खबर लहरिया Blog Chitrakoot News: कर्वी और बहिलपुरवा थाना क्षेत्र में दो नाबालिग लड़की से बलात्कार, पिता और चाचा पर बलात्कार का आरोप

Chitrakoot News: कर्वी और बहिलपुरवा थाना क्षेत्र में दो नाबालिग लड़की से बलात्कार, पिता और चाचा पर बलात्कार का आरोप

चित्रकूट जिले में दो अलग-अलग थाना अंतर्गत बलात्कार के मामले सामने आए हैं। पहला मामला बहिलपुरवा थाना क्षेत्र का है जहां 31 जनवरी 2025 को एक नाबालिक लड़की ने बच्ची को जन्म दिया। बताया जा रहा है कि नाबलिग के साथ बलात्कार किया गया है जिसका आरोप उसके सगे चाचा पर है। वहीं दूसरी खबर 1 फरवरी 2026 को सामने आई जिसमें आरोप है कि पिता ने अपनी बेटी का बलात्कार किया। हालाँकि पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी पिता और चाचा को गिरफ्तार कर लिया है।

थाना कोतवाली कर्वी की तस्वीर (फोटो साभार : खबर लहरिया)

रिपोर्ट – नाज़नी रिजवी, लेखन – सुचित्रा 

पिता पर बेटी से बलात्कार का आरोप

एक पिता को भगवान के बाद सबसे बड़ा रक्षक माना जाता है, लेकिन जब वही पिता अपनी ही बेटी का भक्षक बन जाए, तो वह केवल एक अपराध नहीं रह जाता, बल्कि पूरे समाज पर लगा एक गहरा और शर्मनाक कलंक बन जाता है। ऐसी घटनाएँ समाज की अंतरात्मा को झकझोर देती हैं, डर पैदा करती हैं, शर्मसार करती हैं। हमें यह सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि आखिर हमारा समाज किस दिशा में बढ़ रहा है।

चित्रकूट के कर्वी थाना क्षेत्र में एक पिता पर अपनी नाबालिग बेटी से कथित तौर पर बलात्कार का आरोप लगा है। बेटी की उम्र 14 साल है। यह घटना 30 जनवरी 2026 की है लेकिन मामला 1 फ़रवरी को सामने आया। शिकायतकर्ता की छोटी बहन ने बताया कि आरोपी (पिता) उन्हें घर की सफाई कराने के बहाने लेकर गया था। उस समय दोनों छोटे भाई-बहन को फुल्की खाने के लिए भेज दिया जबकि बड़ी बहन घर के अंदर थी। आरोप है कि शाम करीब 6:30 बजे आरोपी ने उसी दौरान यह घटना की।

पिता पर अपनी पत्नी की हत्या करने का भी आरोप

आरोप है कि आरोपी ने वर्ष 2023 में अपनी पत्नी की हत्या की थी। पत्नी की हत्या के मामले में वह जेल में सजा काट रहा था और 21 जनवरी 2026 को जेल से रिहा होकर बाहर आया। इसके बाद 31 जनवरी 2026 को उसने अपनी ही सगी बेटी के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया।

शिकायतकर्ता का कहना है कि यह पहली बार नहीं था। इससे पहले भी पिता ने उसके साथ ऐसी हरकत की थी। जब उसने यह बात अपनी मां को बताई, तो मां ने आरोपी को रोकने की कोशिश की। आरोप है कि इसी वजह से आरोपी ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी थी।

आरोपी के तीन बच्चे हैं – दो बेटियां और एक बेटा। पत्नी की हत्या के बाद जब आरोपी जेल में था, तब उसके बड़े भाई ने तीनों बच्चों की देखभाल की। बच्चों की पढ़ाई से लेकर पालन-पोषण तक की सारी जिम्मेदारी वही निभा रहे थे। जेल से रिहा होने के बाद आरोपी ने बच्चों को अपने साथ रखने की बात कही, लेकिन परिवार ने बच्चों को उसके पास भेजने से इनकार कर दिया।

परिवार ने बातचीत करने से किया इंकार

इस मामले में परिवार के लोग कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं। परिवार के कुछ सदस्य आरोपी के पैतृक गांव में रहते हैं, जबकि कुछ कस्बे में, लेकिन कोई भी इस विषय पर खुलकर बोलना नहीं चाहता। हालांकि, आस-पड़ोस की कुछ बुजुर्ग महिलाओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आरोपी ने अपनी पत्नी की हत्या भी इसी कारण से की थी। उनका कहना है कि आरोपी की नजर पहले से ही अपनी बेटी पर थी और पत्नी द्वारा विरोध किए जाने पर उसने उसकी हत्या कर दी।

आरोपी पर मामला दर्ज कर किया गिरफ्तार

एसपी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसे जेल भेज दिया गया है। इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

गांव में बना चर्चा का विषय

यह मामला पूरे मोहल्ले और शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। हर तरफ फुसफुसाहट और गुस्से का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आरोपी पहले से ही संदिग्ध था। मोहल्ले वालों में यह सवाल गूंज रहा है कि जब एक पिता ही ऐसा कृत्य करेगा, तो लड़कियां आखिर सुरक्षित कहां रहेंगी?

कुछ घटनाएँ किसी एक परिवार या एक घर की कहानी नहीं होती। ऐसे घटनाएं पूरे शहर पूरे इलाके में सनसनी फैला देती है। यह उस समाज की तस्वीर है, जहाँ चुप्पी अपराध से भी ज़्यादा खतरनाक बनती जा रही है। जैसे नाबालिक लड़की के साथ खुद के पिता का बलात्कार करना। घटना के बाद हर घर में चर्चा का विषय बन गई है। माएं अपनी बेटियों को लेकर चिंतित हैं। हर पिता शक की दायरे में है, यह पहली घटना या पहली कहानी नहीं है ऐसी कई घटनाएं हम ख़बरों में सुनते देखते रहते हैं।

सबसे भयावह बात यह है कि अपराधी सिर्फ एक व्यक्ति नहीं होता बल्कि इसका जिम्मेदार पूरा परिवार, मोहल्ला और समाज चुप भी होता है जो इस घटना का पता होते हुए भी चुप रहता है। समाज परिवार की ये चुप्पी अपराध को बढ़ावा देती है और उसे अपराध को छिपाने वाला हर वह व्यक्ति उस अपराध का भागीदार बन जाता है। शिकायतकर्ता को न्याय से पहले बदनामी का डर दिखाया जाता है और अपराधी को बचाने के लिए रिश्तों की दुहाई दी जाती है।

नाबलिग ने दिया बच्ची को जन्म, चाचा पर नाबलिग से बलात्कार का आरोप

दूसरा मामला बहिल पुरवा थाना क्षेत्र से सामने आया जहां 35 वर्षीय चाचा ने अपनी 14 वर्षीय भतीजी का कथित तौर पर बलात्कार किया। यह घटना तब सामने आई जब नाबलिग ने चित्रकूट के एक अस्पताल में बच्ची को जन्म दिया। जब अस्पताल वालों को संदेह हुआ कि बिना शादी के बच्चे को जन्म दिया तो पुलिस वालों को इसकी जानकारी दी। पुलिस पूछताछ में लड़की ने चाचा को आरोपी बताया।

एसपी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी चाचा को गिफ्तार कर लिया है।

एक नाबालिग लड़की जो खेलने, पढ़ने और सपने देखने की उम्र में थी, माँ बन गई है। हैरानी की बात तो यह है कि परिवार ने इस घटना को छिपाए रखा। जब बच्ची के साथ उसके अपने ही चाचा द्वारा इस तरह की घटना सामने आती है तब सवाल सिर्फ कानून का नहीं होता, सवाल मानसिकता का होता है – उस घर की, उस सोच की और उस समाज की जो “इज़्ज़त” के नाम पर सच को दफ़ना देता है।

आज समाज में लगातार ऐसी घटनाएँ बढ़ रही हैं, लेकिन सिर्फ इस वजह से क्योंकि घटना सामने आने पर लोग बोलना नहीं चाहते हैं। इस तरह की घटना को घर के अंदर ही दफना देना चाहते हैं लेकिन कहते हैं ना सच कहीं ना कहीं दिख जाता है और वही हुआ इन घटनाओं में भी लाख छुपाए लेकिन छुप नहीं सका। इस तरह की घटनाएं सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि क्या रिश्तों का कोई मतलब नहीं रह गया? क्या बेटियाँ अब इतनी बोझ बन चुकी हैं? लड़कियां अब घर में भी सुरक्षित नहीं रह गई हैं।

 

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