अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाले सामानों पर 26% टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने का ऐलान किया है। इसका सीधा मतलब यह है कि भारत से जो भी चीजें अमेरिका भेजी जाएंगी, उन पर अब 26% टैरिफ लगेगा जिसका असर उपभोक्ता (खरीदने वाले) पर पड़ेगा। अमेरिकी बाजार में उनकी मांग पर असर पड़ सकता है।
ट्रंप ने इस टैरिफ को “डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ” (छूट युक्त पारस्परिक शुल्क) नाम दिया है। यह फैसला 5 अप्रैल 2025 से लागू होगा। पहले चरण में 10% शुल्क लगेगा, फिर 9 अप्रैल से 16% और जुड़ जाएगा, जिससे कुल 26% टैक्स हो जाएगा।
टैरिफ क्या होता है?
टैरिफ यानी एक तरह का टैक्स, जो किसी देश से आने वाले सामान पर लगाया जाता है। जब कोई देश बाहर से कोई चीज मंगवाता है, तो उसकी कीमत बढ़ जाती है, क्योंकि उसमें यह अतिरिक्त टैक्स जुड़ जाता है। इसका असर आम लोगों तक पहुंचता है, क्योंकि दुकानदार इस बढ़ी हुई कीमत को ग्राहकों से वसूलते हैं।
उदाहरण के लिए – अगर पहले 10,000 रुपये में अमेरिका को कोई भारतीय इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद भेजा जाता था, तो अब उस पर 2,600 रुपये और टैक्स देना होगा। यानी अब वह 12,600 रुपये में बिकेगा। इससे अमेरिकी ग्राहक उसे महंगा मानकर खरीदने से बच सकते हैं, जिससे भारतीय कारोबारियों की बिक्री घट सकती है।
अमेरिका ने यह टैरिफ क्यों लगाया?
अमेरिकी सरकार का कहना है कि भारत ने हमेशा अमेरिकी उत्पादों पर ज्यादा टैक्स लगाया, जबकि अमेरिका भारतीय सामानों पर कम टैक्स लगाता था। अमेरिका के मुताबिक –
वाइट हॉउस के कथन में इसका विशेलषण किया गया और उदाहरण दिया कि जैसे अमेरिकी पैसेंजर गाड़ियां है उन पर भारत 70 % टैरिफ लगाता था और अमेरिका सिर्फ 2.5 % टैरिफ लगाता था इसलिए टैरिफ बढ़ाना जरुरी था। इसी तरह अमेरिका भारतीय एप्पल कंपनी को 0 % टैरिफ पर अनुमति दे देता है लेकिन यही भारत अमेरिका से आए एप्पल पर 50 % का टैरिफ लगाता था। ऐसे ही अमेरिकी चावल पर भारत 80 % टैरिफ लगाता है तो वहीं भारतीय चावल पर अमेरिका 2.7 % टैरिफ लगता था।
इस असमानता को खत्म करने के लिए ही अमेरिका ने यह नया टैरिफ लगाया है।
26 % टैरिफ का भारत पर असर
1. इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री पर भारी असर
भारत से अमेरिका को स्मार्टफोन, लैपटॉप, माइक्रोचिप, सर्किट बोर्ड जैसे कई इलेक्ट्रॉनिक सामान निर्यात किए जाते हैं। अब उन पर 26% अतिरिक्त टैक्स लगने से भारतीय कंपनियों को नुकसान हो सकता है।
भारत में तमिलनाडु और कर्नाटक ऐसे राज्य हैं, जहां से अमेरिका को बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक सामान भेजा जाता है।
यह टैरिफ इन राज्यों की आईटी और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है।
इससे भारतीय कंपनियों का अमेरिका में सामान बेचना मुश्किल हो जाएगा और शायद अमेरिकी ग्राहक अब चीन जैसे देशों से सामान खरीदने लगें।
2. भारतीय दवाइयों को राहत
अच्छी खबर यह है कि अमेरिका ने भारतीय फार्मास्युटिकल (दवा) उद्योग पर टैरिफ नहीं लगाया है।
भारत दुनिया की सबसे बड़ी दवा सप्लाई चेन में शामिल है, और अमेरिका में भारतीय दवाओं की बहुत मांग है।
इससे भारतीय दवा कंपनियों को कोई बड़ा झटका नहीं लगेगा।
3. स्टील, एल्युमिनियम और ऑटोमोबाइल सेक्टर को नुकसान
अमेरिका ने भारत के स्टील, एल्युमिनियम और ऑटोमोबाइल पर 25% टैरिफ लगा दिया है।
इससे भारत से अमेरिका भेजी जाने वाली गाड़ियां और धातु उत्पाद महंगे हो जाएंगे।
अगर पहले कोई भारतीय गाड़ी अमेरिका में 30 लाख रुपये में बिकती थी, तो अब 26% टैरिफ के बाद उसकी कीमत 37.8 लाख हो जाएगी।
इसका असर भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर पड़ेगा, क्योंकि अमेरिका भारतीय कारों और बाइक का बड़ा बाजार है।
4. भारतीय कंपनियों को हो सकता है फायदा?
हालांकि, इस टैरिफ का एक पॉजिटिव असर भी हो सकता है –
अमेरिकी उत्पाद अब महंगे हो जाएंगे, जिससे भारतीय ग्राहक देशी कंपनियों के सामान को ज्यादा तवज्जो दे सकते हैं।
अगर अमेरिकी कंपनियां भारतीय बाजार में महंगे हो गईं, तो देशी कंपनियों की बिक्री बढ़ सकती है।
अब आगे क्या होगा?
भारत सरकार इस 26% टैरिफ पर विचार कर रही है। अगर भारत अमेरिका से आयात होने वाले सामानों पर 52% टैरिफ कम कर देता है, तो उम्मीद की जा रही है कि अमेरिका भी अपने टैरिफ में राहत दे सकता है।
भारत और अमेरिका के बीच पहले भी इस तरह के व्यापारिक विवाद होते रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत कूटनीतिक बातचीत से इस टैरिफ को कम करा पाता है या नहीं।
आम जनता पर असर क्या होगा?
1. अमेरिकी सामान महंगा होगा – अब अमेरिकी कारें, मोबाइल और गैजेट्स ज्यादा महंगे हो जाएंगे।
2. भारतीय कंपनियों को मौका मिलेगा – देशी कंपनियों के लिए अमेरिकी कंपनियों से मुकाबला करना आसान हो सकता है।
3. आईटी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर असर – इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटो सेक्टर को नुकसान हो सकता है।
4. दवा उद्योग सुरक्षित है – भारतीय दवाइयों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
5. व्यापार युद्ध की संभावना – अगर भारत जवाबी कदम उठाता है, तो दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव और बढ़ सकता है।
अब देखना होगा कि क्या भारत इस टैरिफ को कम करने के लिए अमेरिका से बातचीत करता है या इसका मुकाबला दूसरे तरीकों से करता है।
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