खबर लहरिया Blog Chhattisgarh: धान का टोकन नहीं मिलने पर किसान ने खाया ज़हर 

Chhattisgarh: धान का टोकन नहीं मिलने पर किसान ने खाया ज़हर 

धान बिक्री के लिए जरूरी टोकन नहीं मिलने से परेशान एक आदिवासी किसान ने कीटनाशक पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की। किसान की पहचान सुमेर सिंह गोड़ जिन्हें गंभीर हालत में कोरबा के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनका इलाज चल रहा है।  

किसान से मिलने पहुंची सांसद ज्योत्सना महंत (फोटो साभार: अमर उजाला)          

देश में किसान इस समय गहरे संकट से गुजर रहे हैं। कहीं खाद और बीज के लिए घंटों लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है तो कहीं बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और सूखे ने पूरी फसल बर्बाद कर दी है जिसकी भरपाई भी उन्हें नहीं मिल पाती। कर्ज, सरकारी दफ्तरों के चक्कर और व्यवस्था की लापरवाही ने किसानों को मानसिक रूप से तोड़ दिया है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि मेहनत और उम्मीद के सहारे जीने वाला किसान कई बार आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाने को मजबूर हो जाता है।

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में धान बिक्री के लिए जरूरी टोकन नहीं मिलने से परेशान एक आदिवासी किसान ने कीटनाशक पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की। यह घटना हरदी बाजार थाना क्षेत्र के कोरबी गांव की है। किसान की पहचान सुमेर सिंह गोड़ (उम्र लगभग 40–56 वर्ष) के रूप में हुई है जिन्हें गंभीर हालत में कोरबा के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनका इलाज चल रहा है। खबरों के अनुसार परिजनों के मुताबिक़ सुमेर सिंह के पास करीब 3.75 एकड़ जमीन है और उन्होंने इस साल 68 क्विंटल से ज्यादा धान उगाया था लेकिन तकनीकी कारणों और मोबाइल फोन न होने की वजह से उन्हें लंबे समय से टोकन नहीं मिल पा रहा था।

ये भी देखें – खाद की लाइन में खड़े किसान की गयी जान, खाद न मिलने से था टेंशन में

दफ्तरों के चक्कर, फिर भी नहीं मिली राहत

खबरों के अनुसार परिजनों और ग्रामीणों ने बताया है कि किसान पिछले डेढ़ महीने से धान बेचने की कोशिश कर रहा था। वह पटवारी से लेकर तहसील कार्यालय तक गया जनदर्शन में भी शिकायत दर्ज कराई लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। 11 जनवरी 2026 और 12 जनवरी 2026 की दरम्यानी रात करीब एक बजे सुमेर सिंह ने परेशान होकर कीटनाशक पी लिया। गिलास गिरने की आवाज सुनकर उनकी पत्नी मुकुंद बाई मौके पर पहुंचीं और पड़ोसियों की मदद से उन्हें पहले हरदी बाजार स्वास्थ्य केंद्र और फिर मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया। पत्नी का कहना है कि एक महीने से ज्यादा समय से धान नहीं बिक पाने के कारण उनका पति मानसिक तनाव में था।

ये भी देखें – किसानों की बढ़ती परेशानियां बांदा में 12 सरकारी नलकूप महीनों से बंद

प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रिया

घटना के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए रकबा सत्यापन में लापरवाही के आरोप में पटवारी कामिनी कारे को निलंबित कर दिया है और हरदी बाजार के तहसीलदार अभिजीत राजभानु को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। कोरबा के कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और जांच जारी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। वहीं,कोरबा से कांग्रेस सांसद ज्योत्सना महंत अस्पताल पहुंचीं और घटना को बेहद दुखद बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी मुख्यमंत्री वाले राज्य में एक आदिवासी किसान को जहर खाने के लिए मजबूर होना पड़ा जो प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

ये भी देखें – तीन हफ्ते में दो किसानों ने की शंभू बॉर्डर पर आत्महत्या

 

यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’

If you want to support  our rural fearless feminist Journalism, subscribe to our  premium product KL Hatke

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *