देश में कफ सिरप दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। कफ सिरप बनाने वाली करीब 800 से ज्यादा कंपनियों को नियामक प्राधिकरण ने नोटिस जारी किया है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) राजीव सिंह रघुवंशी ने 23 फरवरी को कहा मुंबई में उद्योग जगत की संस्था इंडियन फार्मास्युटिकल एलायंस (आईपीए) द्वारा आयोजित 11वें ग्लोबल फार्मास्युटिकल क्वालिटी समिट के दौरान यह बात कही।

भारत के औषधि नियंत्रक जनरल (डीसीजीआई) राजीव सिंह रघुवंशी 11वें वैश्विक फार्मास्युटिकल गुणवत्ता शिखर सम्मेलन में भाषण दे रहे हैं। (फोटो साभार: रॉयटर्स/फ्रांसिस मस्करेन्हा)
पिछले साल कुछ कफ सिरप ब्रांड्स दूषित होने की खबर सामने आई थीं, जिनके कारण बच्चों की कथित तौर पर मौत हुई। इसमें मध्य प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्य उभर कर सामने आए। इसके बाद कफ सिरप को लेकर चिंता गहरी होती चली गई और जाँच शुरू हो गई। जिससे दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठे।
यूपी पुलिस ने कोडीन आधारित कफ सिरप के बड़े पैमाने पर अवैध व्यापार के आरोप में 12 मेडिकल स्टोर मालिकों और दो अन्य पर मामला दर्ज किया था। इससे जुड़े मामले को विस्तार से जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर करें।
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देश के लगभग 90 % कफ सिरप की हुई जाँच
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार दवा नियामक ने पिछले एक साल में अब तक की सबसे व्यापक गुणवत्ता जांच में से एक की है और अधिकारियों ने देश के 90 प्रतिशत से अधिक कफ सिरप निर्माताओं का ऑडिट किया है। इसका मतलब लगभग 1,250 कंपनियों की साइटों पर विज़िट और जांच की गई।
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आपको बता दें कि दवा नियामक वह सरकारी संस्था होती है जो देश में बनने और बिकने वाली दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता पर नजर रखती है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी अधिकारियों ने लगभग 10 महीने की जांच के बाद लगभग 850 कफ सिरप निर्माता कंपनियों को नोटिस जारी किया है क्योंकि उनसे दवाओं की गुणवत्ता से जुड़ी गंभीर समस्याएं पाई गईं।
क्यों हुआ नोटिस जारी
जांच में सामने आया कि बहुत सी कंपनियां दवाओं को मानक गुणवत्ता (GMP और अन्य गुणवत्ता नियमों) के अनुरूप नहीं बना रही थीं। ऐसे यूनिटों को CAPA (Corrective and Preventive Action) नोटिस जारी किया गया है यानी सुधारात्मक और निवारक कार्रवाई करने को कहा गया ताकि भविष्य में किसी भी तरह की खामी न हो और लोगों की सेहत सुरक्षित रहे। कंपनियों को यह नोटिस इसलिए भी भेजा गया कि वे उत्पादों को सुधारें और जब तक संतोषजनक सुधार नहीं करते, तब तक उनके उत्पादन लाइसेंस पर रोक या सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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