मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित खजुराहो अपनी अनोखी और भव्य कलाकृतियों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। यहां बने मंदिरों को देखने हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटक आते हैं।
रिपोर्टिंग – अलीमा तरन्नुम, लेखन – रचना
खजुराहो के मंदिर भारतीय इतिहास और कला के खूबसूरत नमूने हैं। यहां का सबसे ऊंचा मंदिर सन 1025 से 1050 के बीच चंदेल शासक राजा विद्याधर ने बनवाया था। कहते हैं यह भव्य मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर के गर्भगृह और उसके चारों ओर बनी कला इसकी खास विशेषताएं हैं। दूर-दूर से पर्यटक यहां आते हैं और पत्थरों पर की गई बारीक कलाकारी को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। मंदिर की दीवारों पर बनी हर मूर्ति और नक़्क़ाशी इतनी सुंदर है कि देखने वाले की नज़रें हटती ही नहीं।
खजुराहो मंदिर कलाकृतियों के लिए दुनिया भर में मशहूर
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित खजुराहो अपनी अनोखी और भव्य कलाकृतियों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। यहां बने मंदिरों को देखने हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटक आते हैं। खजुराहो का नज़ारा इतना खास है कि इसे देखकर लगता है जैसे इतिहास सामने जीवंत हो उठा हो।
तस्वीरों में दिख रहे ये मंदिर पूरी तरह पत्थरों को तराशकर बनाए गए हैं। हर छोटी-छोटी आकृति में उस समय की कला, मेहनत और बारीकी झलकती है। यहां की इमारतें इतनी ऊंची और सुंदर हैं कि देखने वाले की नजरें उन पर टिक जाती हैं।
सर्दियों के मौसम में यहां पर्यटकों की भीड़ सबसे ज्यादा रहती है। एक गार्ड ने बताया कि कुछ मूर्तियों पर टूटी हुई आकृतियां दिखाई देती हैं जिन्हें मुगल काल में नुकसान पहुंचाया गया था। इसके बावजूद इन मंदिरों की भव्यता आज भी उतनी ही आकर्षक और अद्भुत है। खजुराहो की खूबसूरती देखकर हर कोई यही कहता है “इसे देखते-देखते मन भरता ही नहीं।”
पर्यटकों की नजर में खजुराहो, “यहां आकर दिल खुश हो जाता है”
तस्वीरों में दिख रही भीड़ बताती है कि खजुराहो की सुंदरता लोगों को कितनी आकर्षित करती है। उड़ीसा से आई पर्यटक ओमवती अपने परिवार के साथ यहां घूमने पहुंची हैं। वह बताती हैं कि उन्होंने अखबार में पढ़ा था कि मध्य प्रदेश में खजुराहो नाम की जगह जरूर देखनी चाहिए इसलिए पूरा परिवार यहां आ गया।
ओमवती कहती हैं, “यहां आकर ऐसा लग रहा है जैसे पुराने जमाने के किसी खूबसूरत दौर में पहुंच गए हों। जितना पढ़ा था उससे कहीं ज्यादा सुंदर नजारा यहां देखने को मिला। हर जगह हरियाली है साफ-सफाई है और माहौल बहुत शांत लगता है। यहां आकर सारे दुख-दर्द भूल जाते हैं। हम अपने राज्य जाकर सभी को कहेंगे कि खजुराहो जरूर घूमकर आएं।”
खजुराहो की सुंदरता में खो जाते हैं पर्यटक
तस्वीरों में दिख रही हरी-भरी घास और पेड़ इस बात का सबूत हैं कि मंदिर परिसर की साफ-सफाई और देखभाल रोज़ की जाती है। यहां सुबह-शाम पानी डाला जाता है जिससे पूरा परिसर हमेशा ताज़ा और सुंदर दिखाई देता है।
पहले यहां जाना बिल्कुल मुफ्त था लेकिन अब प्रवेश के लिए प्रति व्यक्ति 60 रुपये का टिकट ऑनलाइन लेना होता है। राजस्थान से आए पर्यटक पुष्पेंद्र बताते हैं “मैं यहां दूसरी बार आया हूं। सर्दियां शुरू होते ही मैं अपनी फैमिली के साथ खजुराहो घूमने ज़रूर आता हूं। यहां की इमारतें और मूर्तियां बहुत ही खास हैं। पत्थरों को तराशकर बनाई गई कला आज भी उतनी ही सुंदर लगती है। जब लोग यहां आते हैं तभी समझ पाते हैं कि यह जगह कितनी खूबसूरत और देखने लायक है।”
खजुराहो सौ वर्षों में बना अद्भुत मंदिर का समूह
खजुराहो के मंदिरों का निर्माण करीब 100 साल में हुआ। चंदेल राजाओं ने एक-एक करके इन मंदिरों को बनवाया। यह वही राजवंश है जिसने 10वीं से 14वीं शताब्दी तक बुंदेलखंड क्षेत्र पर राज किया था। यहां हिंदू और जैन, दोनों धर्मों के मंदिर हैं। इससे पता चलता है कि उस समय लोग आपस में मिलकर शांति से रहते थे। खजुराहो के मंदिर अपनी खास नक़्काशी और ऊंची, सुंदर बनावट के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं।
मंदिरों में बनी मूर्तियां रोजमर्रा की जिंदगी को दिखाती हैं जैसे ध्यान लगाना, सीख देना, परिवार के रिश्ते और लोगों की दिनचर्या। इनमें कुछ मशहूर कामुक मूर्तियां भी हैं लेकिन ये पूरे मंदिर परिसर की मूर्तियों का सिर्फ एक छोटा हिस्सा हैं लगभग दसवां भाग।
खजुराहो सिर्फ मंदिरों का समूह नहीं बल्कि भारत की प्राचीन कला, संस्कृति और स्थापत्य का जीवंत प्रमाण है। पत्थरों पर की गई अद्भुत नक्काशी, ऊंची-भव्य इमारतें और हर जगह फैली हरियाली इसे एक अनोखी और यादगार जगह बनाती हैं। यहां आने वाला हर पर्यटक यही महसूस करता है कि खजुराहो सिर्फ देखने की जगह नहीं बल्कि महसूस करने की जगह है जहां इतिहास सांस लेता है कला बोलती है और वातावरण मन को शांति से भर देता है। चंदेल राजाओं की विरासत, कारीगरों की मेहनत और सदियों तक सुरक्षित बची ये कलाकृतियां आज भी दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करती हैं। चाहे पुरानी मूर्तियों की बारीकियां हों, शांत वातावरण हो या लोगों के अनुभव। हर चीज़ खजुराहो की यात्रा को खास बना देती है।
यही वजह है कि यहां आने वाला हर व्यक्ति लौटते वक्त सिर्फ तस्वीरें ही नहीं ले जाता बल्कि इतिहास, सुंदरता और भारतीय संस्कृति की गहरी छाप अपने मन में लेकर जाता है।
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