यूपी के बहराइच ( Bahraich) में एक कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी (Pundreek Goswami) को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा परेड और सलामी (Guard of Honour) का वीडियो सामने आया है। वीडियो के सामने आते ही इस पर विवाद छिड़ गया है। विपक्षी नेताओं ने एक निजी धार्मिक व्यक्ति को राजकीय सलामी देने पर सवाल उठाया है। इसके साथ ही इसे संविधान के विरुद्ध और संविधान पर हमला बताया। वहीं मामले को बढ़ता देख अब डीजीपी ने जिला पुलिस अधीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा है।
कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को सलामी देने का वायरल वीडियो
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को आप देखिये। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कितने शानदार तरीके से कथावाचक (religious preacher) कार से उतरते और रेड कारपेट पर चलते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में एसपी राम नायम सिंह परेड की अगुवाई खुद करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वायरल वीडियो इसी साल के नवंबर महीने का बताया जा रहा है।
बहराइच पुलिस ने रचा इतिहास कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को पुलिस अधीक्षक RN ने दिया पूरी परेड का गार्ड ऑफ़ ऑनर बाकायदा वीडियो बनाकर वाइरल भी किया गया, विपक्ष उठा रहा सवाल #Bahraich pic.twitter.com/sTumqwJ8W5
— Barabanki News (@BBKNews) December 18, 2025
‘गार्ड ऑफ ऑनर’ क्या होता है और किसे दिया जाता है?
‘गार्ड ऑफ ऑनर’ सरकार और राज्य की शक्ति का एक औपचारिक सम्मान होता है। यह बहुत सख्त नियमों के तहत दिया जाता है। इसमें पुलिस या सशस्त्र बलों की परेड और सलामी शामिल होती है। यह सम्मान किसी की लोकप्रियता, धार्मिक पहचान या लोगों की भावनाओं के कारण नहीं दिया जाता। रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय और पुलिस के नियमों के अनुसार, यह सम्मान केवल बहुत बड़े और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को ही दिया जाता है, जैसे राष्ट्रपति, राज्यपाल या अन्य उच्च अधिकारी।
एसपी राम नायम सिंह से माँगा जवाब
सोशल मीडिया पर तेजी से फैले इस वीडियो ने कई सवाल खड़े किये जिसकी वजह से डीजीपी राजीव कृष्णा ने बहराइच एसपी राम नायम सिंह से स्पष्टीकरण मांगा। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस परेड ग्राउंड केवल पुलिस प्रशिक्षण, अनुशासन और आधिकारिक रूप से स्वीकृत समारोहों के लिए होता है। यूपी पुलिस ने कहा कि इन नियमों का किसी भी प्रकार का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने गुरुवार 18 दिसंबर की शाम X पर पोस्ट के माध्यम से यह जानकारी दी।
जनपद बहराइच में आयोजित एक कार्यक्रम में पुलिस परेड ग्राउंड के अनधिकृत उपयोग का पुलिस महानिदेशक महोदय द्वारा संज्ञान लिया गया है।
पुलिस परेड ग्राउंड का उपयोग केवल पुलिस प्रशिक्षण, अनुशासन एवं आधिकारिक समारोहों हेतु निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाना अनिवार्य है।
निर्धारित मानकों…— UP POLICE (@Uppolice) December 18, 2025
कथावाचक को सालमी दिए जाने पर विपक्ष की टिप्पणी
इस मामले पर अब राजनीति शुरू हो गई है। इस तरह से एक धार्मिक कथावाचक को परेड और सलामी देने की आलोचना की गई ,समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि “जब पूरा पुलिस महकमा सलामी में व्यस्त रहेगा तो प्रदेश का अपराधी मस्त रहेगा। उप्र में पुलिस अपने काम में तो नाकाम है, उसका जो काम है वो तो कर नहीं रही है बल्कि अपनी सीमित क्षमताओं को और जगह व्यर्थ कर रही है।
भाजपा राज में उप्र में पनप रहे बेतहाशा अपराध और माफ़िया राज पर लगाम लगाने की बजाय सलाम-सलाम का खेल खेला जा रहा है।”
जब पूरा पुलिस महकमा सलामी में व्यस्त रहेगा तो प्रदेश का अपराधी मस्त रहेगा। उप्र में पुलिस अपने काम में तो नाकाम है, उसका जो काम है वो तो कर नहीं रही है बल्कि अपनी सीमित क्षमताओं को और जगह व्यर्थ कर रही है।
भाजपा राज में उप्र में पनप रहे बेतहाशा अपराध और माफ़िया राज पर लगाम… pic.twitter.com/MBxei5liXB
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) December 18, 2025
आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद ने भी इस मामले पर पोस्ट करते हुए लिखा “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तथाकथित रामराज्य में अब हालात ये हैं कि—आस्था को संविधान से ऊपर,धर्म को कानून से ऊपर और कथावाचकों को संवैधानिक पदों से ऊपर बैठाया जा रहा है।
भारत कोई मठ नहीं, बल्कि एक संवैधानिक गणराज्य है। और राज्य किसी धर्म-विशेष की जागीर नहीं।
इस स्पष्ट उल्लेख के बावजूद एक कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा परेड और सलामी (Guard of Honour) दी जाती है—यह सिर्फ़ एक प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि संविधान पर खुला हमला… pic.twitter.com/I3IiHeD73t
— Chandra Shekhar Aazad (@BhimArmyChief) December 18, 2025
यह घटना बताती है कि उत्तर प्रदेश का प्रशासन अब संविधान के प्रति जवाबदेह नहीं, बल्कि धार्मिक सत्ता के आगे नतमस्तक है। यह एक ख़तरनाक परंपरा की ओर इशारा करता है, जहाँ राज्य धीरे-धीरे अपने संवैधानिक चरित्र को त्याग रहा है।”
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