बिहार के बाद अब विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर/SIR) का दूसरा चरण शुरू हो चुका है। दूसरे चरण का एसआईआर नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में हो रहा है। इसमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पुडुचेरी, मध्य प्रदेश, लक्षद्वीप, केरल, गुजरात, गोवा, छत्तीसगढ़ और अंडमान एवं निकोबार शामिल हैं। इसके साथ ही एसआईआर से जुड़े कई मामले भी सामने आ रहे हैं।

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर/SIR) करते हुए बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) बफाती खान, जहीर खान (फोटो साभार : अलीमा)
एसआईआर प्रक्रिया से लोगों को भी दिक्क्तों का सामना करना पड़ रहा है वहीं दूसरी ओर बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) पर इसको समय से पूरा करने का दबाव नज़र आ रहा है जिसकी वजह से केरल, राजस्थान और पश्चिम बंगाल राज्य से आत्महत्या की खबर भी समाने आई।
एसआईआर की प्रक्रिया
एसआईआर गणना का चरण 4 नवंबर को शुरू हुआ और 4 दिसंबर तक जारी रहेगा। ड्राफ्ट (मसौदा) सूची 7 दिसंबर को प्रकाशित की जाएगी जिसके बाद दावे और आपत्तियों का दौर चलेगा और अंतिम सूची 9 फरवरी को जारी की जाएगी।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दूसरे चरण के शुरू होने के दो सप्ताह बाद, भारत के चुनाव आयोग ने मंगलवार (18 नवंबर, 2025) को कहा कि 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों समेत लगभग 51 करोड़ मतदाताओं में से 50.25 करोड़ से अधिक लोगों को गणना फॉर्म प्राप्त हो गए हैं।
छतरपुर में एसआईआर फॉर्म को लेकर बढ़ी दिक्कतें
मध्य प्रदेश में भी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर/SIR) की प्रकिया शुरू हो गई है जिसके तहत फॉर्म भरे जा रहे हैं। जमीनी स्तर पर देखा जाए तो आम जनता को इन फ़ॉर्म का सही अर्थ और उपयोग समझने में कठिनाई होती है। इसके बारे में जागरूकता की कमी के चलते लोग परेशान हो रहे हैं और जगह-जगह भटकने पर मजबूर हैं। कई लोग डर के कारण यह मान बैठे हैं कि यदि उन्होंने यह फ़ॉर्म नहीं भरा तो उन्हें देश से बाहर निकाल दिया जाएगा या सरकारी योजनाओं में लाभ मिलना बंद हो जाएगा।
मध्य प्रदेश में एसआईआर के तहत 90.69% गणना फॉर्म वितरित
चुनाव अधिकारियों द्वारा यह जानकारी दिए जाने के बावजूद कि मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत 90.69% गणना फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं, डिजिटल रूप से जमा करने की गति सुस्त बनी हुई है। भरे हुए फॉर्मों में से मुश्किल से 16% ही ऑनलाइन अपलोड किए गए हैं जबकि महीने भर चलने वाला यह काम आधा हो चुका है।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट में यह भी समाने आया कि सीईओ कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, मंगलवार 18 नवंबर को शाम 4 बजे तक अपलोड किए गए भरे हुए फॉर्म जमा करने से संबंधित आंकड़ों के अनुसार, भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे शहरी जिले सूची में सबसे निचले पायदान पर हैं। इसके विपरीत, अशोक नगर, सीहोर और पंधुरना जैसे जिलों में लगभग 30% ऑनलाइन आवेदन दर्ज किए गए हैं जो उन्हें राज्य में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों में शामिल करता है।
दस्तावेज़ न होने की वजह से लोगों को दिक्क़त
खबर लहरिया की रिपोर्टिंग में इस समस्या के बारे में लोगों ने बताया। लोगों का कहना है कि कई लोगों का 2003 की मतदाता सूची में नाम ही नहीं था, कई पढ़े-लिखे नहीं हैं, उन्हें फ़ॉर्म भरना मुश्किल हो रहा है, कई लोगों के पुराने दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं हैं, कई के माता-पिता या जीवन साथी का बहुत पहले निधन हो चुका है जिससे पुराने पहचान पत्र लाना संभव नहीं है। इसकी वजह से लोग मानसिक रूप से परेशान हो रहे हैं।

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर/SIR) करते हुए बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) बफाती खान, जहीर खान (फोटो साभार : अलीमा)
नारायण बाग वार्ड नंबर 15 की निवासी शाहजहां अली बख्श बताती हैं कि उनके पति का निधन करीब 40 साल पहले हो गया था। उनके पास न पति का पहचान पत्र है और न ही 2003 की मतदाता सूची में उनका नाम। उन्होंने कहा “अब पुराना पहचान पत्र कहां से लाऊं?”
शाहजहां कहती है कि “बीएलओ कह रहे हैं कि अपनी मां का पहचान पत्र लाओ लेकिन मेरी मां कब गुज़री, मुझे यह भी ठीक से याद नहीं। लोग डराते हैं कि अगर फॉर्म नहीं भरा तो देश से निकाल देंगे। मेरे पास कोई भी दस्तावेज़ नहीं है, अब मैं क्या करूं?”
“मेरे माता-पिता की पुरानी जानकारी नहीं… तो मैं कहां से लाऊं?” – सकरा बेगम
वार्ड नंबर 15 लक्ष्मी नगर की सकरा बेगम भी इसी तरह की समस्या से जूझ रही हैं। उनका 2003 की सूची में नाम नहीं है और उनके माता-पिता का भी बहुत पहले निधन हो चुका है।
सकरा बेगम बताती हैं “निवास प्रमाण पत्र बनवाने गई तो वहां भी नहीं बना। बीएलओ कहते हैं 2003 की लिस्ट लाओ लेकिन वह कहां से लाऊं? अगर सरकार हमें यहां से निकाल देगी तो मैं जी ही नहीं पाऊंगी। मेरे बच्चों का भविष्य भी अटक गया है।”
“मैं विकलांग हूं… 2003 की लिस्ट कहां से लाऊं?” – चुन्ना खान
कोरियन मार्ग निवासी चुन्ना खान भी दस्तावेज़ों के अभाव में अपना फॉर्म नहीं भर पा रही। उनका कहना है “मैं जन्म से विकलांग हूं। मेरे माता-पिता बचपन में ही गुजर गए। उनकी 2003 की सूची मैं कैसे लाऊं? कई जगह जाकर नाम निकलवाया लेकिन कहीं नहीं मिला। क्या होगा मेरा?”
एसआईआर की प्रकिया में दस्तावेज न होने पर विकलांग लोग भी परेशान है।
एसआईआर फॉर्म के लिए 13 दस्तावेजों में से एक जरुरी – बीएलओ
बीएलओ ने दस्तावेज को लेकरबताया कि 13 दस्तावेज़ों में से कोई एक लगाकर भी भर सकता है। वार्ड क्रमांक 15 के बीएलओ वफ़ाती खान के अनुसार उनका काम घर-घर जाकर फॉर्म उपलब्ध कराना और लोगों को भरने में मदद करना है
जिनका 2003 की सूची में नाम नहीं है, उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित 13 वैकल्पिक दस्तावेज़ों में से किसी एक का उपयोग करके फॉर्म जमा किया जा सकता है
सरकार द्वारा मान्य 13 दस्तावेज़
- 1987 से पुरानी पेंशन का प्रमाण
- 1987 से किसी स्थान पर निवास का प्रमाण
- सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र
- पासपोर्ट
- मान्यता प्राप्त बोर्ड की मार्कशीट
- स्थाई निवास प्रमाण पत्र
- वन अधिकार प्रमाण पत्र
- सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र
- राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का प्रमाण
- सरकार द्वारा जारी भूमि या मकान का दस्तावेज़
- किसी सरकारी निकाय / बैंक / डाकघर का पहचान पत्र
- आधार के लिए आयोग का प्रमाण पत्र
- बिहार के विशेष गहन पंचर एसएआर से संबंधित सार प्रमाण
बीएलओ का कहना है कि “यदि 2003 की लिस्ट नहीं है तो इन 13 दस्तावेज़ों में से कोई एक भी लगाकर फॉर्म भरा जा सकता है।”
लोगों के सामने यही समस्या बनी हुई है कि यदि उनके पास कोई दस्तावेज नहीं है तो वे कैसे भरेंगे? उनका नाम डिलीट कर दिया जायेगा और उनका वोट देना का अधिकार भी छीन लिया जाएगा। बिहार में भी 7.89 लाख पंजीकृत मतदाताओं में से 65 लाख के नाम मसौदा सूची से हटाए गए थे। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने नामों को प्रकाशित करने का आदेश दिया था। चुनाव आयोग ने आदेश का पालन करते हुए चुनाव आयोग की वेबसाइट पर नामों की सूची की जानकारी अपलोड की थी।
बीएलओ पर दबाव
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के काम का दबाव के चलते कथित तौर पर केरल और राजस्थान में दो आत्महत्याओं, पश्चिम बंगाल में ब्रेन स्ट्रोक से एक मौत की खबर सामने आई। बताया जा रहा है कि बूथ लेवल अधिकारियों की आत्महत्या (बीएलओ) के विरोध प्रदर्शनों ने इन तीनों राज्यों में मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को बाधित करने का खतरा पैदा कर दिया है। सभी राज्यों में, बीएलओ की एक आम शिकायत है – काम का दबाव, लंबे घंटे और अवास्तविक लक्ष्य जिसने उन्हें टूटने की कगार पर ला खड़ा किया है।
द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार केरल के कन्नूर के बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) अनीश जॉर्ज द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े काम के अत्यधिक दबाव के कारण आत्महत्या करने का दावा तब और तूल पकड़ गया जब कंकोल-अलप्पादम्बा पंचायत के अध्यक्ष ने कन्नूर कलेक्टर के इस आकलन को खुले तौर पर खारिज कर दिया कि बीएलओ पर कोई भारी काम का बोझ नहीं था। अनीश जॉर्ज इसी पंचायत के निवासी थे।
जयपुर में BLO पर नाम काटने का आरोप
हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो वीडियो में राजस्थान के जयपुर में एक BLO पर कथित तौर पर मतदाता सूची से नाम काटने का आरोप लगाया गया है। वीडियो में रघुनाथपुरी झोटवाड़ा वार्ड नंबर 33 के आसिफ मकबूल ने BLO मिथिलेश सविता से पूछा: “वोटर लिस्ट से मेरा और मेरे परिवार का नाम क्यों काट दिया?”
BLO ने कहा “जो मेरे पास फार्म लेने नहीं आता उसका नाम काटूंगी”
राजस्थान के जयपुर में रघुनाथपुरी झोटवाड़ा वार्ड नंबर 33 के आसिफ मकबूल ने BLO मिथिलेश सविता से पूछा:
“वोटर लिस्ट से मेरा और मेरे परिवार का नाम क्यों काट दिया?”
BLO ने कहा “जो मेरे पास फार्म लेने नहीं आता उसका नाम काटूंगी”
वैसे BLO को घर घर जाकर फार्म देना होता है
हद है pic.twitter.com/6X6JJkIPep
— Supriya Shrinate (@SupriyaShrinate) November 18, 2025
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रकिया शुरू से ही सवालों के घेरे में हैं। इसे लेकर विपक्ष हमेशा से सवाल उठाते आए हैं और वोट चोरी के आरोप लगाते आए हैं। इस प्रकिया में आम जनता पीस रही है वे परेशान हो रहे हैं, लेकिन इसका क्या हल है इसका जवाब कौन देगा?
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