खेतों में आग लगने की बढ़ती घटनाओं से किसानों की खड़ी फसल पलभर में जलकर राख हो रही है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में किसान “मुख्यमंत्री खेत खलिहान दुर्घटना सहायता योजना” के तहत मुआवजे के लिए आवेदन कर सकते हैं, हालांकि रोकथाम के उपाय अब भी बड़ी जरूरत बने हुए हैं।
वर्तमान में मौसम में तेजी से हो रहे। इस मौसम बदलाव खासकर जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ता है। कभी बारिश, कभी ओलावृष्टि तो कभी तूफान, इन सबकी मार सीधे किसानों और फसलों पर पड़ती है।
रबी फसल के मौसम में सबसे ज्यादा गेहूं की खेती होती है और इस समय उसकी कटाई भी चल रही होती है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर गेहूं उगाया जाता है लेकिन इसी दौरान कई बार छोटी सी चिंगारी या शॉर्ट सर्किट की वजह से पूरी तैयार फसल कुछ ही मिनटों में जलकर राख हो जाती है। ऐसे हादसों में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। दिक्कत ये है कि आग से हुए नुकसान को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल नहीं किया गया है इसलिए उन्हें वहां से कोई मदद नहीं मिल पाती।
दरअसल हालही में उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के मुंगुस गांव में 9 अप्रैल 2026 को शाम करीब 4 बजे भीषण आग लगने से किसानों की खड़ी गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। ग्रामीणों के मुताबिक खेतों के पास से गुजर रही बिजली लाइन में शॉर्ट सर्किट हुआ और तार गिरने से आग भड़क गई। तेज हवा के चलते आग ने कुछ ही समय में विकराल रूप ले लिया और करीब 25 से 30 बीघा फसल इसकी चपेट में आ गई।
इस घटना पर जानकारी देते हुए शैलेंद्र संजू मिश्रा ने बताया कि उनके लगभग पांच बीघा गेहूं की फसल जल गई। वहीं इस आग में कम से कम तीन किसानों की खड़ी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। गया चरण मिश्रा के अनुसार उनके करीब 15 बीघा गेहूं की फसल भी आग की चपेट में आकर राख हो गई। उन्होंने दुख जताते हुए कहा “अब हमारे पास सालभर के लिए खाने-पीने तक कुछ नहीं बचा है।”
फायर ब्रिगेड पर देरी का आरोप
आग लगने के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने तुरंत फायर ब्रिगेड और पुलिस को सूचना दी लेकिन आरोप है कि दमकल समय पर नहीं पहुंची जिससे नुकसान और बढ़ गया। हालात बिगड़ते देख गांव के लोग खुद ही आग बुझाने में जुट गए। बाल्टियों, पानी के टैंकर और स्थानीय संसाधनों की मदद से किसी तरह आग पर काबू पाया गया लेकिन तब तक कई किसानों की पूरी फसल जल चुकी थी।
इस हादसे में रामराज, चंद्रशेखर और गयाचंद्र समेत कई किसानों को भारी नुकसान हुआ है। किसान चरण मिश्रा का 15 बीघा खड़े गेहूं की फसल पूरी की पूरी जल गई। चंद्रशेखर का पांच बीघा गेहूं फसल जल कर आधा हो गया है। किसानों का कहना है कि उनकी सालभर की मेहनत एक झटके में खत्म हो गई और अब उनके सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
गांव के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित किसानों को जल्द मुआवजा दिया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बिजली लाइनों की ठीक से जांच और मरम्मत कराई जाए। प्रशासन ने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
ठीक ऐसे ही उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगर जिले के अकबरपुर ब्लॉक के भगवानपुर महाए गांव में 4 अप्रैल 2026 को दोपहर करीब 2 बजे अचानक खेतों में आग लग गई। इस आग में करीब 20 से ज्यादा किसानों की लगभग 25 बीघा गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। ऐसे हालात में किसान मुख्यमंत्री खेत खलिहान दुर्घटना सहायता योजना के तहत मदद के लिए आवेदन कर सकते हैं जिसमें घटना के 15 दिन के भीतर पोर्टल पर आवेदन करना जरूरी होता है।
किसानों का दर्द, “सब कुछ जलकर राख हो गया”
आग की इस घटना ने कई परिवारों को गहरी मुसीबत में डाल दिया है। अम्बेडकर नगर की रहने वाली रोशनी (पढ़ाई करती छात्रा) बताती हैं कि उनकी डेढ़ बीघा जमीन पर खड़ी पूरी फसल जल गई। उनका कहना है कि घर का खर्च और हमारी पढ़ाई सब इसी खेती पर निर्भर था। वे कहती हैं “हम चार भाई-बहन हैं और हमारी सारी उम्मीद इसी फसल से थी अब सब खत्म हो गया।” उनका आरोप है कि जितना नुकसान हुआ है उसे कम दिखाया जा रहा है और वे बस इतना चाहती हैं कि सही मुआवजा मिले।
वहीं रामदेव बताते हैं कि इलाके में 35 – 40 बीघा तक फसल आग की चपेट में आई है। उनकी खुद की दो से ढाई बीघा फसल जल गई। घटना के बाद लेखपाल, मंडी कर्मचारी और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंचे और सर्वे किया गया। सावित्री कहती हैं कि उनके पास थोड़ी सी जमीन थी जिसमें लगा पूरा गेहूं जल गया। वे कहती हैं “घर में पांच लोग हैं अब समझ नहीं आ रहा कि जिंदगी कैसे चलेगी।” उनके पास तीन जानवर भी हैं जिनकी देखभाल अब और मुश्किल हो सकती है।
वहीं गांव के प्रधान सुखराम राजभर के मुताबिक करीब 22 किसानों की फसल इस आग में बर्बाद हुई है। घटना की जानकारी तुरंत प्रशासन को दी गई और रिपोर्ट बनाकर भेज दी गई है। अब किसानों को उम्मीद है कि प्रशासन की तरफ से जल्द ही मदद और मुआवजा मिलेगा ताकि वे इस नुकसान से थोड़ा उबर सकें। उन्होंने बताया स्थिति का जायज़ा लेने थाना प्रभारी लेखपाल सभी आए थे। उनका कहना है अब प्रशासन के तरफ से मदद या मुआवजा देने का प्रयास किया जाएगा।
सरकार द्वारा क्या नियम बनाया गया है?
किसानों को इस नुकसान से बचाने के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की है जिसके तहत प्राकृतिक आपदाओं से फसल खराब होने पर मुआवजा मिलता है लेकिन इस योजना में आग लगने से होने वाले नुकसान को शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में अगर खेत में आग लग जाए तो किसान को कोई बीमा राहत नहीं मिलती और उसे पूरा नुकसान खुद ही उठाना पड़ता है।
इन समस्या को ध्यान में रखते हुए “मुख्यमंत्री खेत खलिहान दुर्घटना सहायता योजना” शुरू की गई है। इस योजना के तहत यदि किसान के खेत में शॉर्ट सर्किट से आग लग जाती है तो इस योजना के माध्यम से हानि की भरपाई की जा सकती है ।
योजना के तहत आग लगने से फसल के भरपाई के नियम
उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री खेत खलिहान दुर्घटना सहायता योजना में आग से फसल खराब होने पर किसानों को जमीन के हिसाब से मुआवजा दिया जाता है। जिन किसानों के पास 2.5 एकड़ से कम जमीन है उन्हें करीब 15 हजार रुपये मिलते हैं। 2.5 से 5 एकड़ तक जमीन होने पर 20 हजार रुपये और 5 एकड़ से ज्यादा जमीन वाले किसानों को 30 हजार रुपये तक की मदद दी जाती है। अगर नुकसान ज्यादा बड़ा हो तो कुछ मामलों में एक लाख रुपये से ज्यादा की सहायता भी दी जा सकती है।
किन फसलों पर मिलता है फायदा, कौन रह जाता है बाहर
इस योजना में ज्यादातर अनाज वाली फसलों को शामिल किया गया है। जैसे गेहूं, धान, मक्का, बाजरा, मूंग, मसूर और राई जैसी फसलें अगर आग से खराब हो जाएं तो किसान मुआवजा पाने के हकदार होते हैं। लेकिन गन्ने की फसल को इसमें शामिल नहीं किया गया है। यानी अगर गन्ने के खेत में आग लगती है तो उस नुकसान के लिए इस योजना के तहत कोई मदद नहीं मिलती।
आवेदन करने के लिए मुख्य दस्तावेज
– आवेदन करने वाले किसान का फोटो
– आवेदक किसान का मोबाइल नंबर, जो आधार से लिंक हो
– दुर्घटनाग्रस्त स्थान का फोटो
– स्वप्रमाणित घोषणा-पत्र (सत्यापित,खुद साइन करके सत्यापित की गई कॉपी)
– प्रतिभूमि का प्रारूप
– किसान के दस्तावेजों में हस्ताक्षर या अंगूठे का प्रमाणित चिह्न
फसलों में अचानक आग लग जाना
गर्मी के मौसम में जब तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है तो बिजली के तार (वायर) भी गर्म हो जाते हैं। अगर कहीं तार ढीले हों या आपस में टकरा जाएं या उनमें खराबी हो तो स्पार्क (चिंगारी) निकल सकती है। यही छोटी सी चिंगारी सूखी फसल के संपर्क में आते ही आग पकड़ लेती है।
दूसरी बड़ी वजह खुद फसल की हालत होती है। कटाई के समय गेहूं जैसी फसलें पूरी तरह सूखी होती हैं उनमें नमी बहुत कम रह जाती है। ऐसे में तेज गर्मी, गर्म हवा (लू) या हल्की सी चिंगारी भी आग को तेजी से फैलने में मदद करती है। कई बार खेतों में मशीनों के इस्तेमाल से भी चिंगारी निकल सकती है या लोग बीड़ी-सिगरेट पीकर फेंक देते हैं जिससे सूखी घास या फसल में आग लग जाती है। कुछ मामलों में कांच का टुकड़ा या प्लास्टिक धूप में इतना गर्म हो जाता है कि वह भी सूखी घास को जला सकता है।
खेतों में आग लगने की ये घटनाएं सिर्फ एक हादसा नहीं होता है ये किसानों की पूरी जिंदगी पर असर डालने वाली बड़ी समस्या बनती जा रही हैं। एक तरफ जलवायु परिवर्तन और बढ़ती गर्मी, दूसरी तरफ बिजली व्यवस्था की लापरवाही इन दोनों के बीच किसान सबसे ज्यादा नुकसान झेल रहा है। कुछ ही मिनटों में सालभर की मेहनत जलकर राख हो जाती है और किसान आर्थिक संकट में फंस जाता है।
हालांकि सरकार की योजनाएं जैसे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और मुख्यमंत्री खेत खलिहान दुर्घटना सहायता योजना राहत देने का दावा करती हैं लेकिन जमीन पर अब भी कई कमियां हैं खासतौर पर आग से होने वाले नुकसान को लेकर। सबसे बड़ा सवाल यह कि है क्या हर बार नुकसान के बाद सिर्फ मुआवजा ही समाधान है या फिर ऐसी घटनाओं को पहले ही रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?
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