खबर लहरिया Blog Missing Women & Girls: 3 सालों में 13.13 लाख महिलाएं हुई गायब, कहां हैं गायब हुई महिलाएं, क्या है वजह, जानें रिपोर्ट

Missing Women & Girls: 3 सालों में 13.13 लाख महिलाएं हुई गायब, कहां हैं गायब हुई महिलाएं, क्या है वजह, जानें रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट बताती है कि पिछले 50 सालों में विश्व की 142.6 मिलियन “लापता महिलाओं” में से 45.8 मिलियन भारत की हैं, जिसमें कहा गया है कि चीन के साथ-साथ भारत में वैश्विक स्तर पर लापता महिलाओं की संख्या सबसे ज़्यादा है।

                                            विश्व भर में गायब होती महिलाओं को दर्शाती हुई सांकेतिक तस्वीर/ फोटो – सोशल मीडिया

New Delhi: 13.13 लाख से अधिक लड़कियां व महिलाएं साल 2019 से 2021, इन तीन सालों के बीच लापता या ये कहें की गायब हो गई हैं- सरकारी आंकड़ों में यह बात सामने आई जिसमें यह भी बताया गया कि उनमें से अधिकतर लड़कियां व महिलाएं मध्य प्रदेश से थीं।

यह आंकड़े सिर्फ यहां तक सीमित नहीं है। द वायर की जून 2020 की प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट बताती है कि पिछले 50 सालों में विश्व की 142.6 मिलियन “लापता महिलाओं” में से 45.8 मिलियन भारत की हैं, जिसमें कहा गया है कि चीन के साथ-साथ भारत में वैश्विक स्तर पर लापता महिलाओं की संख्या सबसे ज़्यादा है।

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भारत में सबसे ज़्यादा लापता महिलाओं-लड़कियों के मामले

रिपोर्ट के अनुसार, साल 2021 में, देश भर में 18 साल से ज़्यादा उम्र की 375,058 महिलाओं के लापता होने की सूचना मिली थी, वहीं इसमें 18 वर्ष से कम उम्र की कम से कम 90,113 लड़कियां शामिल थीं।

पिछले हफ्ते संसद में पेश किए गए केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश भर में 2019 और 2021 के बीच 18 साल से अधिक उम्र की 10,61,648 महिलाएं और 2,51,430 लड़कियां जो नाबालिग थीं, वे लापता हैं।

बता दें, वैश्विक आंकड़े में, भारत में 2020 तक 45.8 मिलियन लापता महिलाएं थीं और चीन में 72.3 मिलियन महिलाएं थीं।

2013 और 2017 के बीच, भारत में हर साल लगभग 460,000 लड़कियाँ जन्म के समय लापता हो गईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक विश्लेषण के अनुसार, कुल लापता लड़कियों में से लगभग दो-तिहाई के लिए लिंग चयन जिम्मेदार है। वहीं जन्म के बाद महिला मृत्यु दर लगभग एक-तिहाई है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि हर साल, वैश्विक स्तर पर लाखों लड़कियों को उनके परिवारों, दोस्तों और समुदायों की पूरी जानकारी और सहमति से
हानिकारक कार्यों में संलग्न करके उन्हें शारीरिक और भावनात्मक रूप से चोट पहुंचाया जाता है।

वहीं यूएनएफपीए की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेस्ट आयरनिंग (स्तन को जलाना व चपटा देना) से लेकर कौमार्य परीक्षण (virginity testing) तक कम से कम 19 हानिकारक प्रथाओं को मानवाधिकारों का उल्लंघन माना जाता है। इनमें तीन प्रथाएं सबसे ज़्यादा प्रचलित हैं: महिला जननांग विकृति, बाल विवाह और बेटियों से ज़्यादा बेटे की चाह रखना।

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लापता महिलाएं कहां है?

Miriam Chandy Menacherry’s की डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘फ्रॉम द शैडोज़’ (From The Shadows) गायब होती महिलाओं व लड़कियों पर आधारित फिल्म है। डॉक्यूमेंट्री इस तरफ संकेत करती है कि महिलाओं व लड़कियों के गायब होने का जुड़ाव किस तरह से सामाजिक बुराइयों : बाल विवाह के साथ भी जुड़ा हुआ है। कई मामलों में यह देखा जाता है कि किस तरह से युवा लड़कियों को अकसर परिवार के सदस्यों, पड़ोसियों या परिचितों द्वारा बहला-फुसलाकर उन्हें वैश्यावृति के कार्य में ढकेल दिया जाता है। इसके आलावा कई बार उन्हें अच्छी नौकरी देने के बहाने उनके घर से उन्हें बाहर लेकर जाया जाता है। अन्य मामलों में आर्थिक रूप से गरीब होने की वजह से परिवार द्वारा लड़कियों को कुछ हज़ार रुपयों के बदले बेच दिया जाता है, वहीं फिर शहरों में उनका लाखों में व्यापार किया जाता है।

फिल्म की शुरुआत कुछ तस्वीरों और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के कुछ गंभीर के साथ होती है जिसमें यह दिखाया गया होता है कि साल 2020 में भारत में लगभग 1,08,234 बच्चे लापता हुए थे, वहीं हर 8 मिनट में एक लड़की गायब होती है। मेनाचेरी द्वारा इस फिल्म में लापता लड़कियों की कुछ चौका देने वाली कहानियां, बाल तस्करी से जुड़े गंभीर अपराध, कार्यकर्ताओं के संघर्ष की खोज, अनुसंधान, रिकॉर्ड और दस्तावेजीकरण करने के लिए उनके द्वारा नार्थईस्ट सीमाओं पर जाने के उनके सफर पर रोशनी डालती है।

इसके अलावा आर्टिस्ट व एक्टिविस्ट लीना केजरीवाल द्वारा शुरू किया गया आर्ट प्रोजेक्ट “मिसिंग गर्ल्स” (#missinggirls) जोकि एक सार्वजनिक कला परियोजना है, देश में युवा लड़कियों की यौन तस्करी के बारे में जागरूकता पैदा करने का काम करता है। अपने इस प्रोजेक्ट में वह लापता लड़कियों की ग्राफिटी दीवारों पर बनाती हैं, जो देखने में बिलकुल परछाई की तरह नज़र आती है और वह इसके ज़रिये सबका ध्यान गायब हो रही महिलाओं और लड़कियों की ओर दिलाने की कोशिश करती हैं।

इन राज्यों से जुड़ी है लापता महिलाओं-लड़कियों की रिपोर्ट

सरकार द्वारा ज़ारी किये गए आंकड़े को राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा संकलित किया गया है। संसद को उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में 2019 और 2021 के बीच 1,60,180 महिलाएं और 38,234 लड़कियां लापता हुई हैं।

महाराष्ट्र, लापता महिलाओं और लड़कियों की संख्या में दूसरे स्थान पर है। समीक्षाधीन अवधि में 1,78,400 महिलाएं और 13,033 लड़कियां लापता हो गईं हैं।

ओडिशा में तीन साल में 70,222 महिलाएं और 16,649 लड़कियां लापता हुई हैं।

केंद्र शासित प्रदेशों की लापता महिलाओं-लड़कियों की रिपोर्ट

वहीं केंद्र शासित प्रदेशों की बात की जाए तो ज़ारी आंकड़ों में दिल्ली का नाम भी शामिल है जहां लड़कियों और महिलाओं के लापता होने की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है। दिल्ली में, 2019 और 2021 के बीच 61,054 महिलाएं और 22,919 लड़कियां लापता हो गईं हैं। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में, इसी अवधि में 8,617 महिलाएं और 1,148 लड़कियां लापता हुई हैं।

सरकार का बचावी जवाब

सरकार द्वारा संसद में बताया गया कि उनके द्वारा “देश भर में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई पहल की गई है”, जिसमें यौन अपराधों के खिलाफ प्रभावी रोकथाम के लिए आपराधिक कानून (संशोधन), अधिनियम, 2018 का अधिनियमन शामिल है। यह कानून दोषियों को सजा देने पर ध्यान केंद्रित करता है और 12 साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ बलात्कार के लिए पहले की तुलना में मृत्युदंड के साथ और भी अधिक कठोर सज़ा के प्रावधानों के बारे में बात करता है।

गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि उन्होंने कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा देश भर में यौन अपराधियों की जांच और ट्रैकिंग की सुविधा के लिए 20 सितंबर, 2018 को यौन अपराधियों पर राष्ट्रीय डेटाबेस (National Database on Sexual Offenders) भी लॉन्च किया है।

मंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जांच और अभियोजन सहित कानून और व्यवस्था बनाए रखना संबंधित राज्य सरकारों की ज़िम्मेदारी है।”

अतः, मानव तस्करी, सेक्स वर्क, घरेलु हिंसा, बाल विवाह, लिंग चयन, बेटे की चाह, यौन हिंसा इत्यादि चीज़ों को लापता महिलाओं व लड़कियों के गायब होने की वजह से जोड़ा गया।

कुछ महिला फिल्म निर्माताएं व सामाजिक कार्यकर्ता अचानक गायब हो रही महिलाओं के मामले पर लगातार प्रकाश डालते आये हैं लेकिन सरकार द्वारा इस पर गौर नहीं किया गया। जब इस बार सरकार द्वारा लापता महिलाओं और लड़कियों के आंकड़े ज़ारी किये गए तब भी उसकी वजह नहीं बताई कि आखिर ऐसा क्यों हुआ है?

सत्ता की बीजेपी सरकार 2014 से जबसे शासन में आई है तभी से वह महिलाओं के नाम पर राजनीति खेल रही है और उनके बचाव व सुरक्षा के ढकोसले करती आई है पर अब इन आंकड़ों के सामने आने के बाद एक फिर उसके पास कोई जवाब नहीं है यह कहने के अलावा कि यह एक गंभीर मुद्दा है। अगर होता तो इसकी वजह और जवाब तो ज़रूर से होने चाहिए थे। इसमें भी सरकार की असफलता है और हमेशा की तरह संघर्ष कौन कर रहा है, महिलायें।

 

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