खबर लहरिया ताजा खबरें क्या केवल नाम कमाने के लिए प्रत्याशी खड़े हुए हैं चनाव में? राजनीति रस-राय | UP Nagar Nikay Chunav 2022

क्या केवल नाम कमाने के लिए प्रत्याशी खड़े हुए हैं चनाव में? राजनीति रस-राय | UP Nagar Nikay Chunav 2022

नमस्कार दोस्तों, इस समय निकाय चुनाव की हलचल जोरों पर है। गांव से लेकर शहर तक जितना नेता नगरी तैयारी कर रहे हैं उससे ज़्यादा वोटर भी। इस चुनाव में आम आदमी पार्टी भी इस दौड़ में उभरती हुई नज़र आ रही है। लोगों का रुझान भी इस पार्टी की तरफ झुकता नज़र आ रहा है। अब देखना यह है कि यह पार्टी खुद को बड़े राजनीतिक दल मानने वाली पार्टियों को टक्कर दे पाएगी?

इस समय हमने यूपी के वाराणसी, अयोध्या, चित्रकूट जिलों के उम्मीदवारों से मिले। उनका इंटरव्यू किया। इस दौरान हमें लगा कि कुछ पार्टियों ने अच्छे से तैयारी कर ली है लेकिन कुछ तो बिल्कुल भी नहीं। इसका कारण यह भी हो सकता है कि सिर्फ नाम कमाने या पार्टी का शोर करने के लिए ही चुनाव लड़ रहे हों।

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आप पार्टी के उम्मीदवार कुछ जंचे नहीं। कम पढ़े लिखे के साथ बोलचाल में भी कम ठीक लगे। आजकल उम्मीदवार रुतबे वाला होना चाहिए न। रुतबा पैसों, पढ़ाई और बोलचाल पर शामिल है। यह भी मानना पड़ेगा कि आप पार्टी ऐसे ही उम्मीदवार पर भरोसा जताना चाहती हो।

बुंदेलखंड में राजनैतिक क्षेत्र का अग्रणी जिला बांदा की जनता ने 2017 में सपा पार्टी के उम्मीदवार मोहन साहू को चेयरमैन चुन लेती है लेकिन ज्यादातर विधायक बीजेपी पार्टी के हैं। स्वाभाविक है कि ऐसे में एक दूसरे को पीछे करने की होड़ लगना। वही हुआ भी और सबसे बड़ी टक्कर सदर विधायक से रही। यहां तक कि इन पांच साल में चेयरमैन के खिलाफ कुछ वार्ड सदस्य भी रहे। चेयरमैन पर भृष्टाचार का आरोप लगता रहा। एक बार उनपर लगे आरोप हाईकोर्ट से बरी कर दिया गया लेकिन हाल में ही 4 अक्टूबर 2022 को राज्यपाल के आदेशानुसार पूर्व डीएम अनुराग पटेल ने चेयरमैन पद से बर्खास्त कर दिया। सिर पर निकाय चुनाव हैं और ऐसे मौके पर चेयरमैन को बर्खास्त करने का मतलब लोग अच्छे से समझ रहे हैं। यह राजनीति नहीं तो और क्या है?

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अब वोटर तो एक उम्मीद के साथ अपना नेता चुनता ही है चाहे वह आप पार्टी के जैसे का नेता हो या बांदा के चेयरमैन जैसा हो। यह दोनों तरह के नेता काम तब नहीं कर पाते जब सत्ता में बैठी पार्टी का नेता अपने को बड़ा होने का अहसास दिलाए। यही तो हो रहा है कि उनकी धौंस के आगे नेता नहीं टिक पा रहे हैं या टिकने नहीं दिया जा रहा। आने वाला नेता कैसा होगा? मतदाता कैसा नेता चुनना पसंद करेंगे आप पार्टी जैसा, सपा पार्टी जैसा या कांग्रेस, बसपा और बीजेपी जैसा? अरे मैं तो भूल ही गई नेता तो एक ही होता है, बस फर्क पार्टी का होता है।

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