चित्रकूट धाम मंडल बांदा को पूरी तरह अंदर तक झकझोर देने वाले बच्चों के यौन शोषण मामले में दोषी करार देते हुए 20 फरवरी को बांदा की विशेष पास्को अदालत ने निलंबित जूनियर इंजीनियर जेई रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई गई।
लेखन – गीता
अदालत का फैसला आते ही न केवल उनके परिवार में बल्कि पूरे इलाके में गहरी खामोशी सी छा गई है। इस खामोशी से ऐसा लगता है जैसे किसी ने परिवार के साथ-साथ समाज के भरोसे पर भी गहरा घाव किया हो। रिपोर्टिंग के दौरान इस घटना पर बातचीत करने वाले लोगों ने सुरक्षा के तौर पर अपना नाम और परिचय को गोपनीय रखने की शर्त पर बात की.
साधारण परिवार से उठकर सरकारी नौकरी तक का सपना
पड़ोसी व्यक्ति के अनुसार रामभवन मूल रूप से बांदा जिले की नरैनी तहसील अंतर्गत आने वाले खरौंच गांव का रहने वाला है। उसके पिता चुन्ना कारीगर सीमेंट के मंदिर, गमले, जाली और नांदा बनाते थे और भाई इलेक्ट्रिक संबंधित चीजें बनाने की दुकान किए थे। उसी से परिवार चलाता था। मेहनत कर हाथों की कमाई से घर में रोटी आती थी। उस समय घर की सुविधाएं सीमित थी लेकिन रामभवन के सपने सीमित नहीं थे। रामभवन तीन भाइयों में सबसे छोटा और पढ़ा-लिखा था। परिवार ने उम्मीद की थी कि वह सरकारी नौकरी पाकर घर की दिशा बदल देगा। जब उसे सिंचाई विभाग में नौकरी मिली तो परिवार की खुशी दुगनी हो गई। लोगों ने कहा अब घर की किस्मत बदल जाएगी।
2004 में उसकी शादी दुर्गावती से हुई थी। नौकरी लगने के कुछ सालों बाद परिवार व्यवस्थित हो गया। वह बताते हैं कि जिस तरह आज पेपर में उसके बारे में छपा है शुरुआत से ही रामभवन वैसा ही था। बच्चों को खिलाना -पिलाना और उनसे लपटना- झपटना करता रहता था। कोई ये नहीं समझता था कि किस नजर से ये इस तरह की हरकत करता है। कौन जानता था कि उसके भीतर इतनी घिनौनी हरकतें छिपी हैं।
रामभवन के करीबी लोगों के अनुसार उसके भीतर साधारण जीवन से ऊपर उठने की बहुत इच्छा थी। वह अक्सर बड़े सपने देखता था, करोड़पति बनने, नाम कमाने और तेजी से आगे बढ़ने के लिए लेकिन सपनों और लालच के बीच जो एक महीन रेखा होती है वो नहीं देखता था। सरकारी वेतन होने के बावजूद भी उसके भीतर ज्यादा धन पाने की चाह कम नहीं हुई। यही कारण है कि धीरे-धीरे वह गलत रास्ते पर निकल गया जो आज एक जिंदगी और मौत के दोहराहे पर खड़ा है, पत्नी के साथ।
एक व्यक्ति कहता है कि पहले उसकी पोस्टिंग महोबा में थी। वहां पर अर्जुन सहायक परियोजना के तहत बने बांधों की देखरेख करता था। उसी दौरान ही सुनने में आया है कि उसने बच्चों के शोषण की शुरुआत की थी। जब मामला खुलने की आहट मिली तो उसने 2009-10 के आस-पास अपना तबादला चिरकूट जिले के कर्वी के सिंचाई विभाग में करवा लिया था।
कर्वी में लंबे समय तक बच्चों के साथ यौन शोषण चलता रहा। सबसे पीड़ादायक बात तो यह रही कि इस अपराध में उसकी पत्नी भी साथ देती रही जिसने विश्वास, सुरक्षा और मासूमियत तीनों को एक साथ समाज में तोड़ कर रख दिया है। वह कहते हैं कि जांच में जो बातें सामने आई हैं वह किसी भी व्यक्ति को विचलित करने के लिए काफी हैं।
एक वकील कहते हैं कि मामले का दायरा तब और गंभीर हो गया जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचना साझा होने के बाद विदेशी जांच एजेंसी “इंटरपोल” (अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन) दुनिया का सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय पुलिस संगठन है, जो 195 सदस्य देशों की पुलिस के बीच सहयोग को सुगम बनाता है। यह खुद सीधे जांच या गिरफ्तारी नहीं करता, बल्कि सदस्य देशों को अपराधी का पता लगाने, सूचना साझा करने और रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने में सहायता करता है) सक्रिय हुईं। इसके बाद केंद्रीय एजेंसियों ने कार्रवाई की और गहराई के साथ जांच शुरू हुई। साल 2020 में केन्द्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) की जांच से लैपटॉप, पैन ड्राइव, मोबाइल, कैमरा जैसे कई डिजिटल साक्ष्य और अन्य प्रमाण सामने आए। तब इसका खुलासा हुआ। उसी समय से दोनों पति-पत्नी जेल में थे।
एक व्यक्ति ने बताया कि रामभवन की पत्नी की ये गलती है कि वह बच्चों को फुसलाकर बुलाती थी और जब रामभवन उनके साथ गलत काम करता था और बच्चे रोते-चिल्लाते थे तो वह बाहर से दरवाजा बंद करके निकल जाती थी। जबकि उनको अपने पति को ये घिनौना काम करने से रोकना चाहिए था। इतना ही नहीं, यह भी सुनने को मिला है कि रामभवन जब घर के अंदर अलग-अलग जगह (कहीं बेंड रुम, स्टोर रुम और बाथरूम में) बच्चों का यौन शोषण करता था तब कैमरा और मोबाइल से उसकी पत्नी फोटो और वीडियो भी बनाती थी। जब एक वकील कहता है कि छोटे बच्चे खाने-पीने के लालाइत होते ही हैं तो रामभवन बच्चों की ये मानसिकता समझता था और लगभग 4 से 15 साल तक के बच्चों के बीच उसी का फायदा उठाता था। बच्चों को महंगी चाकलेट खिलाना, मिठाई खिलाना, मोबाइल देना, गेम खिलाना और भी महंगे- महंगे सामान देकर और उनके मां-बाप को अपने विभाग से जुड़े नहरो में हो रहे काम दिलाने के दिलासे से फंसाया था। उनके हिसाब से कोर्ट ने जो फैसला सुनाया है वो बहुत अच्छा निर्णय है।
गलत काम से बनाई करोड़ों की संपत्ति
एक और वकील ने बताया कि करोड़ों की संपत्ति है उसके पास जो रामभवन ने गलत तरीके से कमाई है। 2020 में अपने पद से निकलंबित होकर जेल जाने के कुछ साल बाद उसने अपने भाई राजा भैया के नाम एक लेटर लिखकर जेलर के माध्यम से भेजा था। जिसमें यह लिखा था कि -” मैंने अपने बैंक अकाउंट का एक्सेस अपने भाई राजा भैया को देता हूं क्योंकि उसको पता था कि बहुत पैसा खर्च होने वाला है।” इसके बाद नरैनी से कुछ कागज वगैरह बन कर गये थे। तब से उसके भाई ने काफी पैसा खर्च किया इस मामले में और फिर पिछले साल ज़मानत से रामभवन की पत्नी दुर्गावती को जमानत से बरी कर दिया गया था।
एक महिला कहती हैं कि रामभवन की मां बहुत ही खुश मिजाज और गाने-बजाने वाली महिला थी लेकिन जब से इस तरह का मामला हुआ तब से बिल्कुल गुमसुम शांत रहने लगी हैं। कहते हैं न कि बच्चे कैसे भी हों, मां को तो सभी प्यारे होते हैं लेकिन बेटा, बहू के इस कारनामे ने मां को पूरी तरह से तोड दिया है। परिवार इस चीज को एक्सेप्ट ही नहीं कर पा रहा लेकिन जिन बच्चों के साथ यौन शोषण हुआ है उनका तो पूरा भविष्य बिगड़ गया। बड़े होकर वो क्यों सोचेंगे और कैसे इस सदमे से उभर पाएंगे उनका और उनके परिवार का दर्द कौन बांटेगा।
रामभवन के दूर के रिश्तेदार कहते हैं कि वह रामभवन को करीब से जानते हैं। अच्छी खासी नौकरी पाने के बावजूद भी उसने यौन शोषण कर वीडियो बनाकर यहां तक कि बच्चों को बेचने का काम भी सुनने में मिला है कि विदेश में बेचता था। उसकी सेटिंग विदेश में था फिलहाल दोषी करार दे दिया गया है और अदालत को पता है कि वह हाई कोर्ट जा सकते हैं। अब एक महीने में अगर हाई कोर्ट से कुछ फैसला बदल जाए तो भले ही फांसी रुक जाए वरना उनकी फांसी तय है। रामभवन ने नौकरी के अलावा इस काली कमाई से बहुत संपत्ति और बैंक बैलेंस बनाया है। नरैनी में मकान है और बांदा में भी मकान बन रहा है। अब ये बड़े स्तर का मामला है जो भी होगा ठीक है।
एक और वकील कहते हैं कि कोर्ट ने तो फैसला सुनाया है पर इसमें एक महीने का समय भी होता है। वह अपने अनुभव से बता रहे हैं कि वो लोग हाईकोर्ट भी जा सकते हैं। हो सकता है कि हाईकोर्ट से महिला की फांसी की सजा को बदलकर आजीवन कारावास में कर दिया जाए। खैर.. ये कोर्ट का मामला है और जांच का विषय भी। अभी भी जांच जारी है। बांदा जिले के इतिहास में ये पहला मामला होगा जहां पर इस घिनौने काम में साथ देने के जुल्म में महिला को फांसी की सजा सुनाई गई है। वह बताते हैं कि सजा के साथ-साथ रामभवन के ऊपर साढ़े छः लाख और उसकी पत्नी दुर्गावती के ऊपर साढ़े पांच लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। ऐसा भी सुनने में आया है कि उसके भाई राजा भैया ने कहा है कि वह हाई कोर्ट में अपील करेंगे और फांसी की सजा को हटाने की मांग करेंगे क्योकि उसके भाई रामभवन और भाभी दुर्गावती को साजिशन फंसाया गया है।
यह घटना हम सबके लिए एक सीख भी है। अक्सर हम अपने आसपास हो रही चीजों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। बच्चों को यह सिखाना जरूरी है कि कौन सा व्यवहार गलत है। अगर कोई उन्हें असहज महसूस कराए, तो वे खुलकर अपने माता-पिता या शिक्षक को बताएं।
बांदा जिले में लोग कह रहे हैं कि यह शायद पहला मामला है, जिसमें पति-पत्नी दोनों को इतने बड़े अपराध में फांसी की सजा मिली है। फैसले ने साफ संदेश दिया है कि बच्चों के खिलाफ अपराध बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
फिलहाल पूरे इलाके में यही चर्चा है—एक साधारण परिवार से निकला व्यक्ति कैसे इतनी बड़ी हैवानियत तक पहुंच गया? और कैसे एक घर, जो सुरक्षित जगह होना चाहिए था, बच्चों के लिए डर का कारण बन गया?
अंत में यही कहा जा सकता है कि कानून अपना काम कर रहा है। आगे की अदालतों में क्या फैसला होगा, यह समय बताएगा। लेकिन इस घटना ने समाज को आईना जरूर दिखाया है। बच्चों की सुरक्षा सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं, हम सबकी है। अगर हम सच में बदलाव चाहते हैं, तो हमें अपने घर और आसपास से ही शुरुआत करनी होगी।
बांदा अपर एसपी का बयान
बांदा अपर एसपी शिव राज का कहना है कि बांदा जनपद के विशेष न्यायाधीश पास्को एक्ट के द्वारा रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती (जो नरैनी के रहने वाले हैं) को मृत्यु दण्ड की सजा सुनाई गई है। साथ ही 11 लाख पचासी हजार का जुर्माना लगा कर दंडित किया गया है। प्रकरण इस प्रकार है कि अक्टूबर 2020 में सीबीआई को साइबर सर्विलांस के तहत बांदा चित्रकूट से साइबर फोटोग्राफी और बच्चों के साथ यौन शोषण का कृत्य किए जाने की जानकारी मिली थी। सीबीआई के द्वारा नई दिल्ली में इसका अभियोग पंजीकृत किया गया था। अपर पुलिस अधीक्षक स्तर से इसकी विवेचना की गई थी। विवेचना के दौरान विवेचक ने जो बच्चे थे उन सभी का एम्स नई दिल्ली में चिकित्सा परीक्षण कराया गया था। परीक्षण में बच्चों के यौनिक हिंसा की चोटें पाई गई थी जो वीडिय अश्लील काम करते हुए बनाए गए थे उनको भी कब्जे में लिया गया था। पर्याप्त साक्ष्य संलग्न करते हुए पत्र दाखिल किया गया था। विचारक के दौरान सीबीआई के जो अभियोजक थे वो और विशेष लोक अभियोजक बांदा पास्को कोर्ट के थे उनके द्धारा 70 से अधिक गवाहों को पेश किया गया था। इसके बाद जो विवेचना के दौरान साक्ष्य संलग्न किए गए थे वो सही पाए गए थे तब ये सजा सुनाई गई है। चाइल्ड पोर्नोग्राफी को अपने देश से रोकने में प्रभावी है। साथ ही पीड़ित बच्चों की देखरेख के लिए केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा 10-10 लाख का मुआवजा दिया जाएगा। यह राशि इन बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने, उनकी शिक्षा, चिकित्सा और सामान्य जीवन जीने में सहायता करने के उद्देश्य से दी जाएगी।
#bandapolice दिनांक 20.02.2026 को pocso एक्ट के एक अत्यंत गंभीर, संवेदनशील एवं समाज को झकझोर देने वाले मामले में मा0 न्यायालय द्वारा अभियुक्त पति-पत्नी को मृत्युदंड व 11 लाख 85 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई गई। इस सम्बन्ध में वीडियो बाइट अपर पुलिस अधीक्षक बाँदा श्री शिवराज pic.twitter.com/FfPSdHMXUt
— Banda Police (@bandapolice) February 21, 2026
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