छत्तीसगढ़ के कांकरे जिले के रानीडोंगरी गावड़ेपार गांव के ग्रामीणों ने 15 साल तक पुल बनने का इतंजार किया। इस पुल को बनाने के लिए कई चक्कर भी काटे लेकिन ये जिम्मेदारी ग्रमीणों ने खुद पूरी की और स्थायी पुल बना डाला।
रानीडोंगरी गावड़ेपार के ‘दुमुहान नदी’ पर एक अदद पुल बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे जोकि ब्लॉक मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित था।
15 साल तक किया इंतजार
ग्रमीणों ने 15 साल तक इस रास्ते पर पुल बनाने के लिए मुख्यमंत्री से लेकर स्थानीय प्रशासन तक गुहार लगाई। सचिवालय से लेकर मुख्यमंत्री जनचौपाल, सुशासन तिहार, सरपंच, जनपद पंचायत, जनप्रतिनिधि, विधायक, जिला प्रशासन, सांसद और मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई गई, लेकिन समस्या का अब तक कोई समाधान नहीं हुआ। जब ग्रामीणों को और इंतजार नहीं हुआ और सरकार से उम्मीद टूट गई, तो ग्रामीणों ने ही हाथों में गैंती कुदाल लेकर वो कर दिया, जिसकी उम्मीद शायद किसी को ना थी।
चंदा इकट्ठा करके बनाया स्थायी पुल
ईटीवी भारत की रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीणों ने खुद चंदा इकट्ठा किया और श्रमदान दिया ताकि कम से कम बच्चों की पढ़ाई और मरीजों की जान बच सके। यह पुल भले देखने में सिर्फ मिट्टी पत्थरों का ढांचा हो लेकिन ये ग्रमीणों की आत्मनिर्भता और एजुटता को दर्शाता है।
पुल न बनने से परेशान थे ग्रामीण
ग्रमीणों ने बताया कि बरसात में यह रास्ता चलने लायक भी नहीं रहता था और बच्चे स्कूल भी नहीं जा पाते थे। यहाँ तक की मरीजों को अस्पताल ले जानें में भी काफी दिक्क्तें आती थी। नदी पार करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है। फ़िलहाल के लिए ग्रामीणों ने स्थायी पुल बनाया है ताकि उनकी कुछ मुश्किलें आसान हो जाएं।
छत्तीसगढ़ के कांकरे जिले के रानीडोंगरी गावड़ेपार गांव के ग्रामीणों का यह प्रयास दूसरों को भी प्रेरित करता है कि यदि ग्रामीण अपने गांव का विकास खुद करना चाहे तो उसे खुद पूरा कर सकते हैं। सरकार बस कहने को गांव में विकास करती है लेकिन इसकी सच्चाई अलग है यहां का विकास सरकार के इंतजार में सालों बैठा रहता है लेकिन कभी पूरा नहीं होता।
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