कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद तीर्थराज उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की पवित्र रेती पर माघ मेला 2026 पूरे उत्साह के साथ चल रहा है। आस्था और अध्यात्म के इस आयोजन में संगम तट पर हर दिन लाखों लोग पहुंचकर स्नान कर रहे हैं। 44 दिनों तक चलने वाला यह धार्मिक आयोजन 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन संपन्न होगा। मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या जैसे स्नान पर्वों को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं को और मजबूत किया है। इस बार माघ मेला आधुनिक सुविधाओं से भी लैस है जहां हेलीकॉप्टर सेवा, क्यूआर कोड से जुड़े बिजली के खंभे और कड़ी निगरानी व्यवस्था के जरिए लोगों की सुरक्षा और सुविधा पर ध्यान दिया जा रहा है।
मकर संक्रांति पर संगम में उमड़ेगी भीड़
15 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर संगम तट पर आस्था और श्रद्धा का दृश्य देखने को मिलेगा। खबरों के अनुसार मेला प्रशासन को अनुमान है कि इस दिन दो करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम में स्नान करेंगे इसी को ध्यान में रखते हुए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। अरैल, झूंसी और संगम क्षेत्र में कुल 24 घाटों पर स्नान की व्यवस्था की गई है। पिछले वर्ष मकर संक्रांति पर करीब 29 लाख लोगों ने संगम स्नान किया था। इस बार संभावित भीड़ को देखते हुए स्नान घाटों की लंबाई बढ़ाकर 3.69 किलोमीटर कर दी गई है जो पहले सिर्फ 2 किलोमीटर थी। मेला क्षेत्र में आवागमन को आसान बनाने के लिए 106.24 किलोमीटर लंबाई में चकर्ड प्लेट से सड़कें भी तैयार की गई हैं।
माघ मेले का आयोजन हर साल पौष पूर्णिमा से शुरू होकर महाशिवरात्रि तक चलता है। साल 2025 में महाकुंभ होने के कारण माघ मेला आयोजित नहीं किया गया था जबकि इससे पहले 2024 में माघ मेले का आयोजन हुआ था। इस बार माघ मेले की शुरुआत 3 जनवरी 2026 से हो चुकी है और यह 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि के दिन समाप्त होगा। इस दौरान मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या जैसे विशेष पर्वों पर श्रद्धालुओं के लिए महास्नान का आयोजन किया जाएगा जिनका धार्मिक महत्व बेहद खास माना जाता है।
माघ मेले में कब कब होंगे स्नान
स्नान घाट
परेड संगम क्षेत्र – संगम नोज, संगम यमुनापट्टी घाट, गंगापट्टी घाट, महावीर घाट पश्चिमी, रामघाट, काली घाट, मोरी घाट, शिवाला घाट पश्चिमी, दशाश्वमेध घाट, नागवासुकि घाट
झूंसी क्षेत्र – संगम लोअर घाट, एरावत घाट, मोरी घाट, ओल्ड जीटी घाट, शिवाला घाट, दंडीबाड़ा घाट, आचार्यबाड़ा घाट, कल्पवासी घाट
अरैल क्षेत्र – पक्का घाट, अरैल, सेल्फी प्वाइंट, महाकाल आरती घाट, चक्रम माधव घाट, सोमेश्वर महादेव घाट
50 श्रद्धालु जुटे तो गांव तक पहुंचेगी रोडवेज बस
मेले में स्नानार्थियों को संगम नगरी तक आसानी से पहुंचाने के लिए रोडवेज ने व्यवस्था की है। यदि किसी गांव से कम से कम 50 श्रद्धालु संगम जाने के लिए एकत्र होते हैं तो केवल एक फोन कॉल पर रोडवेज बस सीधे गांव तक भेजी जाएगी। इस सुविधा के तहत सभी यात्रियों की सहमति होने पर दो स्नानार्थियों को मुफ्त यात्रा का लाभ भी मिलेगा। प्रतापगढ़ डिपो से कुल 92 रोडवेज बसों का संचालन किया जा रहा है जिनमें सबसे ज्यादा बसें प्रयागराज रूट पर लगाई गई हैं। माघ मेले को देखते हुए दिल्ली समेत अन्य रूट की कुछ बसों को घटाकर प्रयागराज मार्ग पर चलाया जा रहा है ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। फिलहाल हर आधे घंटे में संगम नगरी के लिए बस उपलब्ध है और जरूरत को देखते हुए रात में भी बसों का संचालन किया जा रहा है।
रोडवेज अधिकारियों के मुताबिक गांव से बस मंगाने के लिए श्रद्धालुओं को डिपो और सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक को सूचना देनी होगी। तय संख्या पूरी होने पर थोड़ी ही देर में बस गांव पहुंच जाएगी। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक आरडी सोनकर ने बताया कि यह व्यवस्था श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ-साथ निगम की आय बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है जिससे लोगों को गांव से ही सीधे संगम जाने का लाभ मिल सके।
मेला रेल सेवा
इसी के साथ रेलवे ने श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मेला रेल सेवा नाम से एक खास मोबाइल ऐप शुरू किया है। इस ऐप की मदद से अब यात्रियों को टिकट के लिए लंबी कतारों में खड़ा होने की जरूरत नहीं पड़ेगी घर बैठे ही आसानी से टिकट बुक किया जा सकता है। किसी भी आपात स्थिति में सहायता के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-4199-139 भी जारी किया गया है। इसके अलावा ऐप में ट्रेन की लाइव लोकेशन, प्लेटफॉर्म नंबर की जानकारी और खोया-पाया से जुड़ा सेक्शन भी दिया गया है जिससे यात्रा और भी आसान हो सके।
क्या है माघ मेला
माघ मेला एक प्रमुख हिंदू धार्मिक आयोजन है जो हर साल जनवरी–फरवरी के दौरान माघ महीने में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित होता है। यह मेला गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदियों के संगम यानी त्रिवेणी संगम पर लगता है जहां लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान, दान और पूजा-पाठ के लिए पहुंचते हैं। इसे ‘लघु कुंभ’ भी कहा जाता है और यह कुंभ मेले से पहले आयोजित होने वाला वार्षिक धार्मिक उत्सव है।
इस दौरान साधु-संत, नागा बाबा और आम श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करते हैं। कई श्रद्धालु कल्पवास का संकल्प लेते हैं जिसमें वे एक महीने तक संगम तट पर रहकर तपस्या, पूजा और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। मकर संक्रांति और माघ पूर्णिमा जैसे दिनों में स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। प्रयागराज को ‘तीर्थराज’ कहा जाता है और हाल के वर्षों में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मेले में आधुनिक व्यवस्थाएं भी जोड़ी गई हैं जिनमें वाटर स्पोर्ट्स और फ्लोटिंग रेस्टोरेंट जैसे आकर्षण शामिल हैं।
माघ मेला 2026 में अमृत स्नान पर रोक
प्रयागराज में आयोजित माघ मेला 2026 के दौरान अमृत स्नान की अनुमति नहीं होगी। मेला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस बार माघ मेले में कोई नई परंपरा शुरू नहीं की जाएगी। प्रशासन के अनुसार अमृत स्नान कुंभ और महाकुंभ मेले की परंपरा है इसलिए इसे माघ मेले में लागू नहीं किया जाएगा। खबरों के अनुसार मेला अधिकारी आईएएस ऋषिराज ने बताया है कि स्नान पर्वों पर अमृत स्नान की इजाजत नहीं दी जाएगी।
दरअसल ऐसी चर्चाएं थीं कि कुछ साधु-संत मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या पर अमृत स्नान की तैयारी कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि इससे स्नान घाटों पर हादसे की आशंका बढ़ सकती है। कुंभ और महाकुंभ में अमृत स्नान के लिए विशेष और अलग व्यवस्थाएं की जाती हैं जबकि माघ मेले में इस तरह की कोई अलग व्यवस्था नहीं होती। इसी वजह से श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अमृत स्नान पर रोक लगाने का फैसला लिया गया है।
मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या
प्रयागराज माघ मेले में मकर संक्रांति 2026 और मौनी अमावस्या 2026 के स्नान पर्वों को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। इस बार अलग-अलग राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग घाटों पर स्नान की व्यवस्था की जाएगी ताकि भीड़ को बेहतर तरीके से संभाला जा सके। मेला क्षेत्र के सेक्टर-4, झूंसी की ओर करीब 850 मीटर लंबा सबसे बड़ा ऐरावत स्नान घाट बनाया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार 13 जनवरी की शाम से मेला क्षेत्र में सभी प्रकार के वाहनों की एंट्री बंद कर दी जाएगी। वहीं मकर संक्रांति के अवसर पर 14 और 15 जनवरी को पास वाले वाहनों को भी मेला क्षेत्र में प्रवेश नहीं मिलेगा। पार्किंग स्थलों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इन घाटों पर जाने के लिए रूट को डायवर्ट किया जाएगा।
| श्रद्धालुओं का क्षेत्र / राज्य | निर्धारित स्नान घाट / सेक्टर |
| पूर्वी उत्तर प्रदेश | सेक्टर–4 (ऐरावत स्नान घाट) |
| बिहार | सेक्टर–4 (ऐरावत स्नान घाट) |
| पश्चिम बंगाल | सेक्टर–4 (ऐरावत स्नान घाट) |
| ओडिशा | सेक्टर–4 (ऐरावत स्नान घाट) |
| छत्तीसगढ़ | सेक्टर–4 (ऐरावत स्नान घाट) |
| झारखंड | सेक्टर–4 (ऐरावत स्नान घाट) |
| अरुणाचल प्रदेश | सेक्टर–4 (ऐरावत स्नान घाट) |
| मध्य उत्तर प्रदेश | सेक्टर–1, 2, 5 और 6 |
| पश्चिमी उत्तर प्रदेश | सेक्टर–1, 2, 5 और 6 |
| मध्य प्रदेश | सेक्टर–1, 2, 5 और 6 |
| उत्तराखंड | सेक्टर–1, 2, 5 और 6 |
| दिल्ली-एनसीआर | सेक्टर–1, 2, 5 और 6 |
| हरियाणा | सेक्टर–1, 2, 5 और 6 |
| पंजाब | सेक्टर–1, 2, 5 और 6 |
| राजस्थान | सेक्टर–1, 2, 5 और 6 |
| गुजरात | सेक्टर–4 और सेक्टर–7 |
| महाराष्ट्र | सेक्टर–4 और सेक्टर–7 |
| दक्षिण भारत के राज्य | सेक्टर–4 और सेक्टर–7 |
| त्रिपुरा | सेक्टर–4 (ऐरावत स्नान घाट) |
यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’
If you want to support our rural fearless feminist Journalism, subscribe to our premium product KL Hatke

