सर्दियाँ आते ही साग खाने का मन करता है। साग शरीर को ठण्ड में अंदर से गर्म रखता है। इसकी वजह से स्वास्थ्य स्पेशलिस्ट साग खाने की सलाह देते हैं। साग में विटामिन, मिनरल, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे पोषक तत्व होते हैं जो शरीर को गर्म रखने, पाचन बेहतर करने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करते हैं।
ऐसे तो सरसों का साग, चने का साग, पालक और बथुए का साग अधिकतर लोगों को पता है लेकिन खेसारी का नाम शायद ही लोगों को पता हो। खेसारी का साग ग्रामीण इलाकों में आज भी बड़े चाव से खाया जाता है और देशी अंदाज में बनाया भी जाता है।
सर्दियों की हल्की धूप, आँगन में जलता चूल्हा और ताज़े साग की खुशबू यही तो है गाँव की असली पहचान। खेतों में उगने वाला खेसारी का साग लोग बड़े चाव से खाते हैं। वैसे तो खेसारी का साग शहरों में भी मिलता है लेकिन जो बात गांव के खेत के खेसारी के साग में है वो बात शहर में मिलने वाले खेसारी के साग में कहाँ? खेसारी के साग को देशी अंदाज में बनाने का तरीका खास होता है और इसका स्वाद भी भूला नहीं जाता।
खेसारी का साग बनाने के लिए साम्रगी
खेसारी का ताज़ा साग – 1 गठ्ठा
सरसों का तेल – 2 टेबलस्पून
लहसुन – 6–7 कलियाँ (कुटी हुई)
हरी मिर्च – 2 (कटी हुई)
नमक – स्वाद अनुसार
खेसारी के साग बनाने की विधि
खेसारी के साग को अच्छी तरह से मोटे डंठल अलग कर दें और पत्तों को बारीक काट लें। खेसारी को पानी से 3 से 4 बार से धोएं क्योंकि इनमें मिट्टी ज्यादा होती है। कुकर या पतीली में साग, थोड़ा पानी, नमक डालकर 4 से पांच सीटी लगाएं। इसके बाद कुकर को खोलकर साग को मथानी / दलघोटनी से अच्छे से मिला ले। शहर में इसे मिक्सी में भी पीस सकते हैं।
इसके बाद साग में कटा हुआ लहसुन, कटा हुआ हरी मिर्च और कच्चा सरसों का तेल डाल कर इसे चलाएं। अब यह खाने के लिए तैयार है इसे गरम-गरम मक्के की रोटी, बाजरे की रोटी या चावल के साथ परोसें।
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