कोहड़े की बड़ी छत्तीसगढ़ के गांवों की एक अनोखी देसी परंपरा है, जो सदियों से चली आ रही है। यह परंपरा खासतौर पर उन इलाकों में देखने को मिलती है, जहां खनन और कंपनियों की गतिविधियों के कारण पानी की भारी समस्या बनी रहती है। गर्मी के मौसम में हालात और भी मुश्किल हो जाते हैं। पानी की कमी की वजह से गांवों में ताज़ी सब्जियां मिलना बेहद कठिन हो जाता है। ऐसे हालात में गांव के लोग अपनी समझ और परंपरा के सहारे कोहड़े की बड़ी बनाकर साल भर के लिए सुरक्षित रख लेते हैं। यह कोई नई परंपरा नहीं है और न ही किसी कंपनी के आने से शुरू हुई है, बल्कि यह पीढ़ियों से चली आ रही ग्रामीण जीवन की आत्मनिर्भर व्यवस्था है।
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