे-फूटे पड़े हैं। वे कहते हैं “अगर कोई व्यक्ति इनके नीचे बैठ जाए तो कभी भी हादसा हो सकता है। अब आंधी-तूफान का मौसम शुरू हो गया है ऐसे में इनके गिरने का खतरा और बढ़ गया है।”   

शेड टूटकर जर्जर (फोटो साभार: सुनीता देवी)                                       

लोगों से मिली जानकारी के अनुसार यह मार्ग प्रयागराज से बांदा को जोड़ने वाला प्रमुख हाईवे है जहां हर दिन बड़ी संख्या में लोग सफर करते हैं। ऐसे में इन प्रतीक्षालयों की खराब हालत सीधे तौर पर यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है। जिन प्रतीक्षालयों को यात्रियों की सुविधा के लिए बनाया गया था वही आज उनकी जान के लिए खतरा क्यों बनते जा रहे हैं।  

खतरा बने प्रतीक्षालय

चंदई गांव के रहने वाले रामप्रसाद पाल बताते हैं कि जब (पांच साल पहले) ये यात्री प्रतीक्षालय बनाए गए थे तब लोगों को काफी राहत मिली थी। बारिश हो या तेज धूप दोपहिया, साइकिल से चलने वाले और पैदल यात्री यहां रुककर कुछ देर आराम कर लेते थे लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। 

वे यह भी कहते हैं कि “कई जगह प्रतीक्षालय ऐसे स्थानों पर बनाए गए जहां बसें रुकती ही नहीं थीं। इसकी वजह से इनका इस्तेमाल धीरे-धीरे कम होता गया और वहां गंदगी फैलने लगी। अब हाल यह है कि अधिकतर समय वहां कुत्ते और अन्य जानवर ही बैठे रहते हैं।” रामप्रसाद के मुताबिक शुरुआत में इन प्रतीक्षालयों में सीमेंट की दो कुर्सियां, कचरा डालने के लिए डस्टबिन और ऊंचा चबूतरा बनाया गया था। ऊपर टीन शेड लगाया गया था जिससे लोगों को धूप और बारिश से बचाव मिल सके। आज वही प्रतीक्षालय जो कभी यात्रियों के लिए सहारा थे अब बदहाल हालत में खड़े हैं और उनकी उपयोगिता लगभग खत्म हो चुकी है।” 

14 प्रतीक्षालय में टीन शेड का यही हालत (फोटो साभार: सुनीता देवी)                             

कविता कहती हैं कि “अब वहां बैठना तो दूर खड़े होने में भी डर लगता है क्योंकि ये कभी भी गिर सकते हैं। पहले गर्मी के दिनों में लोग इन प्रतीक्षालयों के नीचे रुककर पानी पीते थे थोड़ी देर आराम कर लेते थे लेकिन अब वह सहारा भी खत्म हो गया है। जो जगह कभी यात्रियों के लिए राहत का ठिकाना थी वही अब डर और खतरे की वजह बन गई है।”

प्रतीक्षालय के मरम्मत का इंतजार 

मवई कलां गांव के रहने वाले अर्पित का कहना था कि प्रशासन को जल्द से जल्द इन आधे टूटे और लटके हुए प्रतीक्षालयों की मरम्मत करनी चाहिए। उनका कहना है कि अगर समय रहते इन्हें ठीक नहीं किया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। खासकर मई-जून में आने वाली तेज आंधी-तूफान के दौरान टीन उड़कर किसी के ऊपर गिरने का खतरा बना रहता है।

वहीं गोरेलाल मुरका गांव के निवासी बताते हैं कि लगभग सभी प्रतीक्षालयों में जंग लग चुका है और वहां गंदगी फैली रहती है। हालात ऐसे हैं कि इंसानों के बैठने की जगह तक नहीं बची है। उनका कहना है कि उन्होंने पहले भी सड़क विभाग से शिकायत की थी लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। वे कहते है “अगर समय-समय पर मरम्मत और पेंटिंग होती रहती तो आज यह स्थिति नहीं होती।”                                        

बैठने की स्थिति नहीं (फोटो साभार: सुनीता देवी)

इस मामले में चित्रकूट के पूर्व जिला अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी, भैयालाल यादव का कहना है कि ये प्रतीक्षालय करीब छह साल पहले बनाए गए थे। यह मार्ग प्रयागराज से झांसी जाने वाले मुख्य रास्तों में से एक है और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से भी जुड़ा हुआ है जहां रोज बड़ी संख्या में लोग आवाजाही करते हैं।

उन्होंने ने आगे कहा कि शहरों में बने कुछ प्रतीक्षालय अभी भी ठीक हालत में हैं लेकिन गांवों में बने अधिकतर प्रतीक्षालय पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं और प्रशासन की अनदेखी के चलते लगातार खतरा बनते जा रहे हैं।

अधिकारी से मिली जानकारी

राष्ट्रीय राजमार्ग खंड के अधिशासी अभियंता संजय कुमार ने बताया कि पूरे जिले में कुल 14 टीन शेड वाले यात्री प्रतीक्षालय बनाए गए हैं। अब तक मरम्मत के लिए बजट स्वीकृत नहीं हुआ था जिसकी वजह से काम नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि अब बजट मिल चुका है और 15 अप्रैल से मरम्मत का काम शुरू किया जाएगा। जल्द ही सभी प्रतीक्षालयों की स्थिति सुधारने का प्रयास किया जाएगा ताकि यात्रियों को दोबारा सुरक्षित सुविधा मिल सके।

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