खबर लहरिया Blog राम की राजनीति या राजनीति से राम, कौन किससे बना?

राम की राजनीति या राजनीति से राम, कौन किससे बना?

देशवासियों से कहा गया, दिवाली मनाओ। फिर राम मंदिर परिसर और आर्थिक रूप से सुदृढ़ लोगों के घर तो दीवाली बनी लेकिन किसी ने परिसर से बाहर झांकर किसी को नहीं देखा। देखते भी कैसे, मंदिर बनवाने से पहले कई गांव जो उजाड़ दिए तो कोई दिखाई भी कैसे देता?

Ram Naam and politics

राम की राजनीति या राजनीति से राम, कौन किससे बना? किससे किसका अस्तित्व? यह सवाल देश में चल रहे धार्मिक कार्यों व आस्था से जुड़े हुए हैं। राम मंदिर बनने से पहले नारे लगे, ‘राम आएंगे’, तो इससे पहले क्या राम नहीं थे? अगर नहीं थे तो राजनीति के नाम पर किसे पूजा जा रहा था? जब मंदिर बन गया तो पीएम मोदी ने कहा, ‘राम अब टेंट में नहीं भव्य मंदिर में रहेंगे।’

अब राम को दिल में रखने की क्या ज़रूरत है, उन्हें भव्य मंदिर में रहने देना चाहिए क्यों? क्या देशवासियों को यही बताया जा रहा है? राम कुटिया या झोपड़ी या टेंट में नहीं बस भव्य मंदिर में ही रहेंगे? अब अगर सिर्फ वहीं राम हैं तो क्या जिस तरह से समारोह के दिन धन से संपन्न व नामी लोगों के लिए ही मंदिर के दरवाज़े खुले और आम जनता कई किलोमीटर दूर खड़ी रही, क्या यही सिलसिला चलेगा राम के भव्य मंदिर में जिसे राजनीति से बनाया गया है? आस्था और धर्म का नाम लिए?

देशवासियों से कहा गया, दिवाली मनाओ। फिर राम मंदिर परिसर और आर्थिक रूप से सुदृढ़ लोगों के घर तो दीवाली बनी लेकिन किसी ने परिसर से बाहर झांकर किसी को नहीं देखा। देखते भी कैसे, मंदिर बनवाने से पहले कई गांव जो उजाड़ दिए तो कोई दिखाई भी कैसे देता?

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जो गांव कुछ किलोमीटर की दूरी पर बसे थे, वो भी मौन थे। मंदिर बन गया, राजनीति और मेहनत सफल हुई बस सब खत्म।

इतनी शिद्दत और मेहनत शायद लोगों के जीवन को सुधारने, उन्हें सुविधाएं पहुंचाने में लगी होती तो शायद वो भी दिवाली मना ही लेते, खुश हो ही लेते। अब जिसके पास घर की छत ही न हो,थाली में तीन समय का भोजन न हो, भोजन रखने को कमाई का ज़रिया न हो और ऊपर से यह सब देने और समझने के लिए सरकार की आंखे ही खुली ही न हो….. तो कैसी दिवाली? कैसी खुशियां?

राजनीति से बने राम का आगमन हो गया, आगे क्या? गांव समृद्ध हो गए? लोगों के घर अपने आप दीये जल गए? उनके दुःख मिट गए? किसकी झोली में खुशी आई?

इस पर देखें हमारी रिपोर्ट :-

 

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