खबर लहरिया Blog Chhattisgarh News: माओवादियों के ‘सर्वोच्च कमांडर’ देवाजी उर्फ ​​थिप्परी तिरुपति ने तेलंगाना पुलिस के सामने किया आत्मसमर्पण

Chhattisgarh News: माओवादियों के ‘सर्वोच्च कमांडर’ देवाजी उर्फ ​​थिप्परी तिरुपति ने तेलंगाना पुलिस के सामने किया आत्मसमर्पण

माओवादियों के ‘सर्वोच्च कमांडर’ माने जाने वाले देवाजी (Devuji) उर्फ ​​थिप्परी तिरुपति ने हथियार डाल दिए हैं। जानकारी के अनुसार देवजी ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष कल रविवार 22 फरवरी को आत्मसमर्पण किया। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साई ने इसे वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ अभियान में ‘सबसे बड़ी सफलता’ बताया है।

देवजी उर्फ ​​थिप्परी तिरुपति की तस्वीर (फोटो साभार: X/@IamTheStory__)

देश में नक्सलवाद को खत्म करने के लिए चलाये गए अभियान के तहत कई नक्सलवदियों ने आत्मसम्पर्ण किया। सरकार द्वारा नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य 31 मार्च है। इस लक्ष्य से पहले देवजी उर्फ ​​थिप्परी तिरुपति का आत्मसमर्पण करना नक्सलवाद का अंत बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 40 साल अंडरग्राउंड होने के बाद देवजी ने तेलगाना पुलिस के सामने आत्मसर्पण किया है।

कौन हैं देवाजी उर्फ ​​थिप्परी तिरुपति?

न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के अनुसार तेलंगाना के जगतियाल जिले के मूल निवासी देवाजी को पहले पुलिस द्वारा सीपीआई (माओवादी) का प्रमुख रणनीतिकार बताया गया था। माना जाता है कि 60 वर्ष से अधिक आयु के देवूजी ने मई 2025 में नंबाला केशव राव उर्फ ​​बसवराजु की मृत्यु के बाद प्रतिबंधित संगठन के महासचिव का पदभार संभाला था। खबरों के मुताबिक, देवाजी पर 1 करोड़ रुपये का इनाम था। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की स्थापना की और बाद में माओवादी पार्टी के केंद्रीय समिति सदस्य और पोलित ब्यूरो सदस्य बने।

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31 मार्च तक खत्म होगा नक्सलवाद

तेलंगाना में नक्सली नेता देवजी के आत्मसमर्पण पर छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा, “मार्च 2026 तक नक्सलवाद निश्चित रूप से समाप्त हो जाएगा।”

नक्सलवाद का विस्तार

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक नक्सल आंदोलन की शुरुआत 1967 में नक्सलबाड़ी (पश्चिम बंगाल) से हुई थी। इसके बाद आंदोलन झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और तेलंगाना में फैल गया। सबसे अधिक प्रभाव छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में देखने को मिला। इसमें बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा, कांकेर और दंतेवाड़ा जिले लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों का केंद्र रहे। इसके अलावा झारखंड का पश्चिम सिंहभूम और ओडिशा का कंधमाल जिला भी प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं।

 

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