गुजरात के अहमदाबाद में तो यह नाश्ता हर गली-चौराहे पर मिलता है और आज के समय में यह सिर्फ एक व्यंजन नहीं बल्कि तारक मेहता के उल्टा चश्मा में जेठालाल का किरदार निभाने वाले एक्टर के वजह से यह एक गुजराती पहचान भी बना चुका है।
लेखन – गीता
दोस्तो हमारा भारत अलग-अलग विविधताओं से भरा देश है, जहां हर राज्य के खान-पान कि एक अलग संस्कृति और पहचान होती है। उन्हीं में से एक है गुजरात। अगर गुजरात की बात की जाए तो यहां का नाम सुनते ही मन में ढोकला, खांडवी, थेपला और खासकर जलेबी-फाफड़ा का स्वाद याद आ जाता है। गुजरात के अहमदाबाद में तो यह नाश्ता हर गली-चौराहे पर मिलता है और आज के समय में यह सिर्फ एक व्यंजन नहीं बल्कि तारक मेहता के उल्टा चश्मा में जेठालाल का किरदार निभाने वाले एक्टर के वजह से यह एक गुजराती पहचान भी बना चुका है।
जलेबी-फाफड़ा क्यों खास है
लेबी और फाफड़ा मीठे और नमकीन का एक मजेदार मिश्रण है, क्योंकि फाफड़ा बेसन से बना पतला, कुरकुरा और हल्का नमकीन होता है और जलेबी मैदा और चीनी के चाशनी से बनी कुरकुरी गोल आकार की मिठाई होती है। जब ये दोनों साथ खाए जाते हैं, तो नमकीन फाफड़े और मीठी जलेबी की रसीली मिठास मिलकर स्वाद को और भी खास बना देते हैं। यही कारण है कि अहमदाबाद में हर सुबह लोग जलेबी-फाफड़ा खाने के लिए दुकानों पर लंबी कतारें लगाते हैं।
जून के महीने में मुझे अहमदाबाद जाने का मौका मिला। वहां का नाम सुनते ही मैं खुशी से झूम उठी। मन में डर था फ्लाइट से जाने का क्योंकि वहीं पर फ्लाइट हादसा हुआ था,पर वहां जाकर जलेबी फाफड़ा खाने की खुशी भी थी। क्योंकि मैंने सीरिया ताजे जलेबी फाफड़ा की खुशबू और खाने के मज़े के बारे में बहुत सुना था। टीवी सीरियल तारक मेहता का उल्टा चश्मा में क्योंकि शो का मुख्य किरदार निभाने वाले जेठालाल अक्सर जलेबी-फाफड़ा खाने की ज़िद करता है और यह डायलाग्स का मज़ेदार हिस्सा बन जाता है। शो देखने के बाद न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश के लोग इसे चखने की इच्छा मेरे हिसाब से रखते ही होंगे जैसे मैं रखती हूं।
मैं वहां गई और एक हफ्ते तक रही यह रोज अपनी रुम में अंकिता से मैं जलेबी-फाफड़ा के बेमिसाल स्वाद को लेकर बात करती पर खाने का मौका नहीं मिलता था। वर्कशॉप के लास्ट दिन मैं वहां के लोकल के लोगों से जो कार्यक्रम में आये थे उनसे कहा की हम आपके शहर में आए हैं और आपके यहां का जलेबी फाफड़ा इतना फेमस है पर आप लोग हमें खिलाने नहीं ले जा रहे हैं। तब कच्छ जिले के पर्वत नाम के व्यक्ति जो कार्यक्रम में आए थे उन्होंने कहा चलो आज हम आपको ले चलते हैं। वह अहमदाबाद के पुराने शहर जहां पर जलेबी फाफड़ा की दुकानें सजी रहती हैं वहां लेकर गए वहां पर मैंने गरम-गरम जलेबी फाफड़ा और पपीते के छिलके का सब्जी साथ ही कढ़ी जिसको हमारे यहां कहते हैं उस चटनी के साथ खाया क्या स्वाद था मज़ा आ गया और आज भी मेरे जुबान पर वहां का स्वाद है।
पर यह तला हुआ व्यंजन है। इसलिए इसे रोज़ाना न खाकर खास मौकों पर या सप्ताह में एक बार ही खाना बेहतर होता है। फिर भी अगर अहमदाबाद के लोगों से बात कि जाए तो वह लोग मानते हैं जलेबी-फाफड़ा के बिना जिंदगी का स्वाद अधूरा है।
कछ जिले के पर्वत कहते हैं कि गुजरात,अहमदाबाद का जलेबी-फाफड़ा सिर्फ एक नाश्ता नहीं है बल्कि यहां कि एक संस्कृति और परंपरा है। यह स्वाद, खुशबू और आनंद का ऐसा मेल है, जिसने पूरे देश को अपना दीवाना बना लिया है। चाहे आप अहमदाबाद के निवासी हों या किसी और शहर से आए पर्यटक हो एक बार यहां आकर गरमा-गरम फाफड़ा-जलेबी का स्वाद ज़रूर लेते हैं।

