केंद्रीय गृह मंत्रालय की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार साल 2020 में 3,71,503 मामले दर्ज किए गए थे जो 2021 में बढ़कर 4,28,278 और 2022 में 4,45,256 तक पहुंच गए।उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के अलीगंज मोहल्ले में बीते 31 मार्च 2026 को आग लगने से ससुराल में ही एक महिला की आग जल कर मौत हो गई।
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के अलीगंज मोहल्ले में बीते 31 मार्च 2026 को आग लगने से ससुराल में ही एक महिला की आग जल कर मौत हो गई। महिला जिंदा जल गई जिसके बाद यह मामला संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का बन गया। मृतक महिला का मायका मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के छोटी कुजरहटी मोहल्ले में है।
इस मामले में महिला के पिता मुश्ताक ने कोतवाली नगर थाने में दहेज हत्या की शिकायत दर्ज कराई। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
परिवार का आरोप है कि महिला को पहले से ही दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। कभी 10 हजार कभी 20 हजार और कभी लाख रुपये तक की मांग की जाती थी। परिजनों का कहना है कि पहले महिला की हत्या की गई और बाद में सबूत छिपाने के लिए आग लगाई गई ताकि वह अपना बचाव न कर सके।
नगर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक बलराम सिंह ने बताया कि 1 अप्रैल की रात में मृतक महिला के पति को जिला अस्पताल बांदा से कानपुर के लिए रेफर कर दिया गया है लेकिन मृतक महिला की परिवार वालों का कहना है कि मृतक के पति ने खूद से अपने ऊपर आग लगाई है। जलने के कारण उसकी भी हालत गंभीर है। शिकायत के बाद पुलिस ने जांच करते हुए सास और ननद को आरोपी मानते हुए गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान फरीदा और साजिया के रूप में हुई है। परिवार ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और मृतक महिला को न्याय दिलाने की मांग की है। वहीं पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
वार्षिक रिपोर्ट
इस बीच इस तरह की घटनाएं देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों की गंभीर तस्वीर भी पेश करती हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार साल 2020 में 3,71,503 मामले दर्ज किए गए थे जो 2021 में बढ़कर 4,28,278 और 2022 में 4,45,256 तक पहुंच गए।
ये आंकड़े दिखाते हैं कि महिलाओं के साथ हिंसा और उत्पीड़न की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ऐसे में बांदा की यह घटना भी उसी बढ़ते खतरे की एक और कड़ी बनकर सामने आती है जो महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
महिलाओं पर उत्पीड़न के मामलों में सबसे ज़्यादा मामला पति और रिश्तेदारों द्वारा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले ज्यादातर मामलों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी ‘पति या उनके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता’ की है। ऐसे मामलों का प्रतिशत 31.4% है।
यानी हर तीन में से एक मामला ऐसा होता है जिसमें महिला को उसके अपने ससुराल वालों द्वारा ही प्रताड़ित किया जाता है।
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अपहरण और हमले के मामले भी चिंताजनक
इसी के साथ रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के अपहरण के मामले 19.2% हैं जो एक बड़ी संख्या को दर्शाते हैं।
वहीं 18.7% मामले ऐसे हैं जिनमें महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उन पर हमला किया जाता है।
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बलात्कार के मामले भी चिंता बढ़ाते हैं
रिपोर्ट के अनुसार कुल मामलों में 7.1% मामले बलात्कार से जुड़े हैं।
यह आंकड़ा दिखाता है कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है।
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बढ़ते आंकड़ों के पीछे रिपोर्टिंग भी एक वजह
हालाँकि गृह मंत्रालय के मुताबिक महिलाओं के खिलाफ बढ़ते मामलों की एक बड़ी वजह यह भी है कि अब ऐसे अपराध पहले से ज्यादा दर्ज हो रहे हैं। पुलिस के लिए एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य किया गया है साथ ही पुलिसकर्मियों को संवेदनशील बनाने और जागरूकता बढ़ाने के कारण महिलाएं अब ज्यादा शिकायतें दर्ज करा रही हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हत्या, लूट और धोखाधड़ी जैसे सामान्य अपराधों में भी महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल होती हैं।
आंकड़ों में लगातार बढ़ोतरी
मंत्रालय के अनुसार बीते वर्ष 2020 से 2021 के बीच महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 15% की बढ़ोतरी हुई जबकि 2021 से 2022 के बीच इसमें 4% की और वृद्धि दर्ज की गई। साल 2022 में आईपीसी के तहत दर्ज कुल अपराधों में महिलाओं से जुड़े मामलों की हिस्सेदारी 12.5% रही।
इसके अलावा 2022 में प्रति एक लाख महिला आबादी पर अपराध की दर 66.4 दर्ज की गई जो इस समस्या की गंभीरता को दिखाती है।
बच्चों के खिलाफ अपराधों में लगातार बढ़ोतरी
रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों के खिलाफ अपराधों के मामलों में लगातार इजाफा हुआ है। साल 2020 में ऐसे 1,28,531 मामले दर्ज हुए थे जो 2021 में बढ़कर 1,49,404 और 2022 में 1,62,449 तक पहुंच गए। यह आंकड़े दिखाते हैं कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्थिति चिंताजनक होती जा रही है।
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अपहरण और पॉक्सो के मामले सबसे ज्यादा
2022 में बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में सबसे ज्यादा मामले अपहरण के रहे, जिनकी हिस्सेदारी 45.7% थी। इसके बाद पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामलों का प्रतिशत 39% रहा जो यौन अपराधों की गंभीरता को दर्शाता है।
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वहीं बच्चों द्वारा किए गए अपराधों की बात करें तो ऐसे 30,555 मामलों में कुल 37,780 नाबालिगों को गिरफ्तार किया गया जो एक अलग चिंता का विषय है।
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