खबर लहरिया Blog गुलाम नबी आजाद ने अपनी नई पार्टी का नाम रखा ‘डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी’, जानें क्या है पार्टी की विचारधारा

गुलाम नबी आजाद ने अपनी नई पार्टी का नाम रखा ‘डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी’, जानें क्या है पार्टी की विचारधारा

गुलाम नबी आजाद ने जम्मू में प्रेसवर्ता में कहा कि उनकी नई पार्टी के लिए लगभग 1,500 नाम उर्दू, संस्कृत में भेजे गए थे। हिन्दी और उर्दू का मिश्रण ‘हिन्दुस्तानी’ है।

                                                                                                    गुलाम नबी आजाद  (फोटो साभार – लाइव मिनट)

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री रहे गुलाम नबी आजाद ने अपनी नई पार्टी के नाम की घोषणा कर दी है। उनकी नई पार्टी का नाम ‘डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी’ है। जम्मू में प्रेसवार्ता कर उन्होंने अपनी पार्टी के नाम की घोषणा की है।

वह तीन दिवसीय दौरे पर रविवार को जम्मू आए हैं। 25 और 26 सितंबर को जम्मू में और 27 सितंबर को वह श्रीनगर में रुकेंगे। इसके बाद वह दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे। बता दें, इस साल 26 अगस्त को गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस पार्टी से अपना इस्तीफ़ा दे दिया था।

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पार्टी के नाम के लिए भेजे गए थे कई नाम

गुलाम नबी आजाद ने जम्मू में प्रेसवर्ता में कहा कि उनकी नई पार्टी के लिए लगभग 1,500 नाम उर्दू, संस्कृत में भेजे गए थे। हिन्दी और उर्दू का मिश्रण ‘हिन्दुस्तानी’ है। वे चाहते हैं कि नाम लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और स्वतंत्र हो।

पार्टी की विचारधारा उनके नाम की तरह होगी – आजाद

अमर उजाला की प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया कि गुलाम नबी आजाद कह चुके हैं कि पार्टी की विचारधारा उनके नाम की तरह होगी। इसमें सभी धर्मनिरपेक्ष के लोग शामिल हो सकते हैं। बता दें, प्रदेश कांग्रेस कमेटी जम्मू-कश्मीर के अधिकतर वरिष्ठ नेता पार्टी को छोड़कर आजाद के समर्थन में आ चुके हैं।

इसके साथ ही वह पार्टी का एजेंडा भी पहले ही साफ़ कर चुके हैं। इसमें जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करना, भूमि व नौकरियों के अधिकार स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षित करने के लिए संघर्ष ज़ारी रखना आदि शामिल है।

गुलाम नबी आजाद का राजनीतिक सफर

इस साल मार्च 2022 में गुलाम नबी आजाद को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों से पद्मभूषण की उपाधि से सम्मानित किया गया था। 1973 में उन्होंने डोडा जिले के भलेसा ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के सचिव के रूप में अपने राजनीति की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्हें युवा कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया।

उन्होंने महाराष्ट्र से 1980 में पहला संसदीय चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। 1982 में उन्हें केंद्रीय मंत्री के रूप में कैबिनेट में शामिल किया गया। डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली दूसरी यूपीए सरकार में आजाद ने देश के स्वास्थ्य मंत्री का पदभार संभाला था।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन का विस्तार किया। साथ ही झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले शहरी गरीबों की सेवा के लिए एक राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन भी शुरू किया। आजाद ने कई महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले हैं। नरसिंह राव की सरकार में संसदीय कार्य और नागरिक उड्डयन मंत्री भी रहे।

जब आजाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री थे

साल 2005 का समय गुलाम नबी आजाद के राजनीतिक जीवन का सबसे सुनहरा युग है। इस दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला। आजाद के जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष रहते हुए कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों में 21 सीटों पर जीत हासिल की थी। इसका परिणाम यह हुआ कि कांग्रेस प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी। वहीं 2008 में अमरनाथ भूमि आंदोलन के चलते उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

आज़ाद, अपने पूरे जीवनकाल में एक दिग्गज नेता रहें हैं। अपनी पार्टी के नाम की घोषणा के साथ उन्होंने अपनी विचारधारा और अपने काम को भी साफ़ कर दिया है। इसके साथ ही उन्हें कई नेताओं का साथ भी मिल रहा है पर यहां जो सवाल है वह यह है कि जनता का आज़ाद की नई पार्टी और उनकी विचारधाराओं को लेकर क्या सोचना है। वह इस नई पार्टी पर कितना विश्वास कर पाती है। पार्टी के बीच किस तरह का सामंजस्य होगा। किसे कौन-सा कार्यभार संभालने के लिए दिया जाएगा। पार्टी में कौन-से नेता आज़ाद की पार्टी के प्रभुत्व को बढ़ाने का काम करेंगे।

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