निखिल बताते हैं कि इस दुकान की प्रेरणा उन्हें अपनी दादी से मिली। उनकी दादी हमेशा कहा करती थीं कि घर में जैविक खेती करो और जो भी अनाज या बीज उगाओ – जैसे चना, अलसी, मेथी आदि उन्हें प्राकृतिक रूप से तैयार कर खाओ।
रिपोर्ट – अलीमा, लेखन – सुचित्रा
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए उम्र के साथ चिंता भी बढ़ जाती है। आजकल के समय में यदि बचपन से ही सही खाना और पोषण का ध्यान न रखा जाए तो बाद में जाकर दवाएं खानी पड़ती है। दवा खाने की नौबत न आए इसलिए हमारे बुजुर्ग पुराने ज़माने में जड़ी बूटी और प्रकृति से मिलने वाली चीजों का इस्तेमाल करते थे जिसकी वजह से अधिक स्वस्थ रहते थे।
इसी तरह की बातों को ध्यान में रखते हुए एक दुकानदार ने अपनी दादी से सिख कर सड़क किनारे लोगों के लिए दुकान लगाना शुरू किया। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्टेडियम के सामने सुबह 7:00 बजे से एक दुकान लगाई जाती है, जिसका नाम है “दादी के नुस्खे”।
इस दुकान पर कई तरह की पारंपरिक और स्वास्थ्य के लिए लाभदायक चीजें मिलती हैं – जैसे भिगोई हुई मूंगफली, मूंग दाल, चना, अलसी और मेथी। इन सभी अनाजों को पानी में भिगोकर कपड़े में बाँधकर रखा जाता है, जिससे उनमें छोटे-छोटे अंकुर (कूटे) निकल आते हैं। फिर इन्हीं अंकुरित अनाजों को ताज़ा-ताज़ा बेचने के लिए रखा जाता है।
शरीर के लिए फायेदमंद
बताया जाता है कि इसे खाने से शरीर फिट और ऊर्जावान रहता है, कमजोरी नहीं आती और व्यक्ति स्वाभाविक रूप से तंदुरुस्त रहता है। चना खाली पेट खाने से वजन और ताकत बढ़ती है, अलसी त्वचा को चमकदार और स्वस्थ बनाती है और मेथी बालों को मजबूत और घना बनाए रखने में मदद करती है।
इसी पारंपरिक और प्राकृतिक स्वास्थ्य की वजह से इस दुकान का नाम “दादी के नुस्खे” रखा गया है। पहले के ज़माने में लोग सुबह-सुबह इसी तरह का नाश्ता करते थे और पूरी तरह स्वस्थ रहते थे। यही परंपरा आज भी यहाँ जीवित है, इसलिए “दादी के नुस्खे” को देखने और खाने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।
वहाँ आए ग्राहकों में से एक राजू सिंह हैं, जिनकी उम्र 33 साल है। उन्होंने बताया कि वे रोज़ाना यहाँ “दादी के नुस्खे” वाला सलाद खाने आते हैं।
राजू सिंह का कहना है कि इस सलाद में भिगोए हुए चने रहते हैं, जो शरीर को प्रोटीन, आयरन, फाइबर, कैल्शियम और विटामिन-B6 प्रदान करते हैं। इनके सेवन से पाचन शक्ति सुधरती है, शरीर में ऊर्जा बनी रहती है, और यह वजन घटाने में भी सहायक होता है। साथ ही यह ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने और खून की कमी को दूर करने में भी मदद करता है।
राजू सिंह बताते हैं कि वे रोज़ाना तीन-चार किलोमीटर पैदल चलकर यहाँ तक आते हैं, जिससे कसरत भी हो जाती है और भूख भी अच्छी लगती है। उनका कहना है,
“यहाँ आकर जब ताज़ा-ताज़ा दादी के नुस्खे वाला सलाद खाते हैं, तो तबीयत खुश हो जाती है।”
उन्होंने यह भी बताया कि डॉक्टर भी सलाह देते हैं कि सुबह-सुबह ऐसी चीज़ें खानी चाहिए जो शरीर को प्राकृतिक ऊर्जा और पोषण दें। इसलिए वे हर दिन यहाँ आकर इस पारंपरिक, सेहतमंद नाश्ते का आनंद लेते हैं।
दादी से सीखा नुस्खा
दुकानदार का नाम निखिल राय है, जिनकी उम्र 32 साल है। निखिल बताते हैं कि इस दुकान की प्रेरणा उन्हें अपनी दादी से मिली। उनकी दादी हमेशा कहा करती थीं कि घर में जैविक खेती करो और जो भी अनाज या बीज उगाओ – जैसे चना, अलसी, मेथी आदि उन्हें प्राकृतिक रूप से तैयार कर खाओ।
वे कहती थीं कि जब यह अनाज तैयार हो जाए, तो रात में इन्हें भिगोकर रखो और सुबह खाली पेट खाओ। इससे कई तरह की बीमारियाँ दूर होती हैं और शरीर स्वस्थ रहता है।
निखिल बताते हैं कि दादी के निधन के बाद उन्होंने उनकी याद में यह दुकान खोली और इसका नाम रखा “दादी के नुस्खे”।
वे आगे बताते हैं कि दुकान पर सिर्फ अंकुरित अनाज ही नहीं, बल्कि कई तरह के जूस भी तैयार किए जाते हैं — जैसे लौकी का जूस, चुकंदर का जूस, एलोवेरा जूस, नीम का जूस और गाजर का जूस।
यहाँ उपयोग किए जाने वाले सभी अनाज शुद्ध, ताज़ा और जैविक खेती से उगाए हुए होते हैं।
निखिल ने बताया कि इन जूसों से लोगों को बहुत लाभ मिलता है – खून की कमी दूर होती है, शुगर और बीपी नियंत्रण में रहते हैं और शरीर में प्राकृतिक ऊर्जा और स्फूर्ति बनी रहती है।
वे बताते हैं कि रोज़ सुबह सूरज निकलने से पहले ही उनका सारा सामान बिक जाता है और लोग खुश होकर “दादी के नुस्खे” के इन सेहतमंद पेयों और खाद्य पदार्थों का आनंद लेते हैं। छतरपुर जिले के समीकरण मोहल्ला में रहने वाले मोहसिन का कहना है कि, “यह सलाद खाकर ऐसा लगता है जैसे तबीयत खिल उठी हो। दिन की शुरुआत जैसी होती है, वैसा ही पूरा दिन बीतता है।”
वे बताते हैं कि सुबह का समय शरीर के लिए ऊर्जा का समय होता है। रात भर सोने के दौरान शरीर अपने अंदर की गंदगी निकालने और अंगों को आराम देने का काम करता है। इसलिए सुबह जब पेट खाली होता है, उस समय अगर हम उसे प्राकृतिक पोषण दें, तो शरीर उसे जल्दी अवशोषित करता है और गहराई से पोषण देता है।
मोहसिन कहते हैं कि वे न सिर्फ खुद यहाँ खाते हैं, बल्कि अपने घरवालों के लिए भी सलाद और जूस लेकर जाते हैं। उनकी माँ को शुगर और बीपी की समस्या है, इसलिए वे अक्सर यहाँ से मिक्स जूस ले जाते हैं। उनका कहना है कि,“जब से हम यहाँ से जूस ले जाने लगे हैं, माँ की शुगर पूरी तरह कंट्रोल में है।”
इस तरह “दादी के नुस्खे” उनके दिन की सेहतमंद शुरुआत और परिवार की भलाई का अहम हिस्सा बन गया है।
छतरपुर जिले के नारायण बाग में रहने वाली शाहजहां बेगम बताती हैं कि उन्हें शुगर और ब्लड प्रेशर की समस्या है। उन्होंने बताया कि उनके भतीजे ने उन्हें जानकारी दी। भतीजे ने उन्हें बताया कि वहाँ का जूस पीने से शुगर और बीपी दोनों नियंत्रित रहते हैं। पहले शाहजहां बेगम को इस पर विश्वास नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने सोचा कि पुराने समय में लोग आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चीज़ें खाकर ही स्वस्थ रहते थे तब तो किसी को शुगर या बीपी जैसी बीमारियाँ होती ही नहीं थीं।
शाहजहां बेगम मुस्कुराते हुए कहती हैं, “अब मुझे शुगर की गोली भी नहीं खानी पड़ती। रोज़ बस एक गिलास जूस मंगाकर पी लेती हूँ – 30 रुपए का आता है, लेकिन अंग्रेज़ी दवाइयों से तो कहीं बेहतर है।”
उनका मानना है कि “दादी के नुस्खे” जैसे प्राकृतिक उपाय ही स्वास्थ्य बनाए रखने का असली रास्ता हैं।
जब इस विषय में आयुर्वेदिक अस्पताल की डॉक्टर एम.के. मिश्रा से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि पहले के समय में लोग अपने घरों में ही आयुर्वेदिक तरीकों से इलाज किया करते थे। आज भी कई लोग यह मानते हैं कि मिक्स जूस पीने से उनकी शुगर और बीपी नियंत्रित रहती है, तो यह संभव है, क्योंकि प्राकृतिक चीज़ों में जो शुद्धता होती है, वह अन्य किसी उपाय में नहीं होती।
डॉ. मिश्रा बताती हैं कि वे भी आयुर्वेदिक तरीकों से लोगों का मार्गदर्शन करती हैं। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति रोज़ सुबह एक चम्मच अलसी और आधा चम्मच मेथी का सेवन करता है, तो उसका मेटाबॉलिज्म लगभग 15% तक बेहतर हो सकता है। आयुर्वेद में कहा गया है कि “भोजन ही औषधि है।” ये तीनों बीज (अलसी, मेथी और अन्य प्राकृतिक तत्व) प्रकृति की अनमोल देन हैं। सुबह का समय इन्हें ग्रहण करने के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि वे स्वयं रोज़ सुबह मिक्स जूस पीते हैं, जिससे शरीर तरोताज़ा रहता है। इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता, बशर्ते इसे सही मात्रा में लिया जाए।
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