सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील बनाने वाले रसोइये पिछले 25 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हैं। इस आंदोलन के दौरान दो महिला रसोइयों की मौत हो गई है जिससे मामला और गंभीर हो गया है। हालांकि राज्य सरकार ने कहा है कि इन मौतों का आंदोलन से सीधा संबंध नहीं है और ऐसे आरोप भ्रामक हैं।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नया रायपुर स्थित तूता के नए धरना स्थल पर सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील बनाने वाले रसोइये पिछले 25 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हैं। बच्चों को रोज़ खाना बनाने वाले ये रसोइये आज खुद संघर्ष कर रहे हैं। उनकी मांग है कि रोज़ मिलने वाली 66 रुपये की दिहाड़ी को बढ़ाकर 340 रुपये किया जाए। धरना स्थल पर तंबू लगाए गए हैं और अलग-अलग जिलों से रसोइयों के जत्थे यहां पहुंच रहे हैं। हर जत्था करीब तीन दिन तक धरने पर बैठता है फिर दूसरे साथी उनकी जगह ले लेते हैं। आंदोलन लंबा चलने के कारण आसपास के दुकानदारों ने भी वहीं छोटी दुकानें लगा ली हैं। इसी बीच इस आंदोलन के दौरान दो महिला रसोइयों की मौत हो गई है जिससे मामला और गंभीर हो गया है। हालांकि राज्य सरकार ने कहा है कि इन मौतों का आंदोलन से सीधा संबंध नहीं है और ऐसे आरोप भ्रामक हैं।
दो महिला रसोइयों की मौत से बढ़ी चिंता
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार दोनों महिलाएं सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील बनाने का काम करती थीं और कई जिलों में चल रहे विरोध प्रदर्शन में सक्रिय रूप से शामिल थीं। पहली महिला दुलारी यादव थीं जो बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक के सलधा गांव के प्राथमिक स्कूल में रसोइया थीं। वे 29 दिसंबर 2025 से आंदोलन में शामिल हुई थीं। धरने के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई और 25 जनवरी 2026 को उन्हें रायपुर के डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मृति अस्पताल में भर्ती कराया गया बाद में निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। दूसरी महिला रुकमनी सिन्हा थीं जो बालोद जिले के डोंडी ब्लॉक के कुसुमकसा गांव की रहने वाली थीं। उनकी भी आंदोलन में भाग लेते समय मौत हो गई। इन दोनों मौतों के बाद सरकार की भूमिका और रसोइयों की लंबे समय से चली आ रही मांगों पर फिर से सवाल खड़े हो गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार संघ अध्यक्ष रामराज का कहना है कि जिन दो महिला रसोइयों की मौत हुई वे बेहतर वेतन, नौकरी को स्थायी करने और सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं देने की मांग को लेकर चल रहे धरने में लगातार शामिल थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई हफ्तों से आंदोलन जारी रहने और रसोइयों की हालत बिगड़ने के बावजूद सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। संघ का यह भी कहना है कि रसोइये बहुत कठिन हालात और ठंड के मौसम में भी धरना देने को मजबूर थे। उनका मानना है कि लंबे समय तक खुले में बैठना और खराब परिस्थितियों में रहना ही इन मौतों की एक बड़ी वजह बना है।
महिलाओं ने क्या कहा?
धरना स्थल पर 25 दिनों से मौजूद महिलाओं में से तोमेश्वरी पटेल ज़िला बालोद की रहने वाली महिला ने अपनी तकलीफ़ें साझा करते हुए बताया कि वे यहाँ 29 दिसंबर से प्रदर्शन पर बैठे हुए हैं और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती तब तक वे वहां से नहीं हटेंगे। वे कहती हैं “हमें 66 रुपए वेतन मिलता है एक दिन का मैं पूछती हुं कौन से इतिहास में 66 रुपए रोजी लिखा है? हम घुट-घुट कर ज़िंदगी जी रहे हैं हमारे बच्चों के साथ, हमें अपना रोजी बताने में भी शर्म आती है।” उन्होंने बताया कि वे 2008 से रसोईये में काम करती हैं।
वे आगे कहती हैं “हमने महतारी वंदन योजना का पैसा नहीं चाहिए हमें उसकी जरुरत नहीं है वे बस हमारी माँग पूरी करें हमें कलेक्टर दर दें। बता दें इस आंदोलन में शामिल होने छत्तीसगढ़ के लगभग 10 से 15 जिलों की मिड-डे मील बनाने वाले रसोइये आए हैं।
तोमेश्वरी पटेल बतलाती हैं कि उन्हें इस आंदोलन के दौरान कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ठीक से खाना नहीं मिल रहा है घर से थोड़ा – थोड़ा चावल ला कर दिन भर में केवल एक ही समय भोजन कर पाते हैं।
“हमें रूखा-सूखा जो मिल जाता है उसमें ही काम चला रहे हैं।” उन्होंने बताया कि सुलभ शौचालय की व्यवस्था बहुत ही खराब है, वहां का पानी बंद कर दिया गया है पानी ही नहीं आता महिलाएं बहुत परेशान हैं। वे कहती हैं “हमें अभी तक कोई मंत्री नेता हमें किसी भी तरह की आश्वशन देने नहीं आए हैं न ही मिलने आए हैं।”
“सरकार महंगाई बढ़ा रही है हमारा काम बढ़ा रहा है, हमारा वेतन नहीं”
सविता मानिकपुरी कांकेर जिले की रहने वाली हैं और ज़िला संरक्षक हैं। वे बताती हैं कि “सरकार हमारी कोई खबर नहीं ले रही है और न की यहां की कोई व्यवस्था। हम हड़ताल के माध्यम से मीडिया के माध्यम से जो भी परेशानी हैं उसे सरकार तक पहुंचा रहे हैं उसके बावजूद सरकार ध्यान नहीं दे रही है।” वे आगे कहती हैं “ हमें यहां काम करते 31 साल हो चुके हैं और बढ़ोत्तरी 15 रुपए से 66 रुपए बस इतनी ही हुई है। कोई विधायक बनता है उसका वेतन एक लाख से डेढ़ लाख रुपए होता है लेकिन हमारे लिए सिर्फ 66 रुपए। हम अपने बच्चे कैसे पाले ये सोचना मुश्किल हो गया है। इतनी बढ़ी महंगाई में हमारी स्थिति और खराब होती जा रही है।”
वे कहती हैं बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ ये सिर्फ नारा है सरकार इसके लिए कुछ लागू नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा जब तक सरकार उनकी मांगें पूरा नहीं करती वे आंदोलन से वापस नहीं हटेंगे। “हम सिर्फ अपना रोजी चाहते हैं जो हमारा अधिकार है, सुबह से शाम तक जो काम करते हैं उस मेहनत का पैसा चाहते है। सरकार महंगाई बढ़ा रही है हमारा काम बढ़ा रहा है लेकिन हमारा वेतन नहीं।”
दोनों मौतों का आंदोलन या हड़ताल से कोई सीधा संबंध नहीं
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक डीआरआई ने बताया है कि हड़ताली रसोइयों के प्रतिनिधियों के साथ स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव की बैठक हुई थी। इस बैठक में सरकार ने रसोइयों की मजदूरी में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी करने यानी करीब 500 रुपये बढ़ाने का फैसला किया और उनसे धरना खत्म कर घर लौटने की अपील की। विभाग का कहना है कि इसके बाद भी कुछ रसोइयों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया। लोक शिक्षण संचालनालय (डीआरआई) ने 27 जनवरी देर रात नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर चल रहे आंदोलन को लेकर एक बयान जारी किया।
दोनों महिला रसोइयों की मौत पर डीआरआई ने सफाई देते हुए कहा कि बालोद जिले की रसोइया 20 और 21 जनवरी को ही धरने में शामिल हुई थी और फिर वापस अपने घर चली गई थी। बाद में उसे दल्लीराजहरा के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। दूसरी रसोइया पहले से ही गंभीर बीमारी से पीड़ित थी और भिलाई के एक निजी अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था वहीं उसकी भी मृत्यु हो गई। विभाग ने साफ तौर पर कहा है कि इन दोनों मौतों का आंदोलन या हड़ताल से कोई सीधा संबंध नहीं है।
आंदोलन और तेज करने का ऐलान
प्रदर्शन में शामिल लोगों की संख्या बढ़ने के साथ ही मजदूर संगठनों और सामाजिक संगठनों की ओर से सरकार पर दबाव भी बढ़ता जा रहा है। ये संगठन मांग कर रहे हैं कि सरकार तुरंत दखल दे और प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाए। आंदोलन कर रहे लोग सभी मिड-डे मील रसोइयों के वेतन में बढ़ोतरी, उनकी नौकरी को स्थायी करने और सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं देने की मांग पर अड़े हुए हैं।
हालांकि इन मांगों और हालात को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से अब तक कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है और न ही यह बताया गया है कि आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।
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