दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण पर पूरे देश में चिंता जताई जा रही है, लेकिन इसी बीच उड़ीसा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी माइनिंग, औद्योगिक गतिविधियों और जंगलों की कटाई से पर्यावरण तेजी से प्रभावित हो रहा है। जहां एक ओर विकास के नाम पर बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स लगाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शुद्ध हवा, हरियाली और खेती योग्य ज़मीन लगातार खत्म होती जा रही है। इन इलाकों में सैकड़ों बीघे उपजाऊ खेती उजाड़ दी गई, जिससे किसानों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है। फैक्ट्रियों और खनन कार्यों से निकलने वाली धूल और जहरीली गैसें स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा रही हैं। सांस की बीमारियां, त्वचा रोग और आंखों से जुड़ी समस्याएं आम होती जा रही हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते माइनिंग और फैक्ट्री प्रदूषण पर नियंत्रण, जंगलों की कटाई पर रोक और पर्यावरणीय नियमों का सख्ती से पालन नहीं किया गया, तो आने वाले समय में हालात और भी भयावह हो सकते हैं। विकास के साथ-साथ प्रकृति और मानव जीवन की सुरक्षा को प्राथमिकता देना अब बेहद ज़रूरी हो गया है।
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