महोबा जिले के जैतपुर ब्लॉक के आरी गांव के 75 वर्षीय लख चंद नायक की बचपन से ही भजन-कीर्तन में रुचि रही। वे बताते हैं, “जब मैं सात साल का था, तब हमारे गांव में भजन-कीर्तन की परंपरा काफी प्रचलित थी। इन्हें सुन-सुनकर मेरे मन में भी गाने की इच्छा जागी। धीरे-धीरे मैंने गुनगुनाना शुरू किया और फिर भजन गाने लगा।” उनके परिवार में पहले से ही संगीत का माहौल था। रामलीला के पाठ करने वाले बड़े-बुजुर्गों से उन्होंने संगीत की शुरुआती सीख ली। हालांकि, अब तक उन्होंने किसी को अपना गुरु नहीं बनाया, बल्कि स्वयं अभ्यास के बल पर ही अपने गायन को निखारा है।
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