जेफरी एपस्टीन वर्तमान में एक चर्चित नाम बन गया है। हर कोई इसके बारे में जानना चाहता है। जेफ़री एपस्टीन से संबंधित लगातार सोशल मीडिया में वीडियो और स्टोरियाँ देखने को मिल रही है। इसी के साथ ही इस खबर में डोनाल्ड ट्रम्प समेत कई नेताओं का भी नाम लिया जा रहा है। आख़िर क्या है इसकी कहानी?
बता दें जेफ़री एपस्टीन अमेरिका का एक अमीर कारोबारी था जिस पर नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और सेक्स नेटवर्क चलाने के गंभीर आरोप लगे थे। साल 2008 में उसे इस मामले में दोषी भी माना गया था। 2019 में उस पर फिर केस चला लेकिन मुकदमा पूरा होने से पहले ही वह जेल में मृत पाया गया। उसकी मौत को आत्महत्या बताया गया लेकिन इस पर आज भी सवाल उठते हैं।
जेफ़री एपस्टीन इस समय इसलिए चर्चा में है क्योंकि उससे जुड़े सरकारी दस्तावेज़ और जांच से जुड़ी फाइलें अब धीरे-धीरे सार्वजनिक की जा रही हैं जिन्हें “एपस्टीन फाइल्स” कहा जाता है। इन फाइलों में उसके संपर्कों और गतिविधियों की जानकारी है जिससे लोग जानना चाहते हैं कि वह किन बड़े और ताकतवर लोगों के संपर्क में था और क्या पूरे मामले की सच्चाई अब सामने आएगी। इसी वजह से यह नाम फिर से खबरों में है।
नरेंद्र मोदी पर भी आरोप
विदेश मंत्रालय ने हाल में आई एपस्टीन फाइलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम आने की बात को पूरी तरह गलत बताया है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि जिस ईमेल का हवाला दिया जा रहा है उसमें सिर्फ 2017 की इज़राइल यात्रा का जिक्र सही है। बाकी बातें एक दोषी अपराधी की मनगढ़ंत सोच हैं और उनका कोई मतलब नहीं है।
इस मुद्दे पर राजनीति भी शुरू हो गई। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए और कहा कि यह देश के लिए शर्म की बात है। उन्होंने दावा किया कि एक ईमेल में लिखा है कि मोदी ने एपस्टीन की सलाह मानी थी। वहीं सरकार ने साफ कहा कि ऐसे आरोप बेबुनियाद हैं।
It is a matter of national shame that Jeffery Epstein – a convicted human trafficker, child sex offender and serial rapist from the USA – wrote that the Prime Minister Narendra Modi took his “advice and danced and sang in Israel for the benefit of the US president. They had met a… pic.twitter.com/3jRXjGLNsS
— Pawan Khera 🇮🇳 (@Pawankhera) January 31, 2026
ये ईमेल जेफरी एपस्टीन से जुड़ी फाइलों का हिस्सा बताए जा रहे हैं जो अमेरिकी न्याय विभाग ने जारी किए हैं। इनमें “जाबोर वाई” नाम के एक व्यक्ति को भेजे गए मेल का जिक्र है लेकिन यह साफ नहीं है कि वह व्यक्ति कौन था। भारत सरकार का कहना है कि इन फाइलों में प्रधानमंत्री के खिलाफ कुछ भी साबित नहीं होता। एपस्टीन खुद एक अपराधी था जिस पर नाबालिग लड़कियों के शोषण के आरोप थे और 2019 में जेल में उसकी मौत हो गई थी। इसलिए सरकार ने मोदी से जुड़ी बातों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
इस मामले पर अनिल अंबानी का नाम
इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) की जारी की गई फाइलों से यह जानकारी सामने आई है कि रिलायंस समूह के चेयरमैन अनिल अंबानी और दोषी ठहराए गए अमेरिकी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के बीच आपसी बातचीत (मैसेज और ईमेल) हुई थी। इन बातचीतों में पैसों की व्यवस्था कारोबार में निवेश और रक्षा क्षेत्र से जुड़े काम जैसे विषयों पर चर्चा की गई थी।
डीओजे की वेबसाइट पर मौजूद “एपस्टीन फाइल्स” में खोज करने पर अनिल अंबानी का नाम करीब 87 बार दिखाई देता है। एक रिकॉर्ड के मुताबिक 20 अप्रैल 2019 को अनिल अंबानी ने एपस्टीन को मैसेज भेजकर पूछा था कि वह कंपनी के लिए फंडिंग यानी पैसों की व्यवस्था कराने में किस तरह मदद कर सकता है।
इन संदेशों से यह भी पता चलता है कि दोनों की मुलाकात एपस्टीन के घर पर हुई थी जहां उन्होंने साथ में डिनर किया और कारोबार को लेकर बातचीत की। कुछ मैसेज में एपस्टीन ने अंबानी से उनकी छवि (इमेज) को लेकर भी बात की थी और कहा था कि उसके घर पर कई वित्त विशेषज्ञ आते हैं जिनसे मिलने पर उन्हें फायदा हो सकता है। ये सारी जानकारियां फरवरी 2017 से मई 2019 के बीच हुई बातचीत से जुड़ी हैं। इन दस्तावेजों का विश्लेषण मीडिया रिपोर्ट इंडियन एक्सप्रेस में किया गया है। हालांकि इन फाइलों में नाम आने का मतलब यह नहीं है कि किसी पर अपराध साबित हो गया है लेकिन इनसे यह जरूर पता चलता है कि दोनों के बीच संपर्क और बातचीत हुई थी।
खुलासा…
अनिल अंबानी का यौन अपराधी एपस्टीन से गठजोड़ की पोल खोलता इंडियन एक्सप्रेस का यह लेख
एपस्टीन फाइल्स में दर्ज अनिल अंबानी और जेफरी एपस्टीन के काले रिश्तों की क्रोनालॉजी हर भारतीय को झकझोर देगी। एक घोषित यौन अपराधी जेफ़री एप्स्टीन के साथ व्यापारिक-व्यक्तिगत गठबंधन अनिल… pic.twitter.com/lIw05xyuf3
— K P Malik (@TheKPMalik) February 15, 2026
क्या मंत्री हरदीप सिंह भी इस मामले में शामिल हैं?
मोदी सरकार के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को लेकर विपक्ष ने फिर सवाल खड़े किए हैं। वजह यह है कि अमेरिकी अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़े ईमेल संसद में सामने आए हैं। इस मुद्दे को राहुल गांधी ने 11 फरवरी को लोकसभा में अपने भाषण के दौरान उठाया। इसके बाद पुरी ने पार्टी दफ्तर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष पर हमला बोला और आरोपों को बेबुनियाद बताया। अगले दिन उन्होंने टीवी इंटरव्यू में यह माना कि एपस्टीन से मुलाकात हुई थी लेकिन किसी गलत काम से इनकार किया।
अमेरिकी न्याय विभाग की एपस्टीन लाइब्रेरी वेबसाइट पर खोज करने पर “हरदीप सिंह पुरी” नाम से कई रिकॉर्ड मिलते हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुरी ने मजाकिया अंदाज़ में कहा कि एक सांसद ने उनसे कहा था कि लोग जलन में ये बातें फैला रहे हैं। पुरी का कहना था कि अगर कुछ गलत होता तो वह खुद सामने आकर बताते लेकिन ऐसा कुछ नहीं है।
द वायर के खबर अनुसार ईमेल से यह बात सामने आती है कि हरदीप सिंह पुरी ने जेफरी एपस्टीन के “खूबसूरत द्वीप” का जिक्र किया था और वहां मौज-मस्ती की बात लिखी थी लेकिन अपने इंटरव्यू में पुरी ने कहा कि यह सिर्फ आम बोलचाल का शब्द था इसका कोई खास मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वे एपस्टीन से आठ साल में सिर्फ तीन-चार बार ही मिले थे और उनकी कोशिश बस इतनी थी कि एपस्टीन की मुलाकात लिंक्डइन के संस्थापक रीड हॉफमैन से कराई जाए।
हालांकि ईमेल से यह भी पता चलता है कि पुरी ने एपस्टीन के एक सहयोगी को तुरंत प्राथमिकता के आधार पर भारतीय वीजा दिलाने में मदद करने की बात मानी थी। पुरी का कहना है कि इन बातों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और इससे कोई अलग मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए।
एपस्टीन फाइल्स है क्या?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 2008 में अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य में एक 14 साल की लड़की के माता – पिता ने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी के साथ जेफरी एपस्टीन (Jeffrey Epstein) ने अपने पाम बीच वाले घर में यौन शोषण किया। जांच में उसके घर से कई लड़कियों की तस्वीरें भी मिलीं। एपस्टीन को नाबालिगों से गलत काम करवाने का दोषी माना गया और उसे सेक्स अपराधी के रूप में दर्ज किया गया। बाद में उसने सरकारी वकीलों से समझौता कर लिया जिससे उसे ज्यादा जेल नहीं हुई।
करीब 11 साल बाद 2019 में उस पर फिर आरोप लगे कि वह नाबालिग लड़कियों का एक सेक्स नेटवर्क (ऐसा समूह या व्यवस्था जिसमें कुछ लोग मिलकर नाबालिग लड़कियों को बिना सहमति गलत काम के लिए इस्तेमाल करते हैं।) चला रहा था। उसे जेल में रखा गया और मुकदमे का इंतजार हो रहा था लेकिन उससे पहले ही उसकी मौत हो गई। सरकारी रिपोर्ट में इसे आत्महत्या बताया गया हालांकि इस पर कई सवाल उठे।
इन दोनों मामलों की जांच में बड़ी मात्रा में दस्तावेज और सबूत इकट्ठा किए गए। 2025 में अमेरिका के न्याय विभाग ने बताया कि एफबीआई के पास इस केस से जुड़ा 300 गीगाबाइट से ज्यादा डेटा है जिसमें लड़कियों की तस्वीरें और वीडियो भी शामिल हैं। लड़कियों की पहचान सुरक्षित रखने के लिए इन फाइलों को पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। इन्हीं दस्तावेजों को एपस्टीन फाइल्स कहा जाता है जो समय-समय पर जारी हो रही हैं। इस मामले में एपस्टीन की सहयोगी और पूर्व प्रेमिका Ghislaine Maxwell पर भी जांच हुई। साल 2021 में उसे दोषी ठहराया गया कि उसने एपस्टीन के साथ मिलकर लड़कियों का यौन व्यापार कराने में मदद की थी।
डोनाल्ड ट्रम्प और एपस्टीन के रिश्ते कैसे थे?
डोनाल्ड ट्रम्प और एपस्टीन के रिश्ते को लेकर कई बातें सामने आती रही हैं। पुराने रिकॉर्ड और तस्वीरों से पता चलता है कि दोनों एक ही तरह की पार्टियों और बड़े लोगों की बैठकों में साथ दिखते थे। 1990 के दशक में वे कई बार हाई-फाई पार्टियों में साथ नजर आए। यहां तक कि ट्रंप की शादी (मारला मैपल्स से) की तस्वीरों में भी एपस्टीन मौजूद था। पहले जारी दस्तावेजों में ट्रंप का नाम एपस्टीन की संपर्क सूची यानी ब्लैक बुक में मिला और फ्लाइट रिकॉर्ड से यह भी पता चला कि ट्रंप ने कुछ बार उसके निजी विमान से यात्रा की थी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार साल 2002 में ट्रंप ने एक इंटरव्यू में एपस्टीन को शानदार आदमी कहा था। बाद में खुद एपस्टीन ने दावा किया कि वह करीब दस साल तक ट्रंप का करीबी दोस्त रहा। इससे यह धारणा बनी कि दोनों के बीच लंबे समय तक दोस्ती रही थी और उनका सामाजिक दायरा भी लगभग एक जैसा था। हालांकि ट्रंप का कहना है कि एपस्टीन की पहली गिरफ्तारी से करीब दो साल पहले ही दोनों के बीच झगड़ा हो गया था। ट्रंप ने यह भी कहा है कि 2008 तक वह एपस्टीन को पसंद नहीं करते थे। व्हाइट हाउस की ओर से बताया गया कि एपस्टीन के गलत व्यवहार की वजह से उसे ट्रंप के क्लब से निकाल दिया गया था। वहीं वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों के बीच विवाद फ्लोरिडा में जमीन को लेकर हुआ था न कि किसी और वजह से। दूसरी ओर ट्रंप के मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (मागा) आंदोलन के कुछ समर्थक मानते हैं कि सरकार एपस्टीन की जिंदगी और उसकी मौत से जुड़े कई सच छिपा रही है।
डोनाल्ड ट्रम्प ने क्या कहा?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जेफरी एपस्टीन के मामले में कहा कि उनके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। ट्रंप ने दावा किया कि एपस्टिन नहीं चाहता था कि वे अमेरिका के राष्ट्रपति बनें इसलिए उनके खिलाफ काम किया।’एयर फ़ोर्स वन’ (संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति को ले जाने वाले किसी भी अमेरिकी वायु सेना के विमान का अधिकारिक कॉल साइन है) पर पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि एपस्टीन मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है और वे इस मामले में पूरी तरह पाक-साफ हैं।
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