यूपी के चित्रकूट के आयुष्मान आरोग्य मंदिर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खपटिहा ब्लॉक मऊ में बॉउंड्री न होने से आसपास गंदगी फैली रहती है और कोई सुरक्षा भी नज़र नहीं आती। उत्तर प्रदेश में कई जिलों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर खोले गए हैं लेकिन इसमें काम करने वाले कर्मचारी और डॉक्टरों को किन समस्याओं का सामान करना पड़ रहा है वो अस्पताल की तस्वीर से देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है। वैसे तो आयुष्मान आरोग्य मंदिर का नाम तो बदला गया लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी तस्वीर मटमैली और धुंधली नज़र आती है।

चित्रकूट के आयुष्मान आरोग्य मंदिर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खपटिहा ब्लॉक मऊ की बॉउंड्री टूटी फूटी (फोटो साभार : सुनीता देवी)
“आयुष्मान आरोग्य मंदिर” क्या है और क्यों?
Ayushman Arogya Mandir (आयुष्मान आरोग्य मंदिर) भारत सरकार के आयुष्मान भारत स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (संबद्ध/केंद्र-स्तरीय) Ayushman Bharat Health & Wellness Centre (CB-HWCs) का ही एक नाम/मॉडल है। इसका उद्देश्य प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को घर के पास देना है।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर का नाम बदला
आयुष्मान आरोग्य मंदिर का नाम पहले “Ayushman Bharat Health & Wellness Centres (AB‑HWCs)” यानी आयुष्मान भारत स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र था। इसे राज्य और केंद्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों/सब‑हेल्थ सेंटरों को एक नया रूप देकर सेवा‑आधारित मॉडल में बदलने के लिए ‑ Health & Wellness Centres के नाम से 2018 में शुरू किया गया था। सरकार ने 25 नवंबर 2023 को एक आधिकारिक पत्र जारी करके कहा कि Ayushman Bharat Health & Wellness Centres को अब “Ayushman Arogya Mandir” कहा जाएगा।
सरकार द्वारा इसका नाम तो बदल दिया गया लेकिन चित्रकूट के आयुष्मान आरोग्य मंदिर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अस्पताल की हालत ख़राब है इसे देखकर लगता ही नहीं कि यह कोई अस्पताल है, बस एक बोर्ड है जो इस बात का प्रमाण है कि यह अस्पताल है।
गाँव खप्टिहा के बालकृष्ण (फार्मासिस्ट) का कहना है कि आज लगभग पाँच साल से अस्पताल की बाउंड्री टूटी हुई है और अभी तक इसका निर्माण नहीं हुआ है। बाउंड्री न होने के कारण अस्पताल में गंदगी फैलती है और समान का नुकसान होता है। जहाँ दवाइयाँ रखी जाती हैं, उस कमरे की खिड़की और दरवाजा भी तोड़ दिए गए हैं। इस वजह से अस्पताल में बहुत नुकसान हो रहा है। यदि पूरा दरवाजा टूट गया तो दवाइयाँ सुरक्षित रखने के लिए और कोई जगह नहीं रहेगी।
आपको बता दें कि सरकारी डेटा के अनुसार Ayushman Arogya Mandir (पूर्व में Ayushman Bharat Health & Wellness Centres) उत्तर प्रदेश के हर जिले में कार्यरत हैं और चित्रकूट जिले में लगभग 155 ऐसे केंद्र काम कर रहे हैं।
अस्पताल में हैण्डपम्प और पानी की समस्या
गाँव खप्टिहा के बालकृष्ण (फार्मासिस्ट) का कहना है कि बाउंड्री न होने के कारण अस्पताल के भीतर स्थित हैण्डपम्प काम नहीं करते तो पानी की समस्या होती है और हम लोग पानी के लिए इधर-उधर भटकते हैं।
खप्टिहा गाँव से पानी लाना पड़ता है। अस्पताल में आने वाले मरीज भी पानी के लिए भटकते रहते हैं। विशेषकर गर्मियों के मौसम में यह समस्या और भी बढ़ जाती है। इस समय जो पानी हम लोग रखते हैं वही मरीजों को पीने के लिए देना पड़ता है। यदि अस्पताल में बाउंड्री और सुरक्षा होती तो हैण्डपम्प सुरक्षित रहता और पानी की समस्या कम हो जाती।
बालकृष्ण (फार्मासिस्ट) का कहना है कि बॉउंड्री नहीं है तो अन्नाजानवऱ अंदर घुस आते हैं और काफी गंदगी फैलाते हैं। बरसात के मौसम में पूरे फील्ड और बरांदे में कीचड़ और गिला गोबर फैल जाता है।इस वजह से मरीजों के बैठने की जगह भी नहीं रहती और अस्पताल परिसर में सफाई करना मुश्किल हो जाता है। कर्मचारियों व मरीजों के लिए बहुत कठिनाई होती है।
अस्पताल परिसर बना शादी ब्याह का स्थान
शादी विवाह के सीजन में जब गाँव में किसी के यहाँ बरात आती है तो लोग अस्पताल परिसर में रुक जाते हैं और पूरे बरांदे में दोना-पत्तल व अन्य कचरा फेंक देते हैं। इससे काफी गंदगी फैलती है और बैठने की जगह भी नहीं रहती।
अस्पताल परिसर में सफाई करवाना भी मुश्किल हो जाता है। यदि सफाई करने के लिए कहा जाए तो लोग झगड़ा कर देते हैं। हमारी मजबूरी होती है कि हम ही सफाई करें या किसी तरह करवाएँ।
अस्पताल के चारों तरफ बॉउंड्री जरुरी
बालकृष्ण (फार्मासिस्ट) कहते हैं अस्पताल में बाउंड्री होती तो हम सफाई का ध्यान रखते और अस्पताल के चारों ओर फूल और पेड़-पौधे लगाकर परिसर को सुन्दर बना सकते थे लेकिन बाउंड्री न होने के कारण, यदि पेड़-पौधे लगाए जाते हैं तो जानवर उन्हें चरकर या तोड़कर खराब कर देते हैं। गर्मी के मौसम में यहाँ कोई भी छाया नहीं है। मरीज भी पेड़ के नीचे कुछ देर आराम के लिए नहीं बैठ सकते। यदि बाउंड्री बन जाती है तो हम पेड़-पौधे लगाएंगे और अस्पताल परिसर को सुन्दर व मरीजों के लिए आरामदायक बनाएंगे।
अस्पताल की बाउंड्री आवेदन लेकिन कोई करवाई नहीं
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के एमओ डॉ. अशिष कनोरिया का कहना है कि अस्पताल की बाउंड्री के लिए उन्होंने अपने तरफ से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कई बार लिखित और मौखिक रूप से आवेदन किया लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। बाउंड्री निर्माण के लिए अपील/अर्जी देने को लगभग एक साल हो गया है, फिर भी कोई परिणाम नहीं आया।
यहाँ पास के गाँवों के मरीज दवा लेने आते हैं। एक दिन में लगभग 40-50 मरीज दवा लेने आते हैं। हम लोग अस्पताल में सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक दवा देते हैं जबकि फार्मासिस्ट शाम 5 बजे तक अस्पताल में रहते हैं। जब तक हम लोग रहते हैं तब तक देख-रेख करते हैं लेकिन उसके बाद कोई नहीं आता।
ग्रामीण पर अस्पताल में गंदगी फ़ैलाने का आरोप
अस्पताल में मौजूद कर्मचारी और डॉक्टर का कहना है कि गाँव के लोग अस्पताल परिसर में बालू और ईंटें गिरवा देते हैं। यदि हम लोगों से इसे रोकने के लिए कहते हैं तो लोग झगड़ा कर देते हैं और बहुत गंदगी फैलाते हैं।
वर्तमान में ठंड का मौसम है। थोड़ी देर धूप में बैठना भी असंभव है क्योंकि परिसर में गंदगी फैल गई है। बच्चे लैट्रिन कर देते हैं और अन्ना-जानवर रात भर अंदर रहते हैं। सुबह जब हम लोग आते हैं तो बरांदा पूरी तरह गोबर और गंदगी से भरा होता है।
खबर लहिरया की रिपोर्टर ने जब गांव वालों से इस पर बात की गई तो कोई जवाब देने सामने नहीं आया।
मऊ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक हारून का कहना है कि मऊ क्षेत्र में दो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं: पूरब पताई में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र – इसका भवन पूरा और बाउंड्री पूरी है। खप्टिहा में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र – इसकी कुछ बिल्डिंग जर्जर स्थिति में हैं और बाउंड्री पूरी तरह टूटी हुई है।
अधीक्षक का कहना है कि हमने अपने तरफ से विभाग में लिखित आवेदन दिया है। जब विभाग से बजट पास होगा तब इसका निर्माण किया जाएगा। हमारा प्रयास है कि यह मामला हमारे संज्ञान में है और इसे जल्द सुलझाने की कोशिश की जाएगी।
सरकार ने दस्तावेजों और जमीनी स्तर पर भले ही लोगों के स्वास्थ्य के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिर खोला हो लेकिन जब तक इसका आधार ही हिला हुआ है तो लोग कैसे खुद को सुरक्षित और स्वस्थ महसूस कर पाएंगे। सिर्फ नाम बदलने से विकास नहीं हो जाता इसके लिए जमीनी स्तर पर भी बदलाव और काम करने की जरूरत है।
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