ठण्ड में लोग अधिकतर खुद का ध्यान नहीं रख पते हैं क्योंकि न लोगों के पास इतना समय होता है और न ही ठण्ड में कुछ करने की हिम्मत होती है। लेकिन ठण्ड में खुद का ध्यान रखना बहुत जरुरी हो जाता है क्योंकि त्वचा ड्राई हो जाती है और ज्यादा बीमार होने का खतरा बढ़ जाता है। खबर लहरिया के डॉक्टर शो में क़स्बा पनवारी महोबा के डॉक्टर पंकज तिवारी फिजिशियन और अयोध्या की होम्योपैथिक चिकित्सक डॉक्टर कल्पना कुशवाहा ने ठण्ड में कैसे खुद को बिमारियों से बचाया जाए इस पर बात की। ठण्ड में खुद की देखभाल करने के लिए घरेलु नुस्ख़े भी होते हैं जिन्हें सदियों से लोग अपना रहे हैं।
खबर लहरिया के डॉक्टर शो में क़स्बा पनवारी महोबा के डॉक्टर पंकज तिवारी फिजिशियन ने ठण्ड में कैसे खुद को बिमारियों से बचाया जाए इसके बारे में बताया। उन्होंने बताया कि ठण्ड में बच्चों को जल्दी सर्दी पकड़ती है और बच्चों को ठण्ड में ढक कर रखना चाहिए। ठण्ड में बच्चों को अधिकतर निमोनियाँ होने का डर रहता है। जो बड़े है यानी 50 से ऊपर उन्हें मॉर्निंग वाक पर जाने, घूमने फिरने से बचना चाहिए।
ठण्ड में इन चीजों को खाएं
ठण्ड में अधिकतर गर्म चीजों का सेवन करना चाहिए जैसे -बथुआ, मैथी, साग, गाजर और मूली खानी चाहिए। ठण्ड में पानी कम से कम एक दिन में 3 से 4 लीटर पीना चाहिए क्योंकि ठण्ड में प्यास कम लगती है तो लोग पानी पीने पर ध्यान नहीं देते हैं।
ठण्ड में त्वचा का ध्यान कैसे रखें?
ठण्ड में त्वचा शुष्क यानी ड्राई हो जाती है ऐसे में ख्याल रखना बहुत जरुरी है। अयोध्या की होम्योपैथिक चिकित्सक डॉक्टर कल्पना कुशवाहा ने ठण्ड में त्वचा को कैसे ड्राई होने से बचा सकते हैं और क्या खास ध्यान रखना चाहिए इसके बारे में बताया। डॉक्टर कल्पना ने बताया कि त्वचा में रखने के लिए Hydrating (हाइड्रेटिंग) क्लीन्ज़र का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके साथ ही मॉइस्चराइज़र (moisturizer) क्रीम का इस्तेमाल करना चाहिए। यह त्वचा को सॉफ्ट रखती है और ड्राई होने से बचाती है। नारियल या फिर सरसों का तेल और मलाई का भी इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट जैसे तत्व शामिल होते हैं जो हमारी त्वचा को संक्रमण से भी बचाते हैं।
ठण्ड में ज्यादा गर्म पानी से भी नहीं नहाना चाहिए क्योंकि जब हम गर्म पानी से नहाते हैं तो हमारी त्वचा पर मौजूदा प्रकृति तेल प्रभावित होता है।
ठण्ड के मौसम में शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) थोड़ी कमजोर हो जाती है, इसलिए कुछ बीमारियों का खतरा ज़्यादा बढ़ जाता है।
सर्दी-जुकाम और फ्लू, इसमें नाक बहना, छींक, गले में खराश होती है। ठंडी हवा और वायरस के कारण जल्दी फैलता है। इसे ठीक करने के लिए तुलसी-अदरक-काली मिर्च की चाय पीनी चाहिए।
खांसी, ब्रोंकाइटिस और निमोनिया
ठण्ड में फेफड़ों का संक्रमण बढ़ जाता है। बुजुर्गों और बच्चों में खतरा ज्यादा होता है। रात को सोने से पहले हल्दी वाला दूध पीना चाहिए। यह इम्युनिटी बढ़ाता है, शरीर की सूजन कम करता है।
दमा (अस्थमा) और सांस की बीमारी
ठंडी हवा से सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं। दमे के मरीजों को ज्यादा परेशानी होती है
दिल से जुड़ी बीमारियाँ
ठण्ड में रक्त नलिकाएं सिकुड़ती हैं। हार्ट अटैक और ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। लल्लन टॉप की रिपोर्ट के अनुसार PubMed Central में छपी स्टडी के मुताबिक, सर्दियों के मौसम में दिल की बीमारियों से होने वाली मौतों में बढ़ोत्तरी देखी गई है। ठंड के दिनों में सांस लेने में दिक्कत ज्यादा होती है। इसके चलते शरीर में ऑक्सीजन लेवल कम हो जाता है। ऑक्सीजन की कमी से दिल पर असर पड़ता है।
जोड़ों और मांसपेशियों का दर्द
ठण्ड में गठिया (आर्थराइटिस) के मरीजों को ज्यादा दर्द होता है। ठण्ड से अकड़न बढ़ जाती है। दर्द को कम करने के लिए सरसों के तेल को थोड़ा गुनगुना गर्म करके थोड़ा लहसुन डालकर जोड़ों की मालिश गर्म करें। इससे आपको दर्द में राहत होगी।
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