खबर लहरिया Blog UGC: दिल्ली यूनिवर्सिटी में यूजीसी समर्थन पर हंगामा, जानें क्या है पूरा मामला 

UGC: दिल्ली यूनिवर्सिटी में यूजीसी समर्थन पर हंगामा, जानें क्या है पूरा मामला 

यूजीसी नए नियम लागू करने के समर्थन में विरोध प्रदर्शन में दिल्ली यूनिवर्सिटी में हिंसक प्रदर्शन देखने को मिला। शुक्रवार 13 फरवरी को दिल्ली विश्वविद्यालय के कला संकाय (Faculty of Arts) में वामपंथी और दक्षिणपंथी छात्रों के बीच झड़प की खबरें सामने आई। इस झड़प में एक यूटूबर रुचि तिवारी और एआईएसए डीयू सचिव अंजली शर्मा का नाम सामने आया जिसमें दोनों ने एक दूसरे के ऊपर मारपीट का आरोप लगाया और एफआईर दर्ज कराई।

यूजीसी नियम लागू करने के समर्थन में छात्रों का प्रदर्शन (फोटो साभार: AI द्वारा निर्मित)

विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव और असमानता को लेकर यूजीसी द्वारा नए नियम बनाए गए। इन नियमों को लागू होने से रोकने के लिए पहले सवर्ण समुदाय के लोगों ने सड़कों पर उतर कर इसका विरोध किया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी नियम पर रोक लगा दी। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई 19 मार्च रखी है लेकिन अब देशभर में यूजीसी नियम को लागू करने के लिए प्रदर्शन किए जा रहे हैं। 

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दिल्ली यूनिवर्सिटी में वामपंथी और दक्षिणपंथी छात्र संगठनों के बीच झड़प 

द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार 13 फरवरी को दिल्ली यूनिवर्सिटी में यूजीसी नियम के समर्थन में कई संगठन कार्यकर्ता और छात्र प्रदर्शन करने पहुंचे थे। उसी दौरान एक यूटूबर रुचि तिवारी भी इस प्रदर्शन को कवरेज करने पहुंची थी। रुचि का आरोप है कि जब उन्होंने भीड़ से सवाल पूछे तो उनकी जाति पूछी गई और उन पर हमला किया गया। रूचि का भी एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें वो पत्रकारों से पूछती नज़र आ रही है कि आपको (दलितों) पानी नहीं मिला। इस वीडियो को आप लल्लनटॉप द्वारा जारी एक वीडियो में देख सकते हैं। 

लल्लनटॉप की रिपोर्ट के अनुसार नवीन जोकि एक पत्रकार हैं उनका आरोप है कि वह उस वक्त वहां पर मौजूद थे और रुचि उनका मोबाइल छीन रही थी। इसी बीच अंजली शर्मा उनके बचाव में भीड़ को हटाकर उनके पास पहुँचती है। अंजलि का आरोप है कि रूचि ने उन्हें धकेला और जमीन पर गिरा दिया जैसा कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा रहा है। 

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मॉरिस नगर पुलिस स्टेशन में हंगामा 

इस पूरे विवाद के बाद अंजलि शर्मा मॉरिस नगर पुलिस स्टेशन में एफआईर के लिए गई। उनके पीछे भीड़ भी गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कथित तौर पुलिस स्टेशन के बाहर जातिवादी नारे लगाए गए। 

अंजलि शर्मा को पुलिस थाने में दी गई धमकी 

अंजली शर्मा ने आरोप लगाया कि भीड़ पुलिस थाने के अंदर आकर उन्हें रेप की धमकी और मारने की धमकी दे रही थी, लेकिन पुलिस चुप थी। पुलिस ने भीड़ को रोकने की बजाय उन्हें बंधी बना रखा था। 

द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज की हैं – एक रूचि तिवारी की शिकायत पर आधारित है जिसमें उन्होंने वामपंथी छात्र समूह अखिल भारतीय छात्र संघ (एआईएसए) के सदस्यों द्वारा छेड़छाड़ और मारपीट का आरोप लगाया है, दूसरी दक्षिणपंथी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के खिलाफ है और तीसरी एआईएसए डीयू सचिव अंजली शर्मा की शिकायत पर है, जिन्होंने तिवारी और एबीवीपी द्वारा दुर्व्यवहार और मारपीट के आरोप लगाए हैं। 

यूजीसी नियम को लेकर समर्थन पर इतना बवाल क्यों 

देखा जाए तो यूजीसी नियम को लेकर समर्थन और विरोध में प्रदर्शन हुए, लेकिन ज्यादा हंगामा यूजीसी के समर्थन के दौरान दिखा। यूजीसी लागू न करने के विरोध में जब प्रदर्शन किया गया, तब इस तरह की हिंसा और पुलिस करवाई नहीं होती दिखाई दी। लेकिन जब दलित बहुजन नियम लागू के समर्थन में सड़क पर उतरे तो उनके खिलाफ एफआईर तक दर्ज कर ली गई।

यह एफआईर की तस्वीर सोशल मीडिया Suraj Kumar Bauddh के X अकाउंट से ली गई है।

यहां तक कि लखनऊ में सपा कार्यकर्ता पल्ल्वी पटेल को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। अब पुलिस के सामने भीड़ में इस तरह के जातिवादी नारे और हिंसा होती दिखाई दे रही है तो पुलिस कुछ करती दिखाई नहीं दे रही है। ऐसा लगता है कि सरकार सिर्फ एक वर्ग का समर्थन करती दिखाई दे रही है। 

जाति खत्म तो बवाल क्यों? 

जो लोग कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में हो रहे भेदभाव के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। सरकार और पुलिस उस आवाज को दबाने की कोशिश करती दिखती है। आखिर समानता को बढ़ावा देने वाले नियम पर बहस क्यों हो रही है? कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में आज भी जातिगत भेदभाव होते हैं जिनकी वजह से छात्र आत्महत्या करने को मजबूर हो जाते हैं। इसके बावजूद इस नियम का विरोध इसलिए किया जा रहा है कि अनुसूचित जाति के छात्र फायदा उठाकर झूठा मामला दर्ज करेंगे। लेकिन उन मामलों का क्या जिनमें सच्चाई है और जो छात्र वास्तव में जातिगत हिंसा का शिकार होते हैं? क्या उनके लिए कोई नियम नहीं होने चाहिए? जो वर्ग हमेशा से अधिकारों से वंचित रहा है उसे आज भी सामान अधिकार पाने के लिए इस तरह से सड़क पर उतरना पड़ रहा है। आप खुद सोचिये जातिवाद सच में ख़त्म हो गया है और इस तरह के नियमों की जरूरत ही नहीं है, तो इस तरह का बवाल क्यों हो रहा है? अंजलि शर्मा एक ब्राह्मण ही है यानी तथाकथित उच्च कही जाने जाति से संबंध रखती है फिर भी वो दलित, बहुजन वर्ग के लोगों के साथ खड़ी है। ऐसे लोग जो अपने अधिकारों के लिए लड़ते हैं उन्हें अक्सर आतंकवादी या फिर नक्सलवादी, देश द्रोही कहकर जेल में डाल दिया जाता है, लेकिन जो वास्तव में धर्म और जाति के नाम पर हिंसा फैलाते हैं उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। 

 

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