छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित एसईसीएल की दीपका मेगा कोयला खदान में 7 जनवरी 2025 को ब्लास्टिंग के दौरान एक दर्दनाक हादसा हो गया। खदान में चल रही हैवी ब्लास्टिंग के समय उछला एक बड़ा पत्थर सड़क से पैदल गुजर रहे ग्रामीण लखन लाल पटेल के सिर पर जा गिरा।
गंभीर रूप से घायल लखन पटेल को तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मृतक की पहचान हरदीबाजार थाना क्षेत्र के रेकी गांव निवासी 60 वर्षीय लखन लाल पटेल के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक वह अपने साढ़ू भाई के यहां हरदीबाजार गए थे और पैदल घर लौटते समय हादसे का शिकार हो गए।
सुरक्षा में लापरवाही का आरोप, ग्रामीणों का प्रदर्शन
चश्मदीद गवाह और ग्रामीणों का आरोप है कि सुआ-भोड़ी फेस पर ब्लास्टिंग के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया गया। न तो पर्याप्त सेफ्टी ज़ोन बनाया गया और न ही आसपास मौजूद लोगों को सुरक्षित दूरी पर हटाया गया।स्थिति बिगड़ती देख मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस और प्रशासन लगातार लोगों को समझाने की कोशिश करते रहे। बाद में मुआवजा और नौकरी देने की घोषणा होने पर परिजन और ग्रामीणों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया।
खबरों के अनुसार सरपंच लोकेश्वर कंवर ने बताया है कि 5 जनवरी को हरदीबाजार, सराई सिंगार और रेकी गांव के लोगों की एसईसीएल के महाप्रबंधक कार्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी। उस बैठक में ग्रामीणों को भरोसा दिलाया गया था कि हैवी ब्लास्टिंग नहीं की जाएगी। इसके बावजूद ब्लास्टिंग जारी रही और उसी का नतीजा यह दर्दनाक हादसा बनकर सामने आया। जिससे इलाके में तनाव की स्थिति बन गई। हालात को संभालने के लिए पुलिस और सीआईएसएफ के जवान तैनात किए गए हैं। ग्रामीण पीड़ित परिवार को मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने की मांग कर रहे हैं।
घटना की होगी विभागीय जांच
ETV भारत के रिपोर्टिंग के अनुसार एसईसीएल के पीआरओ डॉ. सनिश चंद्र ने बताया है कि दीपका खदान रिहायशी इलाके के पास स्थित है और वहां खनन कार्य चल रहा है। खदान के आसपास से गुजरने वाले लोगों को हमेशा सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है और जरूरत पड़ने पर उन्हें रोका भी जाता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में यह समझना जरूरी है कि आखिर ब्लास्टिंग के दौरान पत्थर उस व्यक्ति तक कैसे पहुंचा इसकी पूरी जांच की जाएगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि घटना की विभागीय जांच कराई जाएगी और इसमें लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। पीआरओ के अनुसार हर ब्लास्टिंग से पहले सायरन बजाया जाता है ताकि आसपास के लोगों को सूचना मिल सके। इसके बावजूद घायल व्यक्ति को चोट कैसे लगी इसकी पड़ताल की जाएगी। साथ ही मृतक के परिवार को किस तरह की मदद दी जा सकती है इस पर भी विचार किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि ब्लास्टिंग की तीव्रता जरूरत के अनुसार ही रखी जाती है और सुरक्षा का ध्यान रखा जाता है।
CG SANDAS के अनुसार चश्मदीद गवाहों का कहना है कि ब्लास्टिंग से पहले न तो ठीक से सुरक्षा घेरा बनाया गया था और न ही वहां मौजूद लोगों को सुरक्षित दूरी पर भेजा गया। इसी वजह से यह सवाल उठ रहा है कि इतनी जोखिम भरी ब्लास्टिंग किसके निर्देश पर और किस हालात में कराई गई। हादसे के बाद से खदान इलाके में गुस्सा और नाराज़गी का माहौल है। कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों ने दीपका प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि पहले भी कई बार नियमों को नजरअंदाज कर सिर्फ उत्पादन बढ़ाने के लिए मजदूरों की जान खतरे में डाली गई है।
वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि दीपका खदान में “पहले उत्पादन, बाद में सुरक्षा” जैसी सोच अपनाई जा रही है। अगर समय रहते गलत तरीके से हो रही ब्लास्टिंग पर रोक लगाई जाती और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होती तो शायद यह जानलेवा हादसा टल सकता था। लोगों का यह भी कहना है कि घटना के बाद अब तक प्रबंधन की ओर से कोई ठोस जवाब या जिम्मेदारी तय करने की बात सामने नहीं आई है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह मामला भी पुराने हादसों की तरह कागजों में दब जाएगा या फिर इस बार किसी बड़े अधिकारी पर कार्रवाई होगी।
