दिल्ली का पानी भी अब पीने लायक नहीं है। इस बात का खुलासा केंद्र सरकार के अधीन कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG / कैग) यानी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में हुआ। इससे पहले हाल ही में सबसे पहले दूषित पानी की खबर मध्य प्रदेश के इंदौर के भगीरथीपुरा में कई लोगों के मौत के साथ आई थी। इसके बाद ये खबर दूसरे राज्यों से भी आने लगी जिसमें गुजरात, रायपुर, गाजियाबाद का इंदिरापुरम से सामने आई। साफ़ पानी को लेकर अब चिंता काफी गहरी हो गई क्योंकि दूषित पानी पीने से कई बीमारियां खासतौर पर कैंसर जैसी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है।
क्या कहती है CAG (कैग) की रिपोर्ट
लल्लनटॉप की रिपोर्ट के अनुसार CAG (कैग) की रिपोर्ट में सामने आया कि जिन इलाकों में अंडरग्राउंड पानी की सप्लाई की जा रही है वहां सैंपल पीने योग्य नहीं पाए गए हैं। दिल्ली में अधिकतर इलाकों में अंडरग्राउंड पानी का सप्लाई हर घर में होता है जो काफी चिंताजनक है। ऐसी में वहां के लोगों को गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। CAG का मानना है कि पीने के पानी में रेडियोएक्टिव पदार्थों और भारी धातुओं की मौजूदगी जानलेवा हो सकती है। इससे जरूरी अंगों को नुकसान, एनीमिया और कैंसर हो सकता है।
जाँच में 55 % पानी के सैंपल फेल
CAG (कैग) की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी में अंडरग्राउंड पानी के सैंपलों में आधे से अधिक क्वालिटी जाँच में खरे नहीं उतरे जिससे साफ़ हो गया कि यह पानी पीने योग्य नहीं था। रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य भर में अंडरग्राउंड वाटर यानी जमीन के नीचे के पानी के 16,234 सैंपल लिए गए थे। इनमें आधे से अधिक, 55 फीसदी सैंपल फेल हो गए। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि दिल्ली में वर्तमान में यानी अभी जितनी जरूरत है पानी की उससे 25 फीसदी कम पीने के लिए उपलब्ध है।
दिल्ली जल बोर्ड के टेस्टिंग लैब में कर्मचारियों और उपकरणों की कमी
CAG (कैग) की जाँच में यह भी पाया गया कि जो टेस्टिंग की जा रही है वह भी ठीक से नहीं हो पा रही है। इसकी वजह है दिल्ली जल बोर्ड के टेस्टिंग लैब में कर्मचारियों और उपकरणों की कमी है। टेस्टिंग की भी जा रही है, वह भी BIS (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड) के तय मानक के हिसाब से नहीं हो रही है।
लल्लनटॉप की रिपोर्ट के अनुसार CAG (कैग) ने यह पाया कि पांच साल में बोरवेल और कुओं से 80-90 मिलियन गैलन पानी प्रति दिन सप्लाई किया गया। इस पानी को बिना सही किए, कच्चा ही लोगों के घरों में सप्लाई किया गया। सीएजी ने चेतावनी दी की यह सप्लाई का पानी स्वास्थ्य के काफी खतरनाक है।
इंदौर में दूषित पानी
दूषित पानी को लेकर चर्चा हाल में इंदौर के भगीरथीपुरा में मौत की वजह से रही। इन इलाकों में बच्चों में उल्टी दस्त की शिकायत पाई गई। केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन की रिपोर्ट में पाया गया कि मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में हर तीसरा गिलास पानी इंसान के पीने लायक नहीं है। 4 जनवरी 2026 को जारी कार्यक्षमता मूल्यांकन रिपोर्ट (Functionality Assessment Report) के मुताबिक मध्य प्रदेश में सिर्फ 63.3% पानी के सैंपल ही गुणवत्ता जांच में पास हुए। इसके बाद अन्य राज्यों से भी दूषित पानी को लेकर खबर आई।
MP Water News: एमपी के ग्रामीण इलाकों में हर तीसरा गिलास का पानी दूषित – जल जीवन मिशन की रिपोर्ट
रायपुर और गुजरात में दूषित पानी
मध्य प्रदेश के इंदौर के बाद गुजरात के गाँधी नगर में दूषित पेयजल से जुड़े टाइफाइड के मामलें सामने आए। ऐसे ही हालत छत्तीसगढ़ के रायपुर में भी देखने को मिले। इनसे जुड़ी घटना को विस्तार जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।
गाजियाबाद के इंदिरापुरम में दूषित पानी
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक अभय खंड के निवासियों ने अपने पीने के पानी के दूषित होने का मुद्दा उठाया है। लोगों ने आरोप लगाया कि सीवर का पानी गंगा के जल में मिल रहा है, जिससे इलाके में लोग बीमार पड़ रहे हैं।
अब दिल्ली से आई रिपोर्ट में भी दूषित पानी है। अब सरकार साफ़ पानी भी लोगों के घरों तक पंहुचा नहीं पपा रही है और न ही इस पर ध्यान दिया जाता है। लोगों के घरों में पानी पंहुचा देना ही काम पूरा नहीं हो जाता समय पर समय जाँच भी होनी चाहिए। सरकार चाहे किसी भी राज्य में हो इस बात का प्रमाण देती है कि कितनी भ्र्ष्ट है जिसे लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से कोई मतलब नहीं। खुद घरों में ऑफिस में साफ़ पानी के लिए वाटर वॉटर प्यूरीफायर का इस्तेमल करते हैं लेकिन आम जनता दूषित पानी पीने को मजबूर है।
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