किसानों की चुनौती इस बार बालू के रूप में आई है। जिला अयोध्या के विकासखंड मया बाजार क्षेत्र में स्थित शारदा सहायक नहर की सफाई का काम चल रहा है। इसकी वजह से नहर से निकलने वाले बालू को नहर के दोनों किनारों पर रख दिया गया है। बालू फैलकर खेतों में चला जाता है जिससे किसानों की फसल बर्बाद हो जाती है। यह समस्या 6 महीने से बनी हुई है।
रिपोर्ट – संगीता, लेखन – सुचित्रा
नहर करीब 150 किलो मीटर लम्बी है। नहर की सफाई की वजह से 20 किलोमीटर अयोध्या से लेकर आजमगढ़ तक के किसानों को इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
बालू से फसलों का नुकसान
ग्राम बरईपारा की निवासी अनीता देवी का लगभग दो बीघा खेत नहर के किनारे है। वह बताती हैं कि करीब पांच बीघा जमीन बालू के ढेर से दब चुकी है। नहर की सफाई होना अच्छी बात है, लेकिन इसकी वजह से किसानों की तिहाई जमीन और फसलें खराब नहीं की जानी चाहिए। किसानों के अनुसार पहले इतना नुकसान नहीं होता था। जब से जेसीबी मशीन से गहरी खुदाई की जा रही है, तब से नहर की अधिक मात्रा में निकली बालू को दोनों किनारों पर डाल दिया जाता है। इससे ऊंचे-ऊंचे टीले बन जाते हैं और खड़ी फसलें दबकर नष्ट हो जाती हैं।
क्षेत्र के किसान मांग कर रहे हैं कि नहर की माइनर की सफाई से निकली बालू को खेतों के किनारे डालने के बजाय किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर ले जाकर डाला जाए, ताकि उनकी फसलों को नुकसान न हो और खेती सुरक्षित रह सके।
खेतों तक नहीं पहुंच पाता पानी
युवक विकास बताते हैं कि नहर की इतनी गहरी खुदाई कर दी गई है कि वह खेतों से लगभग सात–आठ फीट नीची हो चुकी है। ऊंचाई अधिक होने के कारण खेतों तक पानी पहुंचाना बेहद मुश्किल हो गया है।
ऊपर से किनारों पर डाला गया बालू का टीला खिसककर नाली को बार-बार भर देता है, जिससे पानी का रास्ता पूरी तरह बाधित हो जाता है। स्थिति ऐसी है कि यदि नाली को सामान्य तरीके से साफ करने की कोशिश की जाए तो वह ठीक से साफ भी नहीं हो पाती। किसानों को लोहे की छड़ लेकर खुद ही नाली की सफाई करनी पड़ती है, तब कहीं जाकर पानी खेतों तक पहुंच पाता है।
किसानों का कहना है कि यदि इतनी गहरी और ऊंची खुदाई न की गई होती, तो पानी आसानी से खेतों तक पहुंच सकता था और उन्हें इस तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता।
बालू के ढेर से लगभग 100 गांव के किसान प्रभावित
मया ब्लॉक के लोगों ने बताया कि लगभग 100 गांवों के किसान इस समस्या से परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। क्षेत्र में नहर विभाग के अधिकारी शायद ही कभी मौके पर पहुंचते हैं। किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुनने वाला कोई नहीं है।
स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि आज भी इस इलाके के बड़ी संख्या में किसान सिंचाई के लिए नहर के पानी पर निर्भर हैं। करीब 500 किसान सीधे तौर पर इस समस्या से प्रभावित हैं और लंबे समय से परेशानियों का सामना कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है।
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग से मिला आश्वासन
नहर विभाग के अधिकारी अमित वर्मा का कहना है कि रबी फसल की कटाई के बाद खेतों के किनारे जमा हुई बालू को हटवाया जाएगा। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि नहर में पानी शरीफ नदी से होकर आता है, जिसके साथ बालू भी बहकर आ जाती है। इसी कारण समय-समय पर यह समस्या उत्पन्न होती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आगे से किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए निकाली गई बालू को खेतों के पास न डालकर किसी अन्य स्थान पर गिरवाया जाएगा, ताकि किसानों को भविष्य में इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
यह समस्या 6 महीने से है और किसानों को इसकी वजह से काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को सिर्फ आश्वासन दिया गया। अभी भी लोगों की समस्या का जवाब विभाग से नहीं मिल पाया। लोग बस इस उम्मीद में है कि नहर की सफाई का काम जल्दी पूरा हो और वे अपनी फसल को नुकसान होने से बचा पाए।
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