हरियाणा के पानीपत में स्थित (IOCL) इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की रिफाइनरी में काम करने वाले संविदा मजदूरों को अपनी ही बुनियादी जरूरतों के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। समय पर वेतन, तय काम के घंटे (12 घंटे के बजाय 8 घंटे का काम) और कार्यस्थल पर जरुरी सुविधाओं की मांग को लेकर मजदूर बीते तीन दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
मजदूरों द्वारा यह प्रदर्शन 23 फरवरी 2026 से चल रही है जहां पुलिस और मज़दूरों के बीच झड़प भी देखी गई जिसके बाद पुलिस द्वारा लाठी चार्ज करने और फायरिंग करने का भी आरोप है।
काम ठप, लिखित आश्वासन तक हड़ताल जारी
बीते 25 फरवरी को लगातार तीसरे दिन भी हालत सामान्य नहीं हो पाए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मजदूरों द्वारा रिफाइनरी जाने वाले रास्ते को जाम कर दिया और धरना शुरू कर दिया। झड़प के दौरान एक मजदूर का हाथ टूट गया जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए सभी गेटों पर भारी पुलिस और सीआईएसएफ बल तैनात किया गया है। प्रशासन और ठेकेदारों के साथ मजदूर प्रतिनिधियों की बातचीत जारी है। इसमें मजदूरों का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। इस वजह से रिफाइनरी की पी-25 परियोजना समेत कई बड़े निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं और इलाके में तनाव बना हुआ है।
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कैसे शुरू हुआ प्रदर्शन
Newsthali के रिपोर्ट के अनुसार मजदूरों का कहना है कि पहले पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया उसके बाद गुस्से में आकर कुछ मजदूरों ने पत्थरबाजी की लेकिन मीडिया में जो खबरें आ रही हैं उनमें यह बताया जा रहा है कि पत्थरबाजी मजदूरों ने पहले की जिसे वे गलत बता रहे हैं। मजदूरों की मुख्य मांग है कि उनसे 12 घंटे की जगह 8 घंटे ही काम कराया जाए और वेतन समय पर दिया जाए। उनका यह भी कहना है कि उन्हें रविवार की छुट्टी तक नहीं मिलती। जन संघर्ष मोर्चा के नेता पाल सिंह ने बताया है कि इस कंपनी में लंबे समय से मजदूरों से बहुत ज्यादा घंटे काम लिया जा रहा है। कई मजदूरों का न तो पीएफ काटा जा रहा है और न ही उन्हें कोई छुट्टी दी जाती है। उन्होंने बताया है कि मौजूदा विवाद की शुरुआत 22 तारीख को हुई एक दुर्घटना से हुई। कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करते समय तीन मजदूर नीचे गिर गए। इनमें से दो मजदूरों की मौत हो गई जबकि तीसरे मजदूर का इलाज अस्पताल में चल रहा है। अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि हादसा तकनीकी खराबी के कारण हुआ या काम कर रहे मजदूरों की किसी गलती से। मजदूरों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं बार-बार होती रहती हैं लेकिन न तो उनकी सही जांच होती है और न ही उन्हें कोई मुआवजा दिया जाता है। जब मजदूरों ने इस हादसे को लेकर ठेकेदार से बात की और काम के घंटे कम करने तथा मुआवजे की मांग रखी तो ठेकेदारों ने साफ कह दिया कि काम करो और बात खत्म करो।
इन्हीं बातों से नाराज होकर मजदूर 23 तारीख को एकजुट हुए और प्रदर्शन करने लगे। भीड़ बढ़ती देख प्रशासन ने लाठीचार्ज कराया। इसके बाद से मजदूरों में भारी नाराजगी है और वे अपनी सभी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि बिना छुट्टी और लंबे समय तक काम कराने के बावजूद वे काम करते रहे लेकिन अब उन्हें अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरना पड़ा है।
कांग्रेस ने लगाया आरोप
इस घटना के बाद, कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर घटना का वीडियो साझा किया और आरोप लगाया कि श्रमिकों की मांगों को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा है कि “पानीपत की सरकारी रिफाइनरी में मजदूर हड़ताल पर चले गए हैं।
ये मजदूर लगातार सरकार और रिफाइनरी प्रशासन से अपनी कुछ मांगों को लेकर बात कर रहे थे, लेकिन इनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार इन्हें हड़ताल का रास्ता चुनना पड़ा। मजदूरों की मांग है कि उनसे 12 की जगह 8 घंटे काम कराया जाए। अगर 12 घंटे काम कराते हैं तो उन्हें 4 घंटे का ओवर टाइम दिया जाए। इसके साथ ही सैलरी 1 से 7 तारीख के बीच दी जाए, जो कि बहुत देर से आती है। मजदूरों की सभी मांगे जायज हैं और सरकार को इन्हें मानना चाहिए।”
पानीपत की सरकारी रिफाइनरी में मजदूर हड़ताल पर चले गए हैं।
ये मजदूर लगातार सरकार और रिफाइनरी प्रशासन से अपनी कुछ मांगों को लेकर बात कर रहे थे, लेकिन इनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
आखिरकार इन्हें हड़ताल का रास्ता चुनना पड़ा। मजदूरों की मांग है कि उनसे 12 की जगह 8 घंटे काम कराया जाए।… pic.twitter.com/4ywOEf22jL
— Congress (@INCIndia) February 25, 2026
हलांकी हिंदुस्तान टाइम्स के खबर अनुसार आईओसीएल के एक अधिकारी ने कहा कि संविदा कर्मचारियों के बीच “गलतफहमियां और संचार की कमी” थी। रिफाइनरी के मानव संसाधन विभाग के प्रबंधक आशुतोष पांडे ने कहा कि जब कर्मचारियों ने अपने विचार व्यक्त करने की कोशिश की तो विवाद उत्पन्न हो गया।
“बाद में, जब वे बैठे और अपनी मांगें रखीं तो आईओसीएल ने सभी ठेकेदारों के साथ इन मांगों पर चर्चा की। कल, पानीपत के डीसी और एसपी भी मौजूद थे। उन्होंने सभी ठेकेदारों से बात की और उन्हें निर्देश दिया कि जो भी कानूनी रूप से आवश्यक हो उसे तुरंत लागू करें” पांडे ने एएनआई समाचार एजेंसी को बताया। उन्होंने कहा कि आश्वासन मिलने के बाद मजदूर काम पर लौटने के लिए सहमत हो गए थे और मामला सुलझ गया है। लेकिन मज़दूरों द्वारा आज भी प्रदर्शन जारी है।
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मजदूरों की मुख्य मांगे
– कार्य समय को 12 घंटे से घटाकर 8 घंटे किया जाए।
– वेतन का भुगतान हर महीने की 1 से 7 तारीख के बीच सुनिश्चित किया जाए।
– Indian Oil Corporation Limited के बोर्ड द्वारा तय दरों के अनुसार वेतन और मूल वेतन दिया जाए।
– किसी दुर्घटना में कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को मुआवजा दिया जाए और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए।
– ओवरटाइम करने पर मजदूरों को दोगुना भुगतान किया जाए।
– सभी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवकाश मजदूरों को दिए जाएं।
– महीने में अधिकतम 26 दिन ही ड्यूटी कराई जाए।
– रिफाइनरी परिसर के पास अस्पताल की सुविधा, सस्ती कैंटीन, पीने का साफ पानी और शौचालय उपलब्ध कराए जाएं।
– सभी श्रमिकों के लिए पीएफ की सही कटौती की जाए और ईएसआई कार्ड उपलब्ध कराया जाए।
– जो ठेकेदार इन नियमों का पालन नहीं करें, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए।
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