उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हर दिन हजारों पर्यटक घूमने के लिए आते हैं। यह शहर अपनी धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। वैसे तो काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट, मणिकर्णिका घाट, रामनगर किला और कई पर्यटन स्थल है जिसे देखने के लिए विशेषकर लोग आते हैं। वाराणसी शहर से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है महात्मा बुद्ध से जुड़ा पवित्र स्थल सारनाथ। यह स्थान बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
रिपोर्ट – सुशीला, लेखन- सुचित्रा
सारनाथ में मिनी जू है, जहां जानवरों के साथ-साथ कई अन्य पशु-पक्षी देखे जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त यहां एक सुंदर और सुसज्जित पार्क भी है, जहां लोग अपने दोस्तों और परिवार के साथ घूमने-फिरने और मनोरंजन का आनंद लेने आते हैं। इसी परिसर में एक छोटा चिड़ियाघर भी स्थित है, जो बच्चों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना रहता है। लेकिन लोगों का कहना है अब चिड़ियाघर पहले जैसे नहीं रहे। पहले के मुकाबले अब बहुत कम हो गए जानवर और पक्षी।
विभिन्न प्रजाति के जीव-जंतुओं को देखने के लिए लोगों में उत्सुकता
चिड़ियाघर में घूमने आए संतोष का कहना है कि पार्क की अपेक्षा अधिक लोग चिड़ियाघर देखने आते हैं। क्योंकि कुछ जीव-जंतु है जो धीरे-धीरे हमारे आसपास से गायब होते जा रहे हैं। जब भी वे परिवार के साथ घर से निकलते हैं, तो बच्चों की पहली इच्छा यही होती है -“चलो चिड़ियाघर घूमने चलते हैं।”
चिड़ियाघर में विभिन्न प्रकार के जानवर, पक्षी, हिरण और मछलियां देखने को मिलती थीं। पहले जब लोग यहां आते थे, तो उन्हें कई प्रजातियां देखने को मिलती थीं। एक-एक पक्षी को पहचानने के लिए वे दो-चार मिनट रुककर ध्यान से देखते थे -यह कोयल है, गौरैया है या कोई और चिड़िया।
पहले से कम प्रजाति के पशु-पक्षी
अब स्थिति पहले जैसी नहीं रही। नाम भले ही चिड़ियाघर है, परंतु वहां पहले जैसी विविधता दिखाई नहीं देती। जिस स्थान को चिड़ियाघर के रूप में विकसित किया गया था, वहां अब बहुत कम प्रजातियां नजर आती हैं -कभी-कभी तो एक या दो ही। यही बात लोगों को खलती है, क्योंकि वे यहां प्रकृति और वन्य जीवन की समृद्ध झलक देखने की उम्मीद लेकर आते हैं।
सुमन का कहना है कि यह वाराणसी की एक बहुत अच्छी जगह है, जहां चिड़ियाघर और आसपास का पार्क घूमने के लिए मौजूद हैं। दूर-दूर से लोग यहां देखने आते हैं, और हम भी इसे देखने आए थे। पहले जिन चीजों को देखने के लिए लोग यहां आते थे, वे अब बहुत कम रह गई हैं। बदलते समय के साथ यहां सिर्फ कुछ पक्षी ही बचे हैं, पहले जैसी रंग-बिरंगी मछलियां और मनमोहक जीव-जंतु अब दिखाई नहीं देते। समय के बदलाव के साथ कई ऐसे जानवर और पक्षी हमारे बीच से धीरे-धीरे चले गए हैं, जिसकी वजह से अब चिड़ियाघर पहले जैसा आकर्षक नहीं रह गया है।
सारनाथ के मिनी जू के लिए टिकट शुल्क
पार्क में प्रवेश के लिए टिकट की व्यवस्था भी की गई है। 3 साल से 12 साल तक के बच्चों के लिए टिकट 10 रुपए प्रति व्यक्ति है, जबकि 12 साल से ऊपर के लोगों के लिए टिकट 20 रुपए प्रति व्यक्ति निर्धारित की गई है। विदेशी पर्यटकों के लिए अलग शुल्क रखा गया है -एशियाई देशों के पर्यटकों के लिए 50 रुपए और यूरोपीय देशों के पर्यटकों के लिए एक व्यक्ति का 100 रुपए है।
मिनी जू में डियर पार्क
सारनाथ के मिनी जू में हिरणों का डियर पार्क भी है, जो स्थानीय स्तर पर चिड़ियाघर के नाम से काफी प्रसिद्ध है। यह एक खास पार्क है, जहां हर प्रजातियों के जानवर और पक्षी देखे जा सकते हैं।
पार्क में प्रमुख रूप से काला हिरण पाया जाता है, जिसे बहुत सुंदर माना जाता है। इसके अलावा चित्रकब्बर हिरण और दर्जनों बारासिंघा भी यहां बड़ी संख्या में देखे जा सकते हैं। इनकी उपस्थिति पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र है।
इसके अलावा पार्क में मगरमच्छ, घड़ियाल और कछुए भी मौजूद हैं। पक्षियों की बात करें तो यहां गौरैया, सारस और शाही बगुला की बड़ी संख्या देखी जा सकती है।
चिड़ियाघरों में उन सभी प्रजातियों को संभाल कर रखा जाता है ताकि जो लोग कहीं दूसरी जगह नहीं जा सकते वो अपने आस पास ही इन जानवरों के नाम, रंग और रूप को देख सकें। इनके बारे में जान सके लेकिन समय के साथ पर्यावरणीय बदलाव, शहरीकरण और संसाधनों की कमी के कारण पहले जैसे चिड़ियाघर नहीं रह गया है। इसके बावजूद यह स्थल अभी भी देशी और विदेशी पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण बना हुआ है। यहाँ आने वाले लोग प्राकृतिक सुंदरता, जानवरों और पक्षियों के अनुभव और परिवार के साथ समय बिताने की खुशी प्राप्त करते हैं।
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