छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। यहां पचपेड़ी नाका इलाके में रामकृष्ण केयर अस्पताल के पीछे बने सीवरेज टैंक की सफाई करने उतरे चार सफाईकर्मियों में से तीन की दम घुटने से मौत हो गई है जबकि एक की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।
बताया जा रहा है कि टैंक के अंदर जहरीली गैस भरी हुई थी जिसकी चपेट में आते ही सभी बेहोश हो गए और तीन लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। मरने वालों में अनमोल मांझी, गोविंद सेंद्रे और पेर्रा कुमार शामिल हैं।
घटना के बाद माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। यह घटना 17 मार्च 2026 की रात हुई। बीते रात में परिजनों ने अस्पताल के बाहर जमकर हंगामा किया और पुलिस के साथ उनकी झड़प भी हो गई। क्योंकि आरोप है कि परिजनों को अस्पताल के अंदर जाने से रोका जा रहा था। यहां तक कि कुछ लोगों ने पत्थरबाजी भी की। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन इस मामले को छिपाने की कोशिश कर रहा है और सही जानकारी नहीं दी जा रही। वहीं अस्पताल की तरफ से दो मौतों की ही पुष्टि की गई है जिससे मामला और ज्यादा विवादित हो गया है।
VIDEO | Three people died, allegedly after inhaling toxic gases inside a septic tank at a private hospital in Raipur, Chhattisgarh, late Tuesday evening. The incident occurred at Ram Krishna Care Hospital in the Pachpedi Naka area. Following the tragedy, grieving family members… pic.twitter.com/e5Ogr5C9mN
— Press Trust of India (@PTI_News) March 18, 2026
कैसे हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक यह घटना रात करीब आठ बजे की है। सीवरेज टैंक की सफाई के लिए मजदूरों को बुलाया गया था। जैसे ही पहला कर्मचारी नीचे उतरा वह जहरीली गैस की वजह से बेहोश होकर गिर पड़ा। उसे बचाने के लिए एक-एक कर उनके दो और साथी नीचे गए लेकिन वे भी उसी गैस का शिकार हो गए। बताया जा रहा है कि इस काम के लिए कुल दस मजदूर बुलाए गए थे।
मजदूरों के जान की कोई कीमत क्यों नहीं
देखा जाए तो देश में सफाई कर्मचारियों की मौत अब जैसे आम बात बनती जा रही है। किसी न किसी राज्य से आए दिन ऐसी खबरें सामने आ जाती हैं। लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर उठने वाले सवाल वहीं के वहीं रह जाते हैं। ये घटनाएं उस असंवेदनशील सोच को उजागर करती हैं जो समाज और काम देने वालों में अक्सर देखने को मिलती है जहां मजदूरों की जान की कीमत ही नहीं समझी जाती है।
सफाई कर्मचारियों को न तो उनके काम के मुताबिक सम्मान मिलता है और न ही जरूरी सुरक्षा इंतज़ाम। उन्हें बिना किसी सुरक्षा के खतरनाक कामों में झोंक दिया जाता है। सुरक्षित माहौल और सुरक्षा उपकरण मांगने का उनका अधिकार भले ही कागज़ों में मौजूद हो, लेकिन हकीकत में वह अक्सर नज़र नहीं आता। चाहे काम सरकारी हो या निजी कई बार मालिकों और ठेकेदारों की सोच यही होती है कि काम हर हाल में पूरा होना चाहिए भले ही इसके लिए मजदूरों की जान जोखिम में क्यों न डालनी पड़े। यही लापरवाही और सोच कई बार उनकी मौत का कारण बन जाती है।
लापरवाही के आरोप और परिजनों का गुस्सा
परिजनों का आरोप है कि मजदूरों (उनके बच्चों को) को बिना किसी सुरक्षा इंतज़ाम के सीधे गटर में उतार दिया गया। उन्हें जहरीली गैस होने की आशंका के बावजूद कोई सावधानी नहीं बरती गई। हादसे के बाद अस्पताल प्रबंधन ने अंदर किसी को जाने नहीं दिया जिससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। इस दौरान परिजनों ने प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
इस मामले में मौके पर खड़ी एम्बुलेंस को लेकर भी आरोप लगे कि उसे मीडिया से बचने के लिए वहां लगाया गया था। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और लापरवाही के आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है।
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इस मामले पर अभी मुआवज़ों को लेकर कोई बात नहीं की गई है।
अस्पताल प्रबंधन का बयान
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि घटना की जानकारी मिलते ही इमरजेंसी सेवाओं को तुरंत सक्रिय कर दिया गया था। उनके द्वारा दावा किया गया है कि वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। साथ ही इस काम से जुड़ी ठेकेदार एजेंसी को भी नोटिस जारी कर दिया गया है और मामले की आंतरिक जांच भी शुरू कर दी गई है।
जहरीली गैस से कैसे होती है मौत
सीवरेज टैंक के अंदर मल और गंदगी जमा रहती है जिससे बैक्टीरिया लगातार मिथेन जैसी जहरीली गैसें बनाते रहते हैं। ऐसे बंद टैंक में ऑक्सीजन बहुत कम होती है। इसी वजह से अंदर जाने वाले लोगों का दम घुटने लगता है उन्हें अचानक चक्कर या बेहोशी आ जाती है और समय पर बाहर न निकल पाने पर मौत हो सकती है।
सरकार द्वारा पेश किया गया आँकड़ा क्या कहता है
मंगलवार यानी 17 मार्च 2026 को लोकसभा में सरकार ने जो आंकड़े पेश किए वो काफी चौंकाने वाले हैं। साल 2017 से अब तक देशभर में सीवर और सेप्टिक टैंक हादसों में कम से कम 622 सफाई कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। इनमें से ज्यादातर परिवारों को मुआवजा मिला जरूर है लेकिन अब भी 52 परिवार ऐसे हैं जिन्हें आज तक कोई मदद नहीं मिली और छह मामलों को बिना किसी नतीजे के बंद कर दिया गया। ये जानकारी समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा चौधरी के सवाल के जवाब में सामने आई।
अगर राज्यों की बात करें तो सबसे ज्यादा 86 मौतें उत्तर प्रदेश में दर्ज हुई हैं। इसके बाद महाराष्ट्र में 82, तमिलनाडु में 77, हरियाणा में 76, गुजरात में 73 और दिल्ली में 62 लोगों की जान गई। लेकिन सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि मुआवजे में भी काफी गड़बड़ी सामने आई है। जैसे उत्तर प्रदेश में 86 में से 13 परिवारों को कोई पैसा नहीं मिला और 2 को अधूरा भुगतान हुआ। दिल्ली में भी 9 परिवारों को कुछ नहीं मिला जबकि महाराष्ट्र में 9 और गुजरात में 2 परिवार अब तक मुआवजे से वंचित हैं।
जिला स्तर पर भी हालात बेहतर नहीं हैं। उत्तर प्रदेश के चंदौली और अंबेडकर नगर जैसे जिलों में हुई मौतों के बाद भी किसी को मुआवजा नहीं मिला। वहीं गौतम बुद्ध नगर में 16 मौतों में से सिर्फ आधे मामलों में ही पूरा भुगतान हुआ बाकी में या तो कुछ नहीं मिला या केस बंद कर दिए गए।
सरकार का कहना है कि मैनुअल स्कैवेंजर्स का नियोजन निषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम 2013 के तहत 2023 के सर्वे में देश में एक भी मैनुअल स्कैवेंजर (मैनुअल स्कैवेंजिंग वह काम है जिसमें इंसान हाथ से मानव मल (गंदगी) को साफ करता है, आमतौर पर बिना मशीन और बिना सुरक्षा के।) नहीं मिला। लेकिन इससे पहले 2013 और 2018 के सर्वे में 58 हजार से ज्यादा लोगों की पहचान हुई थी जिनमें अकेले उत्तर प्रदेश में 32 हजार से ज्यादा लोग थे। इन लोगों को सरकार की तरफ से 40 हजार रुपये की एकमुश्त मदद दी गई, कुछ को ट्रेनिंग मिली और कुछ को अपना काम शुरू करने के लिए सब्सिडी भी दी गई लेकिन जमीनी हकीकत अब भी कई सवाल खड़े करती है।
कुछ और घटनाएँ
3 मार्च 2026 को मध्य प्रदेश के इंदौर में सीवर चैंबर की सफाई के दौरान दो नगर निगम कर्मचारियों की मौत का मामला सामने आया है।
MP: सीवर टैंक में सफाई के लिए उतरे दो मजदूरों की जहरीली गैस से हुई मौत
2 मार्च 2026 को बिहार के वैशाली जिले के सराय थाना क्षेत्र के अनवरपुर गांव में हुआ। गांव में एक पुराने करीब 15 फीट गहरे सेप्टिक टैंक की सफाई की जा रही थी। जिसमें चार मज़दूरों की मौत हुई थी।
Bihar: सेप्टिक टैंक की जहरीले गैस से चार मज़दूर की मौत, एक ही परिवार के सदस्य
बीते कुछ महीनों की बात करें तो भी ऐसी तीन से चार खबरें आ चुकी हैं। 2 सितंबर 2025 को बिहार के पटना में भी एक नए बिल्डिंग के निर्माण कार्य के दौरान दो मज़दूर वहां के सेप्टिक टैंक में फंस गए और दम घुटने से दोनों मजदूरों की मौत हो गई।
Bihar, Patna News: पटना में दो मज़दूरों की सेप्टिक टैंक में काम के दौरान दम घुटने से मौत
23 मई 2025 को राजस्थान, बीकानेर के करनी औद्योगिक क्षेत्र में तीन मजदूर सफाई के लिए सेप्टिक टैंक में उतरे और सेप्टिक टैंक के जहरीले गैस के कारण तीनों मजदूर की मृत्यु हो गई थी।
राजस्थान: बीकानेर में सेप्टिक टैंक में सफाई के लिए उतरे तीन मजदूरों की जहरीली गैस से मौत
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