खबर लहरिया Blog MP,Budget 2026-27: आज मध्य प्रदेश में बजट सत्र का तीसरा दिन, जानिए इस बार के बजट में क्या है 

MP,Budget 2026-27: आज मध्य प्रदेश में बजट सत्र का तीसरा दिन, जानिए इस बार के बजट में क्या है 

मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने आज यानी 18 फरवरी 2026 अपना तीसरा बजट विधानसभा में पेश किया। बजट पेश करते हुए उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि यह बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों को पूरा करने की दिशा में है। इस बार बजट का आकार 4.65 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहने का अनुमान है।

फोटो डिज़ाइन क्रेडिट: रचना                                                            

मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने आज यानी 18 फरवरी 2026 अपना तीसरा बजट विधानसभा में पेश किया। बजट पेश करते हुए उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि यह बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों को पूरा करने की दिशा में है। सरकार का मकसद है हर हाथ को काम, हर युवा को रोजगार और हर नारी को सम्मान।

मध्य प्रदेश सरकार ने इस बजट में किसानों, महिलाओं और युवाओं को केंद्र में रखा है। साथ ही शहरों के विकास और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर भी बड़ा दांव लगाया गया है। माना जा रहा है कि आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों को ध्यान में रखते हुए रोजगार और बुनियादी सुविधाओं पर खास फोकस किया गया है। इस बार बजट का आकार 4.65 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहने का अनुमान है।

सरकार ने न केवल आगामी वित्त वर्ष का बजट रखा बल्कि 2027-28 और 2028-29 के संभावित प्रस्तावों की झलक भी सदन के सामने रखी। सरकार का दावा है कि मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने “रोलिंग बजट” की अवधारणा को अपनाया है। इसकी विस्तृत जानकारी बजट दस्तावेजों में प्रकाशित की गई है।

क्या होता है रोलिंग बजट?

रोलिंग बजट का मतलब है ऐसा बजट जो एक बार बनाकर तय नहीं कर दिया जाता बल्कि समय-समय पर उसमें बदलाव किया जाता है। सरकार हर साल पुराने आंकड़ों को हटाकर नए साल को जोड़ती रहती है ताकि बजट हमेशा मौजूदा हालात के मुताबिक बना रहे। इस व्यवस्था में बजट को लगातार अपडेट किया जाता है। अगर खर्च, आमदनी या जरूरतों में बदलाव होता है तो उसी हिसाब से बजट में सुधार कर लिया जाता है। यानी बजट कागज़ पर नहीं टिकता बल्कि हालात के साथ चलता है। मान लीजिए सरकार ने तीन साल के लिए बजट तैयार किया 2026–27, 2027–28 और 2028 – 29। जैसे ही 2027–28 का साल आता है 2026–27 वाला साल बजट से बाहर कर दिया जाता है और उसकी जगह नया साल 2029–30 जोड़ दिया जाता है।

इस तरह हर समय सरकार के पास आने वाले तीन साल का ताजा बजट तैयार रहता है। इससे योजना बनाने में आसानी होती है और बदलती जरूरतों के हिसाब से फैसले लिए जा सकते हैं। संक्षेप में कहें तो रोलिंग बजट वह तरीका है जिसमें बजट को जिंदा दस्तावेज की तरह माना जाता है जो हर साल नया रूप लेता रहता है, ताकि देश की आर्थिक योजना ज्यादा सटीक और उपयोगी बन सके।

किसानों के लिए बजट की बड़ी बातें

मध्य प्रदेश सरकार ने बजट में किसानों के लिए कई बड़ी घोषणाएं की हैं। उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि सरकार का मकसद किसानों की आमदनी बढ़ाना और खेती को आसान बनाना है।

– पीएम फसल बीमा योजना के लिए 1,299 करोड़ रुपये।
– सीएम कृषक उन्नति योजना के लिए 5,500 करोड़ रुपये।
– किसानों को प्रोत्साहन राशि के तौर पर 337 करोड़ रुपये, जिससे 6.69 लाख किसान लाभान्वित होंगे।
– वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” घोषित किया गया।
– 1 लाख हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का लक्ष्य।
– 3,000 करोड़ रुपये की लागत से किसानों को 1 लाख सोलर पंप दिए जाएंगे।
– किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना से हर किसान परिवार को सालाना 12 हजार   रुपये मिलते रहेंगे।

घर, बस और स्वास्थ्य

बजट में अगले पाँच साल में 10 लाख पीएम आवास बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। शहरों के लिए 972 इलेक्ट्रिक बसों को मंजूरी दी गई है।

– अगले 5 साल में 10 लाख पीएम आवास बनाने का लक्ष्य।
– शहरों के लिए 972 इलेक्ट्रिक बसों को मंजूरी।
– स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 23,747 करोड़ रुपये का बजट।
– प्रदेश में 5 नए मेडिकल कॉलेज जिनमें 2850 एमबीबीएस सीटें
– 1468 पीजी सीटें होंगी।
– अब तक 4 करोड़ 46 लाख आयुष्मान कार्ड जारी किए गए हैं।

सड़क, उद्योग और निवेश

सड़कों की मरम्मत के लिए 12,690 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 19,300 एकड़ जमीन पर इंडस्ट्रियल और आईटी पार्क विकसित किए जा रहे हैं।

– सड़कों की मरम्मत के लिए 12,690 करोड़ रुपये।
– विभिन्न कॉरपोरेशनों के ज़रिये 17,350 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च।
– 19,300 एकड़ जमीन पर इंडस्ट्रियल और आईटी पार्क विकसित किए जा रहे हैं।
– बुंदेलखंड के सागर में 1500 एकड़ में इंडस्ट्रियल पैकेज।
– दो साल में 33 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए, जिनमें से
– 8 लाख करोड़ रुपये के काम शुरू हो चुके हैं।

पढ़ाई, युवा और खेल

– 7 लाख 95 हजार छात्रों को आर्थिक मदद।
– छात्रवृत्ति योजना के लिए 1800 करोड़ रुपये।
– खेल और युवा कल्याण के लिए 815 करोड़ रुपये।
– उद्यम क्रांति योजना में 16,451 युवाओं को लोन दिया गया।

गांव, आदिवासी और महिलाएं

– जनजातीय क्षेत्रों के 11,277 गांवों के विकास के लिए 793 करोड़ रुपये।
– लाडली लक्ष्मी योजना के लिए 1852 करोड़ रुपये।
– 52.29 लाख बालिकाएं इस योजना से लाभान्वित।
– 14 लाख से ज्यादा बालिकाओं को स्कॉलरशिप।
– लाडली बहना योजना में 1.25 करोड़ महिलाएं पंजीकृत,
– हर माह 1500 रुपये देने के लिए 23,882 करोड़ रुपये का प्रावधान।

मजदूर, बैंक और पेंशन

– श्रम विभाग के लिए 1335 करोड़ रुपये।
– जनधन योजना में 4.61 करोड़ खाते।
– सुरक्षा बीमा योजना में 3.64 करोड़ पंजीयन।
– जीवन ज्योति योजना में 1.54 करोड़ लोग जुड़े।
– अटल पेंशन योजना में 46 लाख पंजीयन।
– पेंशन से जुड़ा काम अब पेपरलेस किया जा रहा है।

किसान और पशुपालन

– किसानों के लिए 25 हजार करोड़ रुपये का कृषि ऋण प्रस्तावित।
– किसानों को 1 लाख सोलर पंप दिए जाएंगे।
– किसान मोबाइल ऐप को फायदेमंद बताया गया।
– दूध उत्पादन बढ़ाने पर जोर, एमपी को मिल्क कैपिटल बनाने का लक्ष्य।
– पशुपालन विभाग के लिए 2364 करोड़ रुपये।
– गौशालाओं को अनुदान और आधुनिक तरीके से संचालन।

महिलाओं की योजनाओं पर सरकार का खास जोर

इस बार बजट में महिलाओं और लड़कियों से जुड़ी योजनाओं पर खास ध्यान दिया गया है। महिला सशक्तिकरण से जुड़ी अलग-अलग योजनाओं के लिए कुल 1 लाख 27 हजार 555 करोड़ रुपये रखे गए हैं। लाडली लक्ष्मी योजना से अब तक 52 लाख से ज्यादा बच्चियों को फायदा मिल चुका है। इस योजना को आगे चलाने के लिए 1,800 करोड़ रुपये से अधिक का बजट तय किया गया है। वहीं लाडली बहना योजना के लिए सरकार ने 23,842 करोड़ रुपये अलग से रखे हैं। इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्रों को मजबूत करने की भी तैयारी है। सरकार ने करीब 19 हजार नए पदों पर भर्ती करने की बात कही है जिससे रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे और बच्चों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी।

सामाजिक सुरक्षा और आदिवासी क्षेत्रों पर ध्यान

सरकार ने दिव्यांग लोगों की मदद के लिए चल रही योजनाओं के लिए 2,857 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके साथ ही संबल योजना को भी आगे जारी रखने का फैसला लिया गया है। प्रदेश की करीब 21 फीसदी आबादी जनजातीय समुदाय से जुड़ी है। इन्हीं इलाकों के विकास के लिए धरती आबा योजना के तहत 793 करोड़ रुपये रखे गए हैं, ताकि आदिवासी क्षेत्रों में सुविधाएं बेहतर की जा सकें।

सरकार का दावा

वित्त मंत्री ने कहा कि बजट बनाने की प्रक्रिया को अब ज़्यादा वैज्ञानिक किया जा रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य को आगे बढ़ाने पर फोकस है। सरकार का कहना है कि यह बजट सिर्फ घोषणाओं का नहीं बल्कि रोजगार, खेती, शिक्षा और स्वास्थ्य को मजबूत करने का रोडमैप है।

अनुपूरक बजट पेश का 23 फरवरी को चर्चा होगी

बीते कल यानी 17 फरवरी 2026 को मध्य प्रदेश सरकार ने विधानसभा में अपना तीसरा अनुपूरक (किसी कमी या त्रुटि को पूरा करने के लिए बाद में जोड़ा या बढ़ाया गया हिस्सा) बजट पेश कर दिया है। उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने यह बजट सदन में रखा। बजट का कुल आकार 19,287 करोड़ रुपये है जिस पर 23 फरवरी को चर्चा होगी। सरकार ने इस बार सबसे ज़्यादा पैसा नर्मदा घाटी विकास से जुड़ी योजनाओं पर लगाया है। इस मद में करीब 4,700 करोड़ रुपये रखे गए हैं। माना जा रहा है कि सिंचाई और जल परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए यह बड़ी रकम तय की गई है।

इसके साथ ही सरकार पर पहले से लिए गए कर्ज का बोझ भी बजट में साफ दिखाई देता है। नए और पुराने कर्ज के ब्याज चुकाने के लिए कुल 1,810 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें से 950 करोड़ रुपये बाजार से लिए गए नए कर्ज के ब्याज पर खर्च होंगे, जबकि 700 करोड़ रुपये पुराने कर्ज के प्रबंधन और भुगतान में लगाए जाएंगे। कुल मिलाकर यह अनुपूरक बजट विकास योजनाओं के साथ-साथ कर्ज की जिम्मेदारी निभाने पर भी फोकस करता नजर आ रहा है। अब 23 फरवरी को होने वाली चर्चा में यह साफ होगा कि सरकार किन प्राथमिकताओं के साथ इस बजट को आगे बढ़ाती है।

पिछले बजट से तुलना

मोहन सरकार ने पहला बजट (2024-25) करीब 3.65 लाख करोड़ रुपये का पेश किया था।
दूसरा बजट (2025-26) 4.21 लाख करोड़ रुपये का रहा।
अब तीसरा बजट (2026-27) इससे भी बड़ा है। सरकार का लक्ष्य है कि “विकसित एमपी 2047” के तहत प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाया जाए।

कुल मिलाकर, इस बार का बजट खेती, नौकरी, शिक्षा, स्वास्थ्य और शहरों के विकास पर एक साथ फोकस करता नजर आ रहा है। सरकार इसे भविष्य की नींव रखने वाला बजट बता रही है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी बजट के तौर पर देख रहा है। अब आने वाले दिनों में साफ होगा कि ये घोषणाएं जमीन पर कितनी उतरती हैं।

 

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