खबर लहरिया National प्रयागराज: मशहूर ‘देशी कुल्हड़ रसगुल्ला’: स्वाद, परंपरा और गरम मिठास का अनोखा संगम

प्रयागराज: मशहूर ‘देशी कुल्हड़ रसगुल्ला’: स्वाद, परंपरा और गरम मिठास का अनोखा संगम

प्रयागराज जिले के जसरा ब्लॉक के गांव गौहनिया की पहचान बन चुका है यहां का मशहूर ‘सूर्या देशी कुल्हड़ रसगुल्ला’। यह कोई साधारण मिठाई नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही एक परंपरा और पहचान है, जिसे यहां के लोग बड़े प्रेम और मेहनत से आज भी जिंदा रखे हुए हैं।

कुल्हड़ में परोसे गए गरमा गर्म रसगुल्ले की तस्वीर (फोटो साभार: सुनीता)

रिपोर्ट – सुनीता, लेखन – कुमकुम 

यहां के रसगुल्ले की सबसे खास बात यह है कि इसे हर मौसम, हर समय गरमा गरम तैयार कर ग्राहकों को परोसा जाता है। रसगुल्ला बनाने में इस्तेमाल होता है घर के दूध से बना देसी खोवा, थोड़ा सा मैदा, शुद्ध शक्कर और स्वाद बढ़ाने के लिए इलायची। रसगुल्ले को पकाया जाता है देसी चूल्हे की भट्टी पर और परोसा जाता है मिट्टी के देशी कुल्हड़ में।

गांव के हर कोने में रसगुल्ले की खुशबू बसी है। करीब 100 से ज्यादा दुकानें हाईवे के दोनों किनारों पर लगी हुई हैं – हर दुकान की अपनी पहचान, लेकिन इसको खाने के बाद इस स्वाद को वे भूले नहीं भूलते।

ये भी देखेंप्रयागराज: अहा! कुल्हड़ वाले मशहूर रसगुल्ले खाया क्या?

कुल्हाड़ों के प्रकार

इन कुल्हड़ों में कई आकार और क्वालिटी होते हैं – किसी में 10, किसी में 20 और किसी में 30 पीस तक रसगुल्ले रखे जाते हैं। जब ग्राहक घर ले जाने के लिए रसगुल्ला मांगते हैं, तो इन्हें इस तरह पैक किया जाता है कि एक भी बूंद सिरा बाहर न निकले, और रसगुल्ला गर्म ही रहे। यही खासियत इस मिठाई को बाकी जगहों से अलग बनाती है।

कुल्हड़ रसगुल्ले का दाम कम, स्वाद में अव्वल

रसगुल्ले की कीमत भी आम आदमी की जेब के मुताबिक है – सिर्फ ₹10 में एक गरमा गरम रसगुल्ला। चाहे छत्तीसगढ़ हो, मिर्जापुर, मुंबई या छतरपुर, दूर-दूर से लोग यहां सिर्फ इस स्वाद का आनंद लेने आते हैं। महाकुंभ मेले में भी लोग अपनी गाड़ियां रोक-रोक कर इन्हें खरीदते नज़र आए।

दादा-परदादा के ज़माने से यह मिठाई बनाई जा रही है। समय तो बदला लेकिन रसगुल्ले का स्वाद और प्यार वैसा ही रहा। अब अगली पीढ़ी ने इस धंधे को संभाल लिया है। गांव की अर्थव्यवस्था को मज़बूती से आगे बढ़ा रहे हैं।

सुबह-सुबह घरों में दूध इकट्ठा कर, रात में खोवा तैयार कर, दिन में ताज़ा रसगुल्ले बनाए जाते हैं ताकि हर ग्राहक को वही शुद्धता, वही गरमाहट और वही प्यार मिले, जो इस गांव की पहचान बन चुका है।

 

यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते हैतो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’

If you want to support  our rural fearless feminist Journalism, subscribe to our  premium product KL Hatke   

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *