यूपी में दक्षिण कानपुर के नौबस्ता में 45 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया सरकारी अस्पताल अभी तक बंद है। बताया जा रहा है कि इसके उद्घाटन की तारीख मार्च 2025 रखी गई थी। इसके बावजूद 1 साल बाद भी इस अस्पताल को चालू नहीं किया गया है। कहने को इस अस्पताल में 100 बेड (बिस्तर) हैं और लगभग 20 लाख निवासियों को इससे फायदा होता। यह अस्पताल अब सवालों के घेरे में आ गया है कि यह कब खुलेगा और वास्तव में लोगों को कब सुविधाओं का लाभ मिलेगा?
जब अपने क्षेत्र में यह खबर सुनने को मिलती है कि यहां सरकारी अस्पताल बनेगा, तो लोगों के अंदर उम्मीद जगने लगती है कि अब उन्हें दूर नहीं जाना पड़ेगा उनका इलाज यहीं हो जायेगा। लेकिन जब अस्पताल बनकर तैयार भी हो गया हो फिर भी उसमें इलाज के लिए लोग न जा पा रहे हो इससे दुःख की बात क्या होगी? इसी तरह की खबर कानपुर से सामने आई जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार इस अस्पताल में गहन चिकित्सा इकाई, ऑपरेशन थिएटर, आपातकालीन सेवाएं और बाह्य रोगी विभाग शामिल हैं। पर इलाज के लिए कोई डॉक्टर, नर्स या सहायक कर्मचारी तैनात नहीं किए गए हैं। अस्पताल का मुख्य द्वारा बाहर से ही बंद है।
अस्पताल बंद होने की वजह
मुख्य चिकित्सा अधिकारी हरिदत्त नेमी के अनुसार, कर्मचारियों की स्वीकृति और जरूरी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में हो रही देरी की वजह से परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। अलग-अलग विभागों के बीच फाइलों का आदान-प्रदान लगातार जारी है और हस्तांतरण की प्रक्रिया भी अभी पूरी नहीं हुई है। इसी कारण काम की रफ्तार काफी धीमी बनी हुई है। हालाँकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बृजेश पाठक, जिनके पास स्वास्थ्य मंत्रालय का भी प्रभार है, उन्होंने अस्पताल खुलने में इतनी देरी पर रिपोर्ट मांगी है।
भाजपा जिला अध्यक्ष (दक्षिण) शिवराम सिंह ने बताया कि उपमुख्यमंत्री ने इस मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा, “काम जारी है और अस्पताल दो महीने में बनकर तैयार हो जाएगा।”
स्थानीय निवासियों की मांग
स्थानीय निवासी इस अस्पताल को जल्दी से शुरू करवाने की मांग कर रहे हैं। वे प्रशासन से भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने, आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने और अस्पताल को बिना किसी देरी के चालू करने का आग्रह कर रहे हैं।
अस्पताल से पहले बीजेपी का कार्यालय खुला
इंडिया टुडे की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जिस समय इस अस्पताल का शिलान्यास हुआ, ठीक उसी वक्त इसके बगल में भाजपा कार्यालय की नींव भी रखी गई थी। आज भाजपा का दफ्तर पूरी तरह चालू है, जहां बड़े नेताओं और मंत्रियों का जमावड़ा लगा रहता है। लेकिन थोड़ी ही दूरी पर बना अस्पताल स्टाफ और बजट की कमी के कारण अब तक नहीं खुला है।
महोबा में भी 25 साल पुराने सरकारी अस्पताल में डॉक्टर नहीं
यूपी का कानपूर ही नहीं, महोबा में भी एक 25 साल पुराने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर नहीं है जिसकी वजह से लोगों का समय पर इलाज नहीं हो पाता। खबर लहरिया की नवंबर 2025 में की गई रिपोर्टिंग के दौरान यह बात सामने आई। जिसे आप नीचे दिए वीडियो में देख सकते हैं।
जिला महोबा ब्लॉक कबरई के खन्ना गांव में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिछले 5 सालों से सिर्फ एक फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है। जहाँ 15 से 20 गांवों के मरीज इलाज के लिए आते हैं, लेकिन डॉक्टर की अनुपस्थिति में गंभीर मरीजों को रेफ़र करना पड़ता है या फिर इलाज के अभाव में जान भी चली जाती है।
राजा बाबू, लाल दास और गांव की अन्य महिलाओं ने बताया कि अगर यहाँ डॉक्टर होते तो कई जानें बच सकती थीं। वहीं फार्मासिस्ट पवन सिंह ने बताया कि वह अकेले ही इंजेक्शन लगाने से लेकर दवा देने, पर्चा बनाने और सफ़ाई तक का काम करते हैं।
सरकार लाखों, करोड़ों रुपए लगा कर अस्पताल का निर्माण करवाती है लेकिन जब डॉक्टर, नर्स की भर्ती की बात आती है तो इसमें तेजी नहीं दिखती है। बस आश्वाशन दे दिया जाता है कि जल्दी ही डॉक्टर आ जायेंगे। जो अस्पताल मुख्य मीडिया में खबर बन गए वो तो शायद जल्दी ही शुरू भी हो जाए लकिन उन ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र का क्या जहां यह समस्या आज भी बनी हुई है।
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