हरियाणा के सरकारी स्कूल से मिड डे मील में एक्सपाइरी तारीख वाली प्रोटीन बार चॉकलेट देने का मामला सामने आया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल है। मामला सामने आने पर कई राजनीतिक पार्टियों ने बीजेपी पर निशाना साधा है।
सरकारी स्कूलों में मिलने वाले मिड-डे मील इन दिनों लापरवाही की घटना सामने आ रही है। कुछ ही दिन पहले यूपी के महोबा जिले से सरकारी स्कूल में लगभग 5 लीटर पानी में एक लीटर दूध मिलाकर बच्चों को पीने के लिए दिया जा रहा था। सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह चर्चा में आई। इसी तरह की खबर अब हरियाणा से आई है जहां प्रोटीन बार खाने की अवधि खत्म होने पर बच्चों को दी गई।
आपको बता दें कि Mid-Day Meal Scheme एक ऐसी योजना है जिसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है ताकि कुपोषण कम हो और स्कूल उपस्थिति बढ़े। हाल के दिनों में इस योजना को लेकर गंभीर लापरवाही के मामले सामने आ रहे हैं।
आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों के अभिभावकों को स्कूल बैग से प्रोटीन बार मिला जिस पर एक्सपायरी डेट 25 सितंबर 2025 की है। यानी इस तारीख के बाद यह चॉकलेट/प्रोटीन बार खाने योग्य नहीं माना जाएगा। निर्धारित अवधि के बाद इसका सेवन करने से स्वास्थ्य पर दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं।
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अभिभावकों ने लगाया लापरवाही का आरोप
स्कूल के बच्चों के अभिभावकों ने आरोप लगाया कि यह स्कूलों वालों की लापरवाही है। यदि प्रोटीन बार की डेट ख़त्म हो गई थी तो इसको बच्चों को नहीं देना चाहिए था, कुछ हो जाता तो कौन जिम्मेदार होता।
“Two half litre milk packets emptied into a bucket of water”
Scenes from Mahoba in Uttar Pradesh, where children at a government school are being given a mid day meal of milk so diluted with water it is barely more than coloured water. pic.twitter.com/dflnsEYq8E
— VIZHPUNEET (@vizhpuneet) February 13, 2026
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस मामले पर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की तरफ से प्रतिक्रिया सामने आई हैं। कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया X पर पोस्ट करते हुए लिखा “ ये घटिया काम हरियाणा की BJP सरकार ने आपके बच्चों के साथ किया है। हरियाणा के जिस गांव में गंदा पानी पहले ही कई लोगों की जान ले चुका है, वहीं अब Expired प्रोटीन बार बांटकर, बच्चों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। सवाल वही है- क्या BJP के नेता अपने बच्चों को Expired प्रोटीन बार खिलाएंगे?
मिड-डे मील में बांटी गई Expired प्रोटीन बार
– ये घटिया काम हरियाणा की BJP सरकार ने आपके बच्चों के साथ किया है
हरियाणा के जिस गांव में गंदा पानी पहले ही कई लोगों की जान ले चुका है, वहीं अब Expired प्रोटीन बार बांटकर, बच्चों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।
ये बेहद शर्मनाक है।… pic.twitter.com/dYik8E5RYD
— Congress (@INCIndia) February 18, 2026
वहीं आम आदमी पार्टी ने कहा कि “Mid day meal में बच्चों को Expired चीजें खिला रही भाजपा सरकार। हरियाणा के सरकारी स्कूल में बच्चों को प्रोटीन बार बाँटी गईं, यह प्रोटीन बार पिछले साल दिसंबर में ही Expire हो चुकी थीं।
फ़िलहाल इस मामले को लेकर आर्टिकल लिखे जाने तक अभी तक कोई अपडेट नहीं आया है।
महोबा में लगभग 5 लीटर पानी में 1 लीटर दूध
महोबा से सामने आई वायरल वीडियो में 1 लीटर दूध को बाल्टी भर पानी में मिलाते देखा गया। इसके बाद खबर लहरिया इस मामले की पूरी जानकारी के लिए महोबा के प्राथमिक विद्यालय ढिकवाहा पहुंची।
नियम के मुताबिक हर बुधवार बच्चों को उबला हुआ गर्म दूध दिया जाना चाहिए। 11 फरवरी को दूध तो दिया गया, लेकिन गर्म दूध की जगह पानी मिला ठंडा दूध बच्चों को पिलाया गया।
स्कूल में कुल 152 बच्चे हैं। सवाल यह है कि सिर्फ़ 1 लीटर दूध में 152 बच्चों को कैसे पूरा किया जा सकता है? बच्चों का कहना है कि दूध इतना पतला होता है कि कमी छिपाने के लिए उसमें अलग से चीनी मिलाई जाती है। चार लीटर पानी में एक लीटर दूध—क्या इसे दूध कहा जा सकता है? पूरी खबर को आप नीचे देख सकते हैं।
महोबा में मिड डे मील में मिलने वाले आटे में कीड़े का आरोप
खबर लहरिया की रिपोर्टिंग में एक और मामला सामने आया जहां 11 फरवरी 2026 को विद्यालय में आटे के लिए पिसवाए जा रहे गेहूं में कीड़े (पाई) पाए गए। यह मामला महोबा जिले के पनवाड़ी ब्लॉक के महुआ इटोरा गांव स्थित कंपोजिट विद्यालय से सामने आया।
बच्चों को नहीं मिलता पौष्टिक खाना – ग्रामीणों का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने हेतु बजट भेजती है। इसके बावजूद बच्चों को न तो गुणवत्तापूर्ण भोजन मिल रहा है और न ही निर्धारित मानकों के अनुसार सामग्री का उपयोग किया जा रहा है।
गेहूं में पाए गए कीड़े का वीडियो बनाकर शिक्षा विभाग को शिकायत भेजी गई। 13 फरवरी 2026 तारीख को जांच भी हुई, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2024 में भी लगभग आठ बच्चे भोजन खाने के बाद बीमार हो गए थे। उनका आरोप है कि घटिया गुणवत्ता का भोजन बच्चों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल रहा है।
आटा चक्की संचालक ने बताया कि उन्होंने कभी भी जानवरों के लिए इस्तेमाल होने वाला या खराब आटा नहीं पीसा। जैसे ही गेहूं चक्की में डाला गया, उसमें कीड़े दिखाई दिए, जिसके बाद गांव के लोग एकत्र हो गए और वीडियो बनाया। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में संबंधित जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
न जाने ऐसी कितनी लापरवाही सरकारी स्कूलों में मिड डे मिल के नाम पर परोसी जा रही है। इस तरह की लापरवाही चिंता का विषय है क्योंकि इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ेगा।
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