19 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में नया “धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026” (बिल) पास कर दिया गया। सरकार का कहना है कि यह कानून जबरदस्ती, लालच या धोखे से कराए जाने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए लाया गया है।
छत्तीसगढ़ में पिछले दो सालों से धर्मांतरण का मुद्दा लगातार चर्चा में रहा है। कई जगहों पर ईसाई समुदाय के लोगों के साथ मारपीट और चर्चों में तोड़फोड़ जैसी घटनाएं सामने आई हैं। वहीं कुछ आदिवासी समुदाय के लोगों ने अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन कर ईसाई धर्म अपनाया है जिसे वे अपने संवैधानिक अधिकार का हिस्सा मानते हैं। इसी माहौल के बीच 19 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में नया “धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026” (बिल) पास कर दिया गया। सरकार का कहना है कि यह कानून जबरदस्ती, लालच या धोखे से कराए जाने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए लाया गया है।
क्या हैं नए कानून के नियम और सजा
इस नए कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति गलत तरीके से धर्म परिवर्तन करवाते हुए पकड़ा जाता है तो उसे 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये का जुर्माना देना होगा। अगर ऐसी महिला नाबालिग या अनुसूचित जाति-जनजाति या पिछड़ा वर्ग से है तो सजा और सख्त हो जाएगी 10 से 20 साल तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना। वहीं अगर मामला सामूहिक धर्मांतरण का है तो दोषी को 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा और कम से कम 25 लाख रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा। यह कानून 1968 के पुराने कानून की जगह लेगा जिसे सरकार ने अब के समय के हिसाब से कमजोर माना। गृहमंत्री विजय शर्मा द्वारा यह बिल पेश किया लेकिन विपक्ष ने इस पर आपत्ति जताते हुए वॉकआउट किया और कहा कि इस पर और चर्चा होनी चाहिए। विपक्ष का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों के साथ-साथ सभी दलों के विधायकों की राय ली जानी चाहिए। सदन में यह बिल ध्वनि मत से पास हुआ।
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ध्वनि मत – ध्वनि मत (Voice Vote) संसद या विधानसभा में वोटिंग करने का एक आसान और तेज तरीका होता है। इसमें सभी सदस्य हाथ उठाकर या मशीन से वोट नहीं करते बल्कि अपनी आवाज़ से समर्थन या विरोध जताते हैं। जब कोई बिल या प्रस्ताव रखा जाता है तो सदन के अध्यक्ष या स्पीकर कहते हैं जो इसके पक्ष में हैं वे “हाँ” कहें और जो विरोध में हैं वे “ना” कहें। इसके बाद आवाज़ के आधार पर तय किया जाता है कि किस पक्ष की संख्या ज्यादा है। अगर “हाँ” की आवाज़ ज्यादा लगती है तो प्रस्ताव पास मान लिया जाता है।
हालांकि अगर किसी सदस्य को इस पर शक होता है कि सही गिनती नहीं हुई है तो वह औपचारिक वोटिंग (जैसे डिवीजन वोट) की मांग कर सकता है जिसमें हर सदस्य का वोट अलग-अलग गिना जाता है।
दोबारा दोषी पाए जाने पर सख्त सजा
धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 में बार-बार गलती करने वालों के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। अगर कोई व्यक्ति पहले भी अवैध तरीके से धर्मांतरण करवाने के मामले में पकड़ा गया हो और सजा काट चुका हो फिर दोबारा ऐसा करते हुए दोषी पाया जाता है तो उसे सीधे आजीवन कारावास की सजा दी जा सकती है। हालांकि अदालत के पास यह अधिकार रहेगा कि खास परिस्थितियों में सजा को कम किया जा सके। सरकार का कहना है कि इससे ऐसे मामलों पर सख्त रोक लगेगी और बार-बार अपराध करने वालों पर लगाम लगेगी।
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मदद करने वालों पर भी कार्रवाई और नए नियम
इस कानून में सिर्फ मुख्य आरोपी ही नहीं बल्कि धर्मांतरण में मदद करने वालों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। अगर कोई व्यक्ति इस प्रक्रिया में सहयोग करता हुआ पाया जाता है तो उसे कम से कम 6 महीने से लेकर 3 साल तक की जेल और करीब 2 लाख रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है।
इसके अलावा जो लोग अपनी मर्जी से धर्म बदलना चाहते हैं उन्हें भी पहले से प्रशासन को जानकारी देनी होगी। इसके लिए धर्म परिवर्तन से कम से कम 60 दिन पहले कलेक्टर को आवेदन देना जरूरी होगा। यही नियम उस व्यक्ति पर भी लागू होगा जो धार्मिक अनुष्ठान कराएगा जैसे पादरी, मौलवी या पुजारी। अगर बिना सूचना के धर्मांतरण किया जाता है तो उसे अवैध माना जाएगा और तुरंत कार्रवाई हो सकती है।
शादी के लिए धर्म बदलना माना जाएगा गलत
नए कानून में शादी के नाम पर धर्म बदलने को लेकर भी सख्ती की गई है। अगर कोई व्यक्ति सिर्फ शादी करने के लिए धर्म परिवर्तन करता है तो ऐसी शादी को कोर्ट मान्यता नहीं देगा और उसे रद्द कर सकता है। इसके लिए जोड़े को पहले ही अपने इरादे की जानकारी देनी होगी। शादी से पहले कम से कम 2 महीने पहले उन्हें धर्म परिवर्तन की सूचना देनी होगी जिसकी जांच जिला मजिस्ट्रेट करेंगे। सरकार का कहना है कि इससे धोखे या दबाव में होने वाले धर्म परिवर्तन को रोका जा सकेगा।
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छत्तीसगढ़ में क्यों पड़ी इस कानून की जरूरत
छत्तीसगढ़ सरकार का कहना है कि छत्तीसगढ़ के कई आदिवासी इलाकों जैसे बस्तर, जशपुर और रायगढ़ में धर्मांतरण को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। कुछ जगहों पर आदिवासियों के ईसाई धर्म अपनाने को लेकर तनाव बढ़ा है और कई बार यह आपसी झगड़े तक पहुंच गया। खासकर नारायणपुर जैसे इलाकों में हालात ज्यादा गंभीर हो गए जहां यह विवाद गुटों के बीच टकराव का कारण बना। बार-बार होने वाले झगड़ों और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को देखते हुए राज्य सरकार ने यह नया कानून लाने का फैसला किया ताकि ऐसे मामलों को रोका जा सके और हालात को नियंत्रित किया जा सके।
इन राज्यों में भी लागू हैं धर्मांतरण से जुड़े कानून
छत्तीसगढ़ ही नहीं देश के कई और राज्यों में भी धर्मांतरण को लेकर कानून बनाए गए हैं। इनमें ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्य शामिल हैं। इन राज्यों में अलग-अलग समय पर ऐसे कानून लागू किए गए हैं जिनका मकसद जबरदस्ती, धोखे या लालच देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण को रोकना है।
हालांकि हर राज्य में इन कानूनों के नियम और सजा का तरीका थोड़ा अलग हो सकता है लेकिन सभी का मुख्य उद्देश्य यही है कि किसी भी व्यक्ति की मर्जी के खिलाफ धर्म परिवर्तन न कराया जाए और कानून-व्यवस्था बनी रहे।
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