खबर लहरिया Blog SIR में लाखों वोटरों के नाम काटे, रेखा गुप्ता और केजरीवाल को भी नोटिस, बड़े नेताओं को नोटिस मिले तो आम लोगों का क्या? 

SIR में लाखों वोटरों के नाम काटे, रेखा गुप्ता और केजरीवाल को भी नोटिस, बड़े नेताओं को नोटिस मिले तो आम लोगों का क्या? 

SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान दिल्ली समेत कई राज्यों में लाखों मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गएदिल्ली के मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ कई नेताओं को नोटिस मिलने के बाद आम वोटरों के लिए SIR प्रक्रिया और उसकी मुश्किलों पर सवाल उठ रहे हैं। 

SIR

रेखा गुप्ता, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, कपिल सिब्बल (फोटो साभार: गूगल)

देश की राजधानी दिल्ली में इन दिनों विशेष गहन पुनरीक्षण यानी (SIR) के तहत मतदाता सूची के जांच चल रही है। इस SIR की प्रक्रिया में मतदाताओं की ओर से जमा किए गए गणना प्रपत्र (पूरी जानकारी) में जो जानकारी है उसे पुराने रिकॉर्ड से मिलाया जा रहा है। इसी जांच के दौरान कई मतदाताओं की जानकारी में कई अंतर भी मिले। जिसके बाद उन्हें नोटिस भेजकर अपने दस्तावेज और जानकरी स्पष्ट करने को कहा गया। 

चर्चा की बात ये रही कि इसी सूची में दिल्ली की CM (मुख्यमंत्री) रेखा गुप्ता का नाम भी शामिल था। रेखा गुप्ता के साथ-साथ आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजीरवाल समेत कई चर्चित नाम भी इसमें शामिल रहे। 

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, करीब 33.13 लाख मतदाताओं के चुनावी विवरण में कई ग़लतियाँ मिली है। इसमें ऐसी ग़लतियाँ शामिल हैं जिनकी जांच को जरुरी मानी गई है। इनमें से करीब 31.63 लाख लोगों को को नोटिस भेजे जा चुके हैं। 

CM रेखा गुप्ता को नोटिस क्यों मिला? 

रेखा गुप्ता के मामले में उनके मतदाता रिकॉर्ड में ऊम्र से जुड़े अंतर सामने आया था। उनकी एंट्री SIR जांच में लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” वाली श्रेणी में चिन्हित हुई। इसके बाद निर्वाचन अधिकारी की ओर से उन्हें नोटिस दिया गया, ताकि उनकी दी गई जानकारी और दस्तावेजों का दोबारा जांच की जा सके। यानी नोटिस मिलने का मतलब ये था कि उनके रिकॉर्ड की पुष्टि की जा सके। 

CM रेखा गुप्ता के तरफ से दिए गए दस्तावेजों और जानकरी की जांच के बाद निर्वाचन अधिकारियों द्वारा उनके एंट्री को सही मान लिया गया। अब उनका नाम शालीमार बाग विधानसभा क्षेत्र (AC-14) की अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। इसकी अंतिम सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित होनी है। 

अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार को भी नोटिस मिला, क्यों? 

अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के मामले में कारण रेखा गुप्ता से अलग है। केजरीवाल और उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल, उनके माता-पिता और बेटे के रिकॉर्ड को पिछले SIR रिकॉर्ड से जोड़ने में दिक्कत आई। जानकारी के मुताबिक उनके जमा किए गए विवरण में इतनी जानकारी नहीं थी जिससे उन्हें पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जोड़ा जा सके। इसी कारण से उन्हें भी नोटिस जारी किया गया। 

इस पर आम आदमी पार्टी द्वारा उनके एक्स अकाउंट में चुनाव आयोग को घेरते हुए सवाल उठाए गए। लिखा गया “दिल्ली के 3 बार मुख्यमंत्री रहे अरविंद केजरीवाल जी और उनके परिवार को SIR के तहत नोटिस दिया गया है, क्योंकि उनके रिकॉर्ड की पिछले SIR के रिकॉर्ड से “Mapping” नहीं हो पा रही है। जब 3 बार के मुख्यमंत्री और उनके परिवार का रिकॉर्ड ही “Unmapped” हो रहा है, तो आम मतदाताओं के रिकॉर्ड की इस पूरी SIR प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।” 


इसके अलावा भाजपा के पूर्व दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल, समेत दूसरे प्रमुख लोगों के नाम भी नोटिस पाने वालों में शामिल है। 

इस पूरी प्रक्रिया का मकसद मतदाता सूची में दर्ज जानकरी की जांच करना है। इसलिए किसी मतदाता को SIR का नोटिस मिलना अपने आप में ये नहीं बताता कि उसका नाम अंतिम सूची से हटा दिया गया है। दस्तावेजों और सत्यापन के जानकरी के बाद पात्र मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में शामिल किए जा सकते हैं। 

CM रेखा गुप्ता और केजरीवाल के अलावा वो प्रमुख नेता जिन्हें मिला है SIR का नोटिस 

– मनीष सिसोदिया: दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री 

– एस. जयशंकर: केंद्रीय विदेश मंत्री 

– कपिल सिब्बल: पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद 


– बांसुरी स्वराज: नई दिल्ली से भाजपा सांसद 

– परवेश साहिब सिंह: दिल्ली सरकार के मंत्री 

– वीरेंद्र सचदेवा: भाजपा के पूर्व दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष 

– सुब्रमण्यम स्वामी: पूर्व केंद्रीय मंत्री 

– अभिषेक मनु सि सिंघवी: कांग्रेस सांसद 

– जगदीप धनखड: देश के पूर्व उप राष्ट्रपति (उनकी पत्नी समेत) 

इस SIR प्रक्रिया में आम लोगों की बढ़ी परेशानी 

सरकार अनुसार SIR की प्रक्रिया मतदाता सूची को साफ सुथरा और सटीक बनाने के लिए चुनाव आयोग द्वारा किया जाता है। जिसमें घर-घर जाकर की जाने वाली एक गहन जांच प्रक्रिया है। 

ये SIR का सबसे पहला चरण बिहार में शुरू हुआ था। तब वहां विधानसभा चुनाव होने वाला था। जिसमें आम लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था, जिसमें BLO पर ज़्यादा दबाव होने के कारण आत्महत्या की खबर भी सामने आई थी। 

SIR की प्रक्रिया में आम लोगों को अपना नाम और दस्तावेज सही साबित करने के लिए कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ा। नवंबर 2025 में इसके दूसरे चरण की शुरुआत उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, केरल, गोवा, अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप और पुडुचेरी में हुई थी। 

इस दौरान कई लोगों को फॉर्म भरने, दस्तावेज जुटाने और जानकारी ठीक करवाने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़े। दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47,56,722 नाम हटा दिए गए, जिन्हें 30 सितंबर तक फॉर्म भरकर नाम दोबारा जुड़वाने का मौका दिया गया है। वहीं तीसरे चरण में शामिल 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में कुल मिलाकर 1.5 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए जाने की जानकारी सामने आई है।

जिन लोगों के नाम हटाए गए उनमें से कितने लोग सिर्फ कागजों की कमी या रिकॉर्ड में अंतर की वजह से इस स्थिति में पहुंचे हैं? दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और अरविंद केजरीवाल जैसे चर्चित लोगों के रिकॉर्ड में भी अंतर मिला और उन्हें नोटिस दिया गया। रेखा गुप्ता के मामले में दस्तावेजों की जांच के बाद उनकी एंट्री सही मान ली गई और उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। अगर बड़े और चर्चित लोगों को भी अपने रिकॉर्ड का सत्यापन करवाना पड़ा। अब उन आम लोगों के लिए यह प्रक्रिया कितनी मुश्किल रही होगी जिनके पास जरूरी दस्तावेज जुटाने के लिए तमाम तरह की मुश्किलें आती हैं। 

SIR के पहले चरण में BLO यानी बूथ लेवल अधिकारियों पर काम के दबाव और कुछ कर्मचारियों की आत्महत्या की घटनाएं भी सामने आई थीं। जब इस प्रक्रिया को पूरा करने वाले कर्मचारियों के लिए काम इतना दबाव वाला रहा तो आम मतदाताओं की मुश्किलों को कैसे समझा जा सकता है? 

 

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