उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रम क़ानून में कुछ बड़े बदलाव किए हैं। यूपी सरकार ने ‘उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा नियमावली 2026’ का ड्राफ्ट जारी किया है। इसके मुताबिक अब जिन भी जगहों पर 10 या उससे ज्यादा लोग काम करते हैं जैसे फैक्ट्री, दुकान या निजी ऑफिस उन्हें ऑनलाइन पंजीकरण कराना जरूरी होगा।
उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रम क़ानून में कुछ बड़े बदलाव किए हैं। यूपी सरकार ने ‘उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा नियमावली 2026’ का ड्राफ्ट जारी किया है। इसके मुताबिक अब जिन भी जगहों पर 10 या उससे ज्यादा लोग काम करते हैं जैसे फैक्ट्री, दुकान या निजी ऑफिस उन्हें ऑनलाइन पंजीकरण कराना जरूरी होगा। सरकार का कहना है कि इस नियम का मकसद काम करने वाले लोगों की सुरक्षा, सेहत और काम की जगह की स्थिति को बेहतर बनाना है।
लाइव हिंदुस्तान के खबर अनुसार इस नियम के तहत 10 या उससे ज्यादा कर्मचारियों वाले सभी संस्थानों को अपनी कर्मचारी संख्या के हिसाब से पंजीकरण शुल्क भी जमा करना होगा। यह नई व्यवस्था लागू होते ही यूपी में पहले से चल रहे 8 अलग-अलग श्रम नियम खत्म हो जाएंगे और उनकी जगह एक ही संयुक्त कानून लागू होगा।
सरकार ने इस ड्राफ्ट पर लोगों से 45 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। नए नियमों के अनुसार सभी फैक्ट्रियों, निर्माण स्थलों और अन्य संस्थानों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण जरूरी कर दिया गया है। अगर कोई संस्थान तय समय के अंदर पंजीकरण नहीं कराता है तो उसे हर साल 10% तक लेट फीस देनी होगी। साथ ही सभी संस्थानों को अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट रखनी होगी और किसी भी बदलाव की सूचना 3 दिन के अंदर देनी होगी।
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नियुक्ति से लेकर हादसे तक
नई नियमावली में नौकरी देने की प्रक्रिया को ज्यादा साफ और पारदर्शी बनाने की बात कही गई है। इसमें हर कर्मचारी को काम शुरू करने से पहले ही नियुक्ति पत्र देना जरूरी होगा। इसके अलावा नौकरी शुरू होने के एक महीने के अंदर कर्मचारी को पहचान पत्र भी देना अनिवार्य किया गया है।
अगर किसी संस्थान में कोई हादसा या किसी कर्मचारी की मौत होती है तो नियोक्ता को इसकी जानकारी तुरंत ऑनलाइन देनी होगी।
सरकार ने यह भी साफ किया है कि इस ड्राफ्ट पर जो भी सुझाव या आपत्तियां आएंगी उन्हीं पर विचार होगा जो इसके जारी होने की तारीख से 45 दिनों के अंदर प्रमुख सचिव (श्रम) या श्रम आयुक्त को भेजी जाएंगी। इसके बाद नियमावली को अंतिम रूप देकर लागू कर दिया जाएगा।
पुराने नियम खत्म, नए पंजीकरण शुल्क तय
नई नियमावली लागू होने के बाद कई पुराने श्रम नियम खत्म कर दिए जाएंगे। इनमें संविदा श्रम नियम 1975, अंतरराज्यीय प्रवासी कामगार नियम 1981, बीड़ी और सिगार श्रमिक नियम 1969, कारखाना नियम 1950, कारखाना सुरक्षा अधिकारी नियम 1984 और भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार नियम 2009 शामिल हैं।
इसके साथ ही कर्मचारियों की संख्या के आधार पर पंजीकरण शुल्क भी तय किया गया है –
- 10 से 20 कर्मचारी – 500 रुपये
- 20 से 100 कर्मचारी – 1,000 रुपये
- 100 से 500 कर्मचारी – 1,500 रुपये
- 500 से 1,000 कर्मचारी – 2,500 रुपये
- 1,000 से अधिक कर्मचारी – 1,00,000 रुपये
इन नए नियमों के जरिए सरकार सभी संस्थानों को एक ही व्यवस्था में लाने की कोशिश कर रही है ताकि कामगारों से जुड़े नियम आसान और साफ हो सकें।
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सुरक्षा, स्वास्थ्य और प्रशिक्षण पर जोर
नई नियमावली में नियोक्ताओं की जिम्मेदारियों को भी साफ तौर पर तय किया गया है। अब कार्यस्थल पर मशीनों और उपकरणों को सुरक्षित बनाना जरूरी होगा ताकि किसी तरह की दुर्घटना की संभावना कम हो सके। लगातार चलने वाली मशीनों और कन्वेयर बेल्ट (कन्वेयर बेल्ट एक चलने वाली पट्टी (बेल्ट) होती है, जिसका इस्तेमाल सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए किया जाता है।) पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए काम का समय और गति तय की जाएगी जिसके लिए संबंधित अधिकारी से अनुमति लेना भी जरूरी होगा।
स्वास्थ्य को लेकर भी नए नियम बनाए गए हैं। 45 साल से ज्यादा उम्र के कर्मचारियों की हर साल मेडिकल जांच कराना अनिवार्य होगा। वहीं खतरनाक उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए खास तरह की स्वास्थ्य जांच का प्रावधान रखा गया है।
इसके अलावा जिन इमारतों की ऊंचाई 5 मंजिल या 20 मीटर से ज्यादा है वहां आपातकालीन योजना तैयार करना और कर्मचारियों को सुरक्षा से जुड़ा प्रशिक्षण देना भी जरूरी किया गया है।
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