खबर लहरिया Blog Chitrakoot Ground Report: दहेज के लिए हिंसा, कानून के बावजूद गांवों में जारी अत्याचार

Chitrakoot Ground Report: दहेज के लिए हिंसा, कानून के बावजूद गांवों में जारी अत्याचार

                                

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के मऊ क्षेत्र से भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां एक महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज के लिए मारपीट करने और घर से निकाल देने का आरोप लगाया है।

रिपोर्टिंग – सुनीता देवी, लेखन – रचना 

महिला आरती अपने दो छोटे बच्चों के साथ (फोटो साभार: सुनीता देवी)

भारत में दहेज लेना और देना कानूनन अपराध है लेकिन कई गांवों में आज भी इसे सामाजिक रिवाज की तरह माना जाता है। दहेज न मिलने पर कई महिलाओं को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। कहीं उन्हें ताने दिए जाते हैं तो कहीं मारपीट कर घर से निकाल दिया जाता है। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के मऊ क्षेत्र से भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां एक महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज के लिए मारपीट करने और घर से निकाल देने का आरोप लगाया है।

पति और ससुराल पर मारपीट और दहेज मांगने का आरोप

खबर लहरिया टीम द्वारा बातचीत के दौरान महिला आरती ने बताया कि उनकी शादी करीब तीन साल पहले गांव बरियारी, ब्लॉक मऊ, जिला चित्रकूट के रहने वाले गुलशन के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही पति दहेज को लेकर अक्सर मारपीट करता है। आरती के पति यानी गुलशन का कहना है कि आरती के माता-पिता ने दहेज में दो पहिया गाड़ी और भैंस नहीं दी इसलिए उसे घर में रहने का अधिकार नहीं है। पति का कहना रहता है कि पहले अपने मायके से गाड़ी और भैंस लेकर आओ तभी घर में रहने दिया जाएगा।

आरती के मुताबिक उनके माता-पिता गरीब हैं और बटाई पर खेती करते हैं। ऐसे में डेढ़ लाख रुपये की गाड़ी और लगभग साठ हजार रुपये की भैंस देना उनके लिए संभव नहीं है। महिला का कहना है कि शादी में उनके परिवार ने फ्रिज, कूलर, बक्सा, आलमारी और अन्य सामान दिया था लेकिन पति को सिर्फ गाड़ी की ही मांग है। वह अक्सर शराब पीकर गाली देता है कमरे का दरवाजा बंद कर लाठी-डंडों से मारता है और जान से मारने की धमकी भी देता है।

दो छोटी बेटियों के साथ घर से निकाला, खाने तक की नहीं व्यवस्था

आरती ने बताया कि उनकी दो बेटियां हैं एक दो साल की और दूसरी तीन महीने की। उनका कहना है कि घर में कई दिनों से खाने-पीने की भी व्यवस्था नहीं है। यहां तक कि सरसों का तेल तक नहीं है जिससे वह अपनी बच्चियों को तेल लगा सकें। उन्होंने आरोप लगाया कि पति अक्सर कहता है कि वह उन्हें और बच्चियों को मार देगा। महिला का कहना है कि कई बार तीन-तीन दिन तक उन्हें भूखा रहना पड़ता है। जब वह घर में आटा, चावल, तेल या सब्जी की बात करती हैं तो पति गाली देकर कहता है कि “अपने पिता के घर से लेकर आओ।”                           

आरती ने थाने में की शिकायत (फोटो साभार: सुनीता देवी)

आरती के अनुसार शादी के बाद से ही मारपीट होती रही है लेकिन उन्होंने कभी मायके में इसकी जानकारी नहीं दी क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि पति सुधर जाएगा लेकिन बच्चों के जन्म के बाद स्थिति और खराब हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी सास रामसखी भी बेटे को मारपीट के लिए उकसाती हैं और चाहती हैं कि वह घर छोड़कर चली जाए।

मारपीट के बाद थाने पहुंची महिला, पति ने लगाए अलग आरोप

महिला का कहना है कि 12 मार्च को पति ने उन्हें बुरी तरह पीटा जिससे उनके शरीर में अंदरूनी चोट आई है। इसके बाद उन्हें दोनों बेटियों के साथ घर से निकाल दिया गया। उन्होंने बताया कि शादी में मिले फ्रिज, कूलर और बक्से जैसे सामान को भी पति ने तोड़ दिया है और कहा है कि जब तक गाड़ी नहीं मिलेगी तब तक इन सामानों की जरूरत नहीं है।

आरती ने बताया कि पति ने उनकी बच्चियों का गला दबाने की कोशिश भी की और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। किसी तरह वह दूसरे दरवाजे से निकलकर मऊ कोतवाली पहुंचीं और 12 मार्च को अपनी शिकायत देने आईं। उनका कहना है कि अगर पुलिस कार्रवाई नहीं करेगी तो उनकी जान को खतरा है।

थाना कोतवाली मऊ (फोटो साभार: सुनीता देवी)                                

वहीं दूसरी ओर पति गुलशन का कहना है कि उसकी पत्नी घर का काम नहीं करती और पड़ोसियों के यहां बैठ रहती है। उसने कभी दहेज की मांग नहीं की और पत्नी खुद ही घर छोड़कर चली गई है।

इस मामले में पुलिस का क्या कहना है?

मऊ कोतवाली के उपनिरीक्षक राम आधार सिंह का कहना है कि महिला 12 मार्च को थाने आई थी और आवेदन देकर चली गई थी। उन्हें यह आवेदन 13 मार्च को मिला है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के लिए गांव जाकर पति गुलशन को थाने लाकर पूछताछ की जाएगी। इसके बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

दूसरा पक्ष‌ इस मामले में गुलशन से बात की गई। पति‌ गुलशन‌ का कहना है की खाना नहीं बनाती पडोसीन‌ पास दरवार‌ करती रहती है हम तो कुछ नहीं मांग किया है अपने से घर से चली गई है हम नहीं निकाले हमारे मां के साथ नहीं रहती न खाना बना देती है 

 

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