मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के खिलाफ विपक्ष का विरोध अब सड़क से संसद तक पहुंच गया है। शुक्रवार 25 सितम्बर 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी विरोध प्रदर्शन के लिए लोग पहुंचे। हालाँकि CEC (चुनाव आयुक्त) ज्ञानेश कुमार की गिरफ़्तारी की मांग कर रहे थे। खबर आई कि CJP प्रदर्शनकारियों और ‘aisa’ को जंतर-मंतर के निकास द्वार के पास ही कुछ को डिटेन किया गया जिसमें नेहा बोरा और योगेंद्र यादव भी शमिल रहे। मीडिया को जंतर-मंतर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। वहीं कांग्रेस कार्यकर्ता ने भी देशभर में प्रदर्शन किया। CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन

चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्श क्र रहे नेहा बोरा और योगेंद्र यादव (फोटो साभार: सोशल मीडिया योगेंद्र यादव x अकाउंट)
हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सामने आया कि चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से SIR और वोटर लिस्ट से जुड़े फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई गई इसके बावजूद फैसले लिए गए। इस रिपोर्ट के सामने आते ही राजनीति में हलचल मच गई और विपक्ष ने चुनाव आयोग (ECI) और ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) दोनों पर सवाल उठाए।
25 सितंबर को कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के इस्तीफे की को लेकर दिल्ली, यूपी, असम, मणिपुर और हरियाणा से समेत कई राज्यों में प्रदर्शन किया।
कांग्रेस इधर है pic.twitter.com/qITRzDNxV6
— Congress (@INCIndia) September 25, 2026
यहां से भी कई लोगों के डिटेन करने की खबर सामने आई। जिसमें असम से कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई को डिटेन करने की खबर सामने आई।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन।
असम पुलिस ने कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई को कुछ इस तरह डिटेन किया। pic.twitter.com/WOfmGLF2DW
— Lutyens Media (@LutyensMediaIN) September 25, 2026
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन और डिटेन
दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को डिटेन किया गया। इस बार कुछ पुलिस वाले ऐसे दिखाई दिए जिनकी वर्दी पर नाम बैच नहीं था। नेहा बोरा की इस वीडियो में वो बार बार सवाल करती नज़र आ रही हैं कि name बैच कहाँ हैं। आपको बता दें इससे पहले जंतर मंतर पर जब सीजेपी द्वारा नीट पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर जंतर मंतर प्रदर्शन हुआ था। इस दौरान कई ऐसे लोग वर्दी में थे जिनके नाम वर्दी पर नहीं थे और उन्होंने छात्रों के साथ बर्बरता से लाठी चार्ज किया था।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने नेहा बोरा समेत अन्य प्रदर्शनकारियों को डिटेन किया है इसमें योगेंद्र यादव का भी नाम आ रहा है।
वहीं पटना में भी कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं। पुलिस द्वारा उन्हें रोकने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।
VIDEO | Patna, Bihar: Police use watercannon to disperse Congress workers holding protest demanding CEC Gyanesh Kumar’s resignation.#PatnaNews #BiharNews #Congress
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/d8jp61yd2p) pic.twitter.com/FFVALO2DQv
— Press Trust of India (@PTI_News) September 25, 2026
क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट से हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्ति जताई। इन मामलों में वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया, SIR, Form 6 में बदलाव और वोटर डेटा के केंद्रीकरण से जुड़े फैसले शामिल बताए गए हैं।
रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्ष ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के तीन सदस्यीय पैनल में ही फैसलों को लेकर मतभेद थे और कुछ फैसले दूसरे चुनाव आयुक्तों की जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को इस रूप में स्वीकार नहीं किया है।
आपको बता दें कि ये SIR की प्रक्रिया का सबसे पहला चरण बिहार में शुरू हुआ था। तब वहां विधानसभा चुनाव होने वाला था। जिसमें आम लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था, जिसमें BLO पर ज़्यादा दबाव होने के कारण आत्महत्या की खबर भी सामने आई थी। एसआइआर की शुरुआत जून 2025 में की गई थी और इसके होने से कई नए वोटरों के नाम जोड़े गए और कई लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिये गए।
Form 6 को लेकर क्या विवाद है?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में Form 6 का भी जिक्र किया गया। यह वह फॉर्म है, जिसका इस्तेमाल नए मतदाता का नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने के लिए किया जाता है। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी Form 6 को नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए बताया गया है।
विवाद उस समय शुरू हुआ जब SIR के दौरान ऑनलाइन Form 6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा से जुड़ा सवाल जोड़ा गया। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें आवेदक से पूछा जा रहा था कि उसका, उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR वाली वोटर लिस्ट में था या नहीं। दो चुनाव आयुक्तों ने इस बदलाव को लेकर आपत्ति जताई और इसे नए, खासकर पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं के लिए परेशानी पैदा करने वाला बताया।
खबर लहरिया की रिपोर्ट में भी कई मामले ऐसे सामने आए जिसमें लोग एसआइआर की प्रकिया से परेशान दिखे।
SIR के तहत जारी नोटिसों ने कई लोगों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। नोटिस मिलने के बाद बड़ी संख्या में लोग असमंजस में हैं। कोई दस्तावेज़ों को लेकर परेशान है, तो कोई समय-सीमा को लेकर। हमारी रिपोर्टिंग में सामने आया है कि कई परिवारों को नोटिस मिलने की जानकारी तो है, लेकिन उसकी प्रक्रिया और अगला कदम समझना मुश्किल हो रहा है। वहीं प्रशासन का कहना है कि यह एक नियमित प्रक्रिया है और लोगों को घबराने की ज़रूरत नहीं है।
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के तिंदवारी ब्लॉक की यह ग्राउंड रिपोर्ट है, जहाँ SIR सर्वे को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने 2003 की वोटर लिस्ट की कॉपी सहित सभी दस्तावेज जमा कर दिए, इसके बावजूद उनके घरों में लगातार नोटिस भेजे जा रहे हैं और बार-बार नए दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।
विपक्ष का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए और नाम हटाने तथा दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है। CJP ने दावा किया है कि 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट रोल से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए। हालांकि, इस आंकड़े और इसके राजनीतिक असर को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच अलग-अलग दावे हैं, इसलिए इसे विपक्ष/CJP के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
SIR क्या है?
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी (SIR) का मतलब वोटर लिस्ट की विशेष और गहन जांच है। इसका मकसद वोटर लिस्ट को दोबारा जांचना, योग्य मतदाताओं के नाम शामिल करना और ऐसे नामों को हटाना है जो नियमों के मुताबिक वोटर लिस्ट में नहीं होने चाहिए। चुनाव आयोग ने 2026 में SIR से जुड़ी वोटर लिस्ट और नाम की जांच के लिए ऑनलाइन व्यवस्था भी शुरू की है।
वोटर डेटा को लेकर भी उठे सवाल
विवाद सिर्फ Form 6 तक सीमित नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों में वोटर लिस्ट के डेटा और उसे संभालने वाले सिस्टम को केंद्रीकृत करने का मुद्दा भी सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ आपत्तियां इस बात को लेकर थीं कि चुनावी डेटा और सिस्टम पर नियंत्रण दिल्ली में ज्यादा केंद्रीकृत हो रहा था और राज्य स्तर के अधिकारियों की पहुंच से जुड़े सवाल उठे थे।
CJP और विपक्ष का कहना है कि वोटर का नाम जोड़ने या हटाने जैसे फैसलों के लिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि फैसला किसने लिया, किस कानूनी आधार पर लिया गया और प्रभावित मतदाता को शिकायत या अपील का क्या रास्ता मिलेगा।
राहुल गाँधी ने कहा – ‘गद्दारों को सज़ा ज़रूर मिलेगी’’
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 24 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने चुनाव आयोग, केंद्र सरकार और SIR को लेकर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि मामले की जांच होनी चाहिए। उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर चुनाव आयोग और SIR से जुड़े मामलों में संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग करने की भी बात कही।
राहुल बोले – ‘देशद्रोहियों को सज़ा ज़रूर मिलेगी…’
Rahul Gandhi ने Press Conference करके ECI, CEC Gyanesh Kumar और BJP पर हमला बोला, कहा – ‘देशद्रोहियों को सज़ा ज़रूर मिलेगी…’
पूरी बात सुनिए – pic.twitter.com/Mnq4aidRrc
— News Pinch (@TheNewspinch) September 24, 2026
“48 घंटे के अंदर इस्तीफा” – अभिजीत दीपके
कॉकक्रोच जनता पार्टी (CJP) ने भी चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के इस्तीफा की मांग को लेकर 48 घंटे का समय दिया और कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो सीजेपी 2 अक्टूबर से देशभर में विरोध प्रदर्शन करेगी।
If CEC Gyanesh Kumar doesn’t resign in 48 hours, we will start a nationwide agitation.
Gyanesh Kumar Isteefa Do! pic.twitter.com/mzsU8i5pft
— Cockroach Janta Party – CJP (@Cockroachisback) September 24, 2026
“इलेक्शन कमीशन का भेद खुला” – अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी जनता को सम्बोधित करते हुए कहा – “किसी भी लोकतंत्र में ऐसा घटिया काम कभी नहीं हुआ होगा, जैसा इस चुनाव आयोग ने किया है।”
https://x.com/samajwadiparty/status/2103116552652664984?s=20
राहुल गांधी के अलावा आम आदमी के पार्टी के नेता (AAP) नेता अरविंद केजरीवाल ने भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने बिहार और पश्चिम बंगाल में दोबारा चुनाव कराने की मांग तक की। ममता बनर्जी ने भी ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और SIR के बाद हुए चुनावों को पुराने वोटर रोल के आधार पर दोबारा कराने की मांग की।
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