प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुए समझौते के बाद अब अमेरिका में भारतीय सामानों पर टैक्स 50% से घटकर सिर्फ 18% रह जाएगा। इसके बदले में भारत अब रूस के बजाय अमेरिका से तेल और अन्य जरूरी सामान खरीदने पर सहमत हो गया है।
लेखन – हिंदुजा
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर चल रही पुरानी तनातनी अब खत्म होने की ओर है। बीते कल सोमवार (2 फरवरी 2026) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद एक बड़ा फैसला लिया गया है।
Wonderful to speak with my dear friend President Trump today. Delighted that Made in India products will now have a reduced tariff of 18%. Big thanks to President Trump on behalf of the 1.4 billion people of India for this wonderful announcement.
When two large economies and the…
— Narendra Modi (@narendramodi) February 2, 2026
क्या हुआ है? (मुख्य फैसला)
अमेरिका ने भारत से आने वाले सामानों पर लगने वाले भारी टैक्स (टैरिफ) को घटाने का फैसला किया है। पिछले साल अगस्त में ट्रंप सरकार ने भारतीय सामानों पर 50% तक का भारी टैक्स लगा दिया था। अब इसे घटाकर सिर्फ 18% कर दिया गया है।
क्यों हुआ यह बदलाव?
दरअसल, अमेरिका इस बात से नाराज था कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है। इस वजह से उसने भारतीय सामानों पर जुर्माना (पेनल्टी) के तौर पर ज्यादा टैक्स लगा दिया था। अब समझौते के तहत: भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद करने या कम करने पर सहमति जताई है। इसके बदले भारत अब अमेरिका और वेनेजुएला जैसे देशों से तेल और गैस खरीदेगा। भारत ने वादा किया है कि वह अमेरिका से करीब $500 अरब (लगभग 42 लाख करोड़ रुपये) का सामान जैसे तेल, खेती का सामान, कोयला और नई तकनीक खरीदेगा।
सरकार हमेशा कहती रही है कि भारत अपनी जरूरत के हिसाब से कहीं से भी तेल खरीद सकता है और इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए। लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप का ताजा बयान भारत सरकार की इस बात से अलग है।
दरअसल, पिछले साल यानी अगस्त 2025 में जब अमेरिका ने भारत पर 25% का अतिरिक्त टैक्स लगाया था, तब भारत के विदेश मंत्रालय ने इसका कड़ा विरोध किया था। भारत ने कहा था कि हम रूस से तेल अपनी जनता की सुविधा और बाजार के भाव देखकर खरीदते हैं, इसमें अमेरिका को दखल नहीं देना चाहिए।
हालांकि सरकार कहती रही कि वह किसी के दबाव में नहीं है, लेकिन आंकड़े कुछ और ही बता रहे हैं। अक्टूबर 2025 से ही भारत की कंपनियों ने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया था। द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर तक आते-आते रूस से आने वाले तेल में 29% से 38% तक की बड़ी गिरावट देखी गई। और 6 जनवरी 2026 को भारत की सबसे बड़ी कंपनी ‘रिलायंस’ ने साफ कह दिया कि उसने जनवरी में रूस से एक बूंद भी तेल नहीं मंगाया है।
इससे भारत को क्या फायदा होगा?
सामान बेचना आसान: अब भारत में बनी चीज़ें (जैसे कपड़े, जूते, गहने और दवाइयां) अमेरिका के बाजारों में सस्ती मिलेंगी। इससे हमारे देश के निर्यातकों (Exporters) को फायदा होगा और फैक्ट्रियों में काम बढ़ेगा।
रुपये की मजबूती: इस खबर के आते ही डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया मजबूत हुआ है। मंगलवार सुबह रुपया करीब 90.15 के स्तर पर आ गया, जो पहले 91 के पार चल रहा था। रुपया मजबूत होने से विदेश से आने वाली चीजें सस्ती हो सकती हैं।
व्यापारियों में खुशी: खास तौर पर कपड़ा उद्योग (Textile) से जुड़े लोग बहुत खुश हैं क्योंकि अमेरिका उनका सबसे बड़ा बाजार है।
विपक्ष का क्या कहना है?
जहाँ सरकार इसे बड़ी जीत बता रही है, वहीं कांग्रेस पार्टी ने इसकी आलोचना की है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि ऐसा लगता है जैसे मोदी जी ने ट्रंप की शर्तों के आगे घुटने टेक दिए हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार को इस समझौते की पूरी जानकारी संसद में देनी चाहिए।
विदेश मंत्री का अमेरिका दौरा
इसी बीच हमारे विदेश मंत्री एस. जयशंकर 2 से 4 फरवरी तक अमेरिका के दौरे पर हैं। वे वहां खनिज (Critical Minerals) और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अमेरिकी अधिकारियों से बात कर रहे हैं। इस दौरे से दोनों देशों के बीच भविष्य के रिश्तों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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