खबर लहरिया Blog चित्रकूट: स्कूल का हैंडपंप खराब होने से बच्चे हो रहे पानी के लिए परेशान

चित्रकूट: स्कूल का हैंडपंप खराब होने से बच्चे हो रहे पानी के लिए परेशान

बच्चों ने कहा, जब भी खाने की छुट्टी होती है तो हम लोग स्कूल में खाना तो खा लेते हैं पर जब प्यासे होते हैं तो कहां जाए पानी पीने। जब पानी नहीं मिलता है तो खाना गले में अटक जाता है।

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                 हैंडपंप खराब होने की वजह से स्कूल की दाइयों को खाना बनाने के लिए दसों बाल्टी पानी भरकर लाना पड़ता है/ फोटो – उच्च प्राथमिक विद्यालय की फोटो

Water Problem: चित्रकूट जिले के ब्लॉक मऊ,गांव सुरौंधा के उच्च प्राथमिक विद्यालय के पानी के हैंडपंप को खराब हुए एक महीने से ज़्यादा बीत चुके हैं। इससे सबसे ज़्यादा परेशानी स्कूल के बच्चों को हो रही है। बच्चों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। ऊपर से भीषण गर्मी भी हो रही है जिससे ज़्यादा प्यास भी लगती है।

स्कूल में पढ़ने वाली कक्षा छः की संजना और छाया ने बताया कि जब भी खाने की छुट्टी होती है तो हम लोग स्कूल में खाना तो खा लेते हैं पर जब प्यासे होते हैं तो कहां जाए पानी पीने। जब पानी नहीं मिलता है तो खाना गले में अटक जाता है। इस समय स्कूल में ही खाना बनता है। खाना तो खा लेते हैं पर थाली कहां धोएं। हम लोग थाली लेकर स्कूल के बाहर आधा-एक किलोमीटर दूर थाली धोने के लिए जाते हैं। वहां भी पानी भरने के लिए गाँव के लोगों की भीड़ लगी रहती है फिर उस समय तो हाथ धोना भी मुश्किल होता है।

आगे कहा, हम लोग जो कुछ बड़े बच्चे हैं तो वे हाइवे पार कर लेते हैं पर जो कक्षा एक या दो में पढ़ते हैं उनके लिए सड़क पार करना मुश्किल होता है। कभी भी घटना हो सकती है। जब पढ़ने लगते हैं तो भी प्यास लग जाती है।

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पानी नहीं तो कोई काम नहीं

स्कूल में खाना बनाने वाली रसोइयों सुआकली व राजरानी ने कहा कि हैंडपंप को खराब हुए महीना भर हो चुका है। प्रधान नहीं बनवा रहे हैं। सबसे ज़्यादा पानी के लिए समस्या हम लोगों को होती है क्योंकि सुबह से पानी की ज़रूरत होती है। स्कूल में लगभग डेढ़ सौ बच्चों का खाना बनाना पड़ता है। पहले आओ और बाल्टी लेकर पानी के लिए इधर-उधर भटको। जिनके निजी हैंडपंप लगे हैं वे पानी भरने नहीं देते फिर आधा किलोमीटर दूर जाओ तो खाना बनाने में ही देरी हो जाती है।

आगे बताया, खाना बनाने में कम से कम दसों बाल्टी पानी लगता है फिर जब बच्चे खा लेते हैं तो बर्तन धोने के लिए भी पानी लगता है। कभी-कभार स्कूल में गेहूं भी धोना होता है।

उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द स्कूल का हैंडपंप बनना चाहिए वरना सभी रसोइयां मिलकर ब्लॉक में शिकायत पत्र देंगी।

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क्या कहते हैं प्रधानाध्यापक व अधिकारी

इस समस्या को लेकर जूनियर स्कूल में प्रधानाध्यापक रामकिशोर ने कहा कि खराब हैंडपंप को लेकर वह ग्राम प्रधान को सूचना दे चुके हैं। इसके आलावा वह अपनी तरफ से ब्लॉक में भी लिखित सूचना दे चुके हैं। उनकी कोशिश है कि हैंडपंप जल्दी बन जाए।

मऊ ब्लाक के एडीओ पंचायत अनुराग पांडेय ने पानी की समस्या को लेकर कहा कि इसकी शिकायत उन्हें मिली है। बोरवेल मशीन नहीं मिल रही थी। पानी की व्यवस्था कराई जाएगी। वह सचिव को इस समस्या के समाधान के बारे में बोलेंगे।

इस मामले में स्कूल व प्रधान की काफी लापरवाही दिखी। अगर हैंडपंप के बनने में समय लग रहा है तो पानी का टैंकर या अन्य कोई सुविधा कराई जा सकती थी जिससे समस्या से उतने समय के लिए निपटा जा सकता था जो इस मामले में होता नहीं दिखा। बस कोई न कोई वजह बता दी गई समस्या का निपटारा न होने की।

इस खबर की रिपोर्टिंग सुनीता देवी द्वारा की गई है।

 

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