दिल्ली की सुबह आज फिर धुंध और ज़हरीली हवा के साथ शुरू हुई। ठंडी हवाओं और गिरते तापमान के बीच शहर पर प्रदूषण की मोटी परत छाई हुई है जिसने लोगों की सांस लेना तक मुश्किल कर दिया है। सड़कों पर धुंध, आंखों में जलन और गले में खराश। ये अब सिर्फ़ मौसम की निशानियाँ नहीं बल्कि राजधानी की रोज़मर्रा की हक़ीक़त बन चुकी हैं। बदलते मौसम के साथ प्रदूषण का स्तर लगातार ख़तरनाक स्थिति में बना हुआ है।
दिल्ली एनसीआर में ज़हरीली परत छाई हुई है। दिल्ली में वर्तमान में AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) 500 तक पहुंच गया है जो गंभीर श्रेणी का उच्चतम स्तर है। प्रदूषण इतना बढ़ चुका है कि दिल्ली में ग्रेप 4 भी लग चुका है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार सुबह AQI 498 तक पहुंच गया है। दिल्ली में 40 में से 27 निगरानी केंद्रो पर हवा गंभीर और 12 पर बहुत खराब दर्ज की गई श्रेणी में बना रहा। सीपीसीबी के मुताबिक़ 500 से ऊपर AQI दर्ज नहीं किया जाता। इस प्रदूषण और घनी धुँध के कारण एयरपोर्ट पर उड़ान संचालन प्रभावित हो रही है। जानकारी के अनुसार बीते कल में 61 उड़ाने रद्द कर दी गई है। बता दें इस प्रदूषण में लोगों को सांस लेना भी मुश्किल हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश, पुरानी गाड़ियों पर कार्रवाई का रास्ता साफ
राष्ट्रीय राजधानी में लगातार बेहद खराब होती वायु गुणवत्ता के बीच सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर को अपने पहले के आदेश में अहम बदलाव किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली-एनसीआर की संबंधित अथॉरिटी अब उन पुरानी गाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है जो BS-IV एमिशन स्टैंडर्ड का पालन नहीं करतीं। (BS-IV यानी भारत स्टेज-4 एमिशन स्टैंडर्ड गाड़ियों से निकलने वाले धुएँ और ज़हरीली गैसों को नियंत्रित करने का एक सरकारी नियम है। इसका मक़सद यह तय करना होता है कि कोई गाड़ी हवा में कितनी गंदगी (प्रदूषण) फैला सकती है।) इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि अगस्त में दिए गए आदेश को इस रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए कि प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों को खुली छूट मिल जाए।
अदालत ने 12 अगस्त के अपने पुराने आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि BS-IV से कम उत्सर्जन मानकों वाली गाड़ियों पर कार्रवाई की जा सकती है, चाहे उनकी उम्र कुछ भी हो। हालांकि, जो गाड़ियां BS-IV या उससे ऊंचे मानक को पूरा करती हैं, उन पर 10 साल (डीज़ल) और 15 साल (पेट्रोल) की तय समय सीमा लागू नहीं होगी। गौरतलब है कि अगस्त के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर में पुरानी गाड़ियों के खिलाफ ज़बरदस्ती कार्रवाई पर रोक लगाई थी जिसे अब प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए आंशिक रूप से बदला गया है।
दिल्ली में GRAP-4 लागू
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने GRAP-4 के तहत कई कड़े फैसले लागू कर दिए हैं। सभी सरकारी और निजी दफ्तरों में अब 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य कर दिया गया है। केवल आवश्यक सेवाओं से जुड़े विभाग जैसे स्वास्थ्य, अग्निशमन, आपदा प्रबंधन और परिवहन को इस व्यवस्था से छूट दी गई है।
स्कूलों की पढ़ाई और मज़दूरों के लिए राहत
शिक्षा व्यवस्था में भी बदलाव किए गए हैं। कक्षा 1 से 5 तक की पढ़ाई ऑनलाइन होगी जबकि कक्षा 10वीं और 12वीं को छोड़कर बाकी कक्षाएं हाइब्रिड मोड में चलेंगी। दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने बताया कि इससे पहले 16 दिनों तक GRAP-3 लागू रहने के कारण निर्माण कार्य बंद रहे जिससे मज़दूरों को नुकसान हुआ। इसी को देखते हुए सरकार ने निर्माण कार्य में लगे पंजीकृत और सत्यापित मज़दूरों को 10,000 रुपये मुआवज़ा देने का फैसला लिया है। कपिल मिश्रा के अनुसार GRAP-4 के दौरान सभी दफ्तरों में अधिकतम 50% स्टाफ ही ऑन-ड्यूटी रहेगा जबकि बाकी कर्मचारी घर से काम करेंगे। सरकार आने वाले दिनों में GRAP-4 लागू रहने की अवधि की भी गणना करेगी।
ज़हरीली हवा का असर, फेफड़ों पर कोरोना जैसा ख़तरा
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण का असर अब सीधे लोगों के फेफड़ों पर दिखाई देने लगा है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों ने सीटी स्कैन के दौरान फेफड़ों में ऐसे पैच देखे हैं जो कोरोना संक्रमण के समय बनने वाले निशानों से मिलते-जुलते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह बदलाव लंबे समय तक ज़हरीली हवा में सांस लेने की वजह से हो रहा है।
चिकित्सकों के अनुसार, हवा में मौजूद पीएम 2.5 जैसे बेहद बारीक कण सांस के साथ सीधे फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं और वहां नुकसान पहुंचाते हैं। ये कण खून में भी घुल सकते हैं, जिससे सिर्फ सांस लेने में परेशानी ही नहीं होती बल्कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। प्रदूषित हवा से सांस की नली में जलन और सूजन की समस्या लगातार सामने आ रही है जिससे बच्चों, बुज़ुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर सबसे ज़्यादा असर पड़ रहा है।
बांदा में भी हवा की हालत बिगड़ी
दिल्ली के अलावा बुंदेलखंड के बांदा में भी हवा की हालत बिगड़ती जा रही है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक बांदा का वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI 253 दर्ज किया गया है जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है और सेहत के लिए नुकसानदेह माना जाता है। ऐसी स्थिति तब है जब बांदा में कोई बड़ा औद्योगिक क्षेत्र तक मौजूद नहीं है। इस बढ़ते प्रदूषण को लेकर शहर के छात्र नेताओं ने हवा को साफ रखने के लिए डिजिटल और ज़मीनी स्तर पर एक मुहिम शुरू की है। छात्र नेताओं का कहना है कि बांदा में प्रदूषण बढ़ने की मुख्य वजह कचरा जलाना, वाहनों की बढ़ती संख्या और हरियाली की कमी है। छात्र सोशल मीडिया और जनसंपर्क के ज़रिए लोगों से अपील कर रहे हैं कि वो पेड़ लगाए, बालकनी या छत पर गार्डन बनाये, छोटी दूरी पर पैदल या साइकिल का इस्तेमाल करें और कचरा और प्लास्टिक न जलाए। छात्र नेताओं ने प्रशासन और पर्यावरण विभाग से तुरंत कदम उठाने की मांग की है।
प्रदूषण का असर महिलाओं पर ज़्यादा क्यों पड़ता है?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार हवा में मौजूद पीएम 2.5 जैसे बेहद महीन कण सांस के ज़रिए सीधे फेफड़ों के अंदर गहराई तक पहुंच जाते हैं। ये कण फेफड़ों में सूजन बढ़ाते हैं, शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव पैदा करते हैं और धीरे-धीरे फेफड़ों के ऊतकों को नुकसान पहुंचाते हैं। कुछ प्रदूषक तो कोशिकाओं के ऊर्जा केंद्र माने जाने वाले माइटोकॉन्ड्रिया के काम को भी बिगाड़ देते हैं, जिससे कोशिकाएं कमजोर पड़ती हैं और कई बार नष्ट भी हो जाती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक़ महिलाओं पर प्रदूषण का असर ज़्यादा गंभीर होता है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि महिलाओं के फेफड़े और वायुमार्ग पुरुषों की तुलना में छोटे होते हैं। ऐसे में जब वे धुएं या जलन पैदा करने वाले प्रदूषकों के संपर्क में आती हैं, तो वही ज़हरीले कण उनके फेफड़ों में ज़्यादा मात्रा में जमा हो जाते हैं। इसके अलावा, शरीर में हार्मोनल बदलाव भी प्रदूषण के असर को बढ़ा सकते हैं। यही कारण है कि महिलाओं में सांस से जुड़ी बीमारियों और फेफड़ों की समस्याओं का खतरा प्रदूषण के कारण अधिक देखा जा रहा है।
दिल्ली में प्रदूषण और आज का मौसम
गुरुवार तड़के उत्तर भारत के कई हिस्सों में घना कोहरा छाया रहा। दिल्ली में हालात और गंभीर रहे जहां वायु गुणवत्ता “अत्यंत खराब” श्रेणी में दर्ज की गई। वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (EWS) के अनुसार राजधानी का AQI 358 रहा। ठंड बढ़ने के साथ कोहरा और स्मॉग भी गहराते जा रहे हैं। कई इलाकों में दृश्यता इतनी कम हो गई कि सामने खड़े व्यक्ति तक को देखना मुश्किल हो गया। बीते 24 घंटों में लगभग 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं लेकिन इससे प्रदूषण और धुंध से राहत नहीं मिल सकी।
वीकेंड पर बढ़ेगी ठंड, मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर के लिए नया अलर्ट जारी किया है। विभाग के मुताबिक 21 और 22 दिसंबर को ठंड का असर और ज़्यादा देखने को मिलेगा इसलिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। हालांकि अब तक तापमान में कोई बड़ी गिरावट दर्ज नहीं की गई है लेकिन गुरुवार से अधिकतम तापमान में करीब एक डिग्री सेल्सियस की कमी आ सकती है। दिल्ली और गाजियाबाद में दिन का तापमान थोड़ा कम रह सकता है, जबकि नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद में अधिकतम तापमान लगभग 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
आंशिक बादल और धुंध का असर जारी
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार दिल्ली में आसमान आंशिक रूप से बादलों से ढका रह सकता है। सुबह के समय कई इलाकों में हल्की से घनी धुंध छाई रह सकती है। राजधानी में दिन का तापमान 22 से 24 डिग्री और रात का तापमान 8 से 10 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। हवाएं सुबह उत्तर-पश्चिम दिशा से करीब 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी जो दोपहर में कुछ तेज़ हो सकती हैं जबकि शाम और रात में इनकी गति फिर से कम हो जाएगी।
धुंध की वजह से लखनऊ टी20 रद्द, सियासी बयानबाज़ी तेज
लखनऊ में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेला जाने वाला चौथा टी20 मुकाबला खराब मौसम के कारण रद्द हो गया, जिसके बाद यह मुद्दा सियासी बहस का विषय बन गया। बुधवार शाम सात बजे से भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेई इकाना स्टेडियम में मैच शुरू होना था लेकिन घनी धुंध के चलते खेल नहीं हो सका और रात करीब साढ़े नौ बजे मैच को रद्द घोषित कर दिया गया। मैच रद्द होने के बाद समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि दिल्ली का प्रदूषण अब लखनऊ तक पहुंच चुका है। उनके मुताबिक मैच रद्द होने की असली वजह कोहरा नहीं बल्कि स्मॉग है। उन्होंने आरोप लगाया कि लखनऊ की शुद्ध हवा के लिए बनाए गए पार्कों को भी भाजपा सरकार “इवेंटबाज़ी” के नाम पर नुकसान पहुंचा रही है। इसी पोस्ट में उन्होंने तंज कसते हुए लिखा, “मुस्कुराइए कि आप लखनऊ में हैं” की जगह अब कहना चाहिए “मुंह ढंक लीजिए क्योंकि आप लखनऊ में हैं।”
दिल्ली का प्रदूषण अब लखनऊ तक पहुँच गया है। इसीलिए लखनऊ में आयोजित होनेवाला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच नहीं हो पा रहा है। दरअसल इसकी वजह कोहरा या फ़ॉग नहीं, स्मॉग है।
हमने जो पार्क लखनऊ की शुद्ध हवा के लिए बनवाए थे, भाजपा सरकार वहाँ भी इंवेटबाजी करवाकर उन्हें बर्बाद करना चाहती… pic.twitter.com/X71TvretcV
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) December 17, 2025
अखिलेश यादव के बयान के बाद उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सफाई भी आई। सरकार ने कहा कि सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई को लेकर भ्रामक आंकड़े फैलाए जा रहे हैं और वास्तविक स्थिति को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि इस तरह की जानकारियां लोगों में बेवजह भ्रम पैदा कर रही हैं।
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