छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के पोडगांव में ग्रामीणों ने अपने बच्चों की शिक्षा और भविष्य की चिंता करते हुए स्वयं ही स्कूल का निर्माण कर लिया है।
देश में स्कूलों की हालत खराब होने की खबरें आज कल मानों आम बात सी हो गई है और नक्सल प्रभावित इलाक़ों में शिक्षा की हालत और भी दयनीय है। बता दें छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के पोडगांव में ग्रामीणों ने अपने बच्चों की शिक्षा और भविष्य की चिंता करते हुए स्वयं ही स्कूल का निर्माण कर लिया है। कांकेर के पोडगांव के ग्रामीणों ने सामूहिक प्रयास से नई मिशाल पेस की है।
स्कूल की हालत जर्जर
दरअसल पोडगांव के पटेलपारा में प्राथमिक शाला है जो साल 2010 में बनाई गई थी। इसी स्कूल में आस-पास के गांव के बच्चे पढ़ने आते थे। लेकिन वर्तमान में स्कूल की स्थिति जर्जर हो चुकी है। छत में दरारें पड़ गया है। बारिश में छत टपकने लगी है। फर्स पर सीलन आने लगी और बारिश का पानी स्कूल के अंदर चला जाता है। इस समस्या का समाधान करने के लिए गांव के लोग श्रमदान और आपस में चंदा कर नया स्कूल बनाने का निर्णय किया और अब वह स्कूल बन कर तैयार भी हो चुका है।
विधायक और जिला प्रशासन से गुहार
गांव वालों ने स्कूल की मरम्मत के लिए कई बार विधायक और जिला प्रशासन से गुहार लगाई गई थी लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं मिल पाई। मदद ना मिलने पर गांव वालों ने गांव के सरपंच के साथ बैठक बुलाई और उनके मदद से गांव में चंदा और श्रमदान कर बच्चों के लिए नए स्कूल का निर्माण किया गया। सूत्रों के अनुसार पंचायत के तरफ से 70 हजार की मदद की गई और ग्रामीणों ने 100, 200 और 500 का चंदा किया। गांव वाले स्कूल का निर्माण भी स्वयं मेहनत कर अपना श्रमदान देकर किया। पोडगांव में जितने भी लोग हैं सभी खेती किसानी और मजदूरी करते हैं तो उनके पास चंदा करने के बाद इतना पैसा इकट्ठा नहीं हुआ कि दूसरों को मजदूरी दे सकें इसलिए ग्रामीणों ने स्वयं ही स्कूल निर्माण करने का सोचा और किया भी।
कलेक्टर ने कहा –
सूत्रों के अनुसार, ग्रामीणों के द्वारा की गई सामूहिक प्रयास का कलेक्टर को पता लगा। उन्होंने कहा है “ग्रामीणों के जरिए जिला प्रशासन को स्कूल बनाए जाने की जानकारी मिली है। हमने तत्काल टेक्निकल सेक्शन को कहा है कि वो पूरी स्थिति का मूल्यांकन करें। हमें जो भी आगे आदेश मिलता है उसके मुतबिक हम स्कूल को मदद करेंगे। राज्य सरकार का भी आदेश है कि जहां भी स्कूल या आंगनबाड़ी जर्जर है वहां नए भवन बनाए जाए।”
पोडगांव के लोगों की यह कोशिश छत्तीसगढ़ के कई आदिवासी इलाकों में सरकार की अनदेखी के बीच गांव वालों की एकता और मेहनत का एक अच्छा उदाहरण है। यह दिखाता है कि गांव वाले अपने दम पर भी बड़े काम कर सकते हैं लेकिन साथ ही यह भी बताता है कि प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई।
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